कजरी तीज महोत्सव का उल्लास के साथ समापन, महिलाओं ने चल समारोह निकालकर किया ज्वारों का विसर्जन
पड़ाना सहित मगराना, मऊ नारायणपुर और कोलूखेड़ा में श्रद्धा से मनाया गया पर्व, सोलह श्रृंगार कर मंगल गीत गाते हुए निकलीं महिलाएं; तीज माता से मांगी सुख-समृद्धि
संवाददाता: मनोज कुमार पुष्पद
पड़ाना। नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कजरी तीज का पर्व पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। पड़ाना के साथ मगराना, मऊ नारायणपुर और कोलूखेड़ा गांव में तीन दिवसीय कजरी तीज महोत्सव के समापन अवसर पर महिलाओं ने चल समारोह निकाला। ढोल-नगाड़ों की धुन पर मंगल गीत गाते हुए महिलाएं स्थानीय तालाबों और जलाशयों तक पहुंचीं, जहां विधि-विधान से तीज माता की पूजा-अर्चना कर ज्वारों का विसर्जन किया गया।
दस दिन पहले घरों में बोए जाते हैं जवारे
कजरी तीज की धार्मिक परंपरा के तहत पर्व से करीब 10 दिन पहले महिलाओं द्वारा घरों में गेहूं के जवारे बोए जाते हैं। इन ज्वारों को माता पार्वती का स्वरूप मानकर श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है।
तीज के व्रत के बाद चतुर्थी तिथि पर ज्वारों के विसर्जन की परंपरा निभाई जाती है। बुधवार को महिलाओं ने इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए तीन दिवसीय उत्सव का समापन किया।
सोलह श्रृंगार कर चल समारोह में शामिल हुईं महिलाएं
विसर्जन से पहले महिलाओं ने पारंपरिक सोलह श्रृंगार किया और अपने-अपने मोहल्लों में एकत्रित हुईं। पके हुए ज्वारों को लकड़ी से तैयार मंदिरनुमा पालकी में आकर्षक तरीके से सजाया गया। इसके बाद महिलाएं पालकी को सिर पर रखकर चल समारोह में शामिल हुईं।
गांव की गलियों और मोहल्लों से निकले चल समारोह के दौरान महिलाएं पारंपरिक मंगल गीत गाती रहीं। ढोल-नगाड़ों की धुन पर महिलाओं ने नृत्य करते हुए कजरी तीज पर्व की खुशियां मनाईं। इससे पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बना रहा।
तालाब पहुंचकर की तीज माता की अंतिम पूजा
चल समारोह स्थानीय तालाब और पवित्र जलाशयों पर पहुंचा, जहां महिलाओं ने तीज माता की अंतिम पूजा-अर्चना की। इसके बाद परंपरागत तरीके से ज्वारों का विसर्जन किया गया।
महिलाओं ने तीज माता से परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगल की कामना की। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं धार्मिक आयोजन में शामिल हुईं।
ग्रामीण क्षेत्रों में दिखा उत्साह
पड़ाना के साथ मगराना, मऊ नारायणपुर और कोलूखेड़ा में कजरी तीज को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। पर्व के दौरान धार्मिक परंपराओं के साथ सामाजिक सहभागिता भी दिखाई दी। महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना और चल समारोह में भाग लेकर वर्षों पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाया।
आयोजन में आशा बाई पाटीदार, गोदावरी बाई पाटीदार, भगवती बाई पाटीदार, मधु बाई पाटीदार, गायत्री बाई पाटीदार, सुनीता पाटीदार और रुक्मिणी बाई पाटीदार सहित आसपास के गांवों की अनेक महिलाएं उपस्थित रहीं।
तीज माता और ज्वारों के विसर्जन के साथ तीन दिवसीय कजरी तीज महोत्सव का श्रद्धा और उल्लास के वातावरण में समापन हुआ।
