JPSC-JSSC विवाद: विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज, रांची प्रशासन ने बताया क्यों हुआ बल प्रयोग
प्रशासन का दावा- पथराव में 14 पुलिसकर्मी घायल, अधिकारियों की गाड़ियों पर फेंके गए जूते-चप्पल; छात्रों ने कहा- बिना चेतावनी शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर हुई कार्रवाई
रांची। झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। सोमवार को प्रदर्शनकारी छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर झारखंड विधानसभा की ओर मार्च किया। विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बन गई। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज के साथ पानी की बौछार और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
पुलिस कार्रवाई के बाद इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल उठने लगे। इसी बीच रांची जिला प्रशासन ने सोमवार देर रात प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस की कार्रवाई पर सफाई दी। प्रशासन ने दावा किया कि पुलिस ने पूरे घटनाक्रम के दौरान संयम बरता और केवल स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक बल का इस्तेमाल किया।
24 जुलाई से आंदोलन कर रहे हैं छात्र
JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और कथित अनियमितताओं की CBI जांच कराने सहित कई मांगों को लेकर छात्र संगठन 24 जुलाई से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है और कई प्रदर्शनकारी लंबे समय से धरने पर बैठे हैं।
प्रशासन के अनुसार, प्रदर्शन के लिए शुरुआती अनुमति और आयोजन से जुड़े कारणों को देखते हुए छात्रों को 28 जुलाई को जयपाल सिंह स्टेडियम में प्रदर्शन करने के लिए स्थानांतरित किया गया था। इसी बीच सरकारी समिति के साथ बातचीत चल रही थी, लेकिन सोमवार को छात्र संगठनों ने विधानसभा की ओर मार्च निकालने का निर्णय लिया।
प्रदर्शनकारी जब विधानसभा के नजदीक पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया।
तीन बार पुलिस कार्रवाई का छात्रों का दावा
छात्रों का आरोप है कि विधानसभा की ओर बढ़ने के दौरान पुलिस ने कम से कम तीन बार लाठीचार्ज किया। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ रहे थे, लेकिन पुलिस ने अचानक बल प्रयोग शुरू कर दिया।
घायल छात्रों ने पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों को पहले पर्याप्त चेतावनी नहीं दी गई। छात्रों का यह भी दावा है कि कई युवाओं को लाठियों से पीटा गया।
छात्र शिवम ने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में युवाओं को पुलिस कार्रवाई में चोटें आई हैं। उनके अनुसार, कई छात्र पिछले कई दिनों से आंदोलन कर रहे थे और सरकार से अपनी मांगों पर सकारात्मक जवाब की उम्मीद कर रहे थे।
प्रशासन ने बताया- पथराव के बाद किया गया बल प्रयोग
रांची के उपायुक्त मंजुनाथ भजंत्री और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस कार्रवाई का पक्ष रखा। प्रशासन का कहना है कि पुलिस ने शुरुआत से ही संयम बनाए रखा था, लेकिन प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को उकसाने का प्रयास किया।
डीसी के अनुसार, एक पुलिस जवान पर पत्थर फेंका गया। इसके अलावा एक अन्य जवान को भीड़ के बीच कुचलने की कोशिश की गई, जिससे उसकी जान को खतरा पैदा हो गया। प्रशासन का दावा है कि जवान को सुरक्षित निकालने और स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए पुलिस को सीमित बल का प्रयोग करना पड़ा।
प्रशासन ने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान मौजूद सभी लोगों को एक ही नजर से नहीं देखा जा रहा है। कार्रवाई उन परिस्थितियों में की गई, जहां कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका पैदा हो गई थी।
14 पुलिसकर्मी घायल, एक की हालत गंभीर
रांची SSP राकेश रंजन के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प में कुल 14 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इनमें एक जवान को गंभीर चोट लगने की बात कही गई है, जबकि अन्य घायल पुलिसकर्मियों को प्राथमिक उपचार दिया गया।
SSP ने आरोप लगाया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियों को रोकने की कोशिश की। उन्होंने यह भी दावा किया कि अधिकारियों की गाड़ियों पर जूते-चप्पल समेत अन्य वस्तुएं फेंकी गईं।
प्रशासन ने कहा है कि हिंसा या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। ऐसे लोगों के खिलाफ नियमों के अनुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
छात्रों ने प्रशासन के आरोपों को किया खारिज
दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी छात्रों ने प्रशासन के आरोपों पर सवाल उठाए हैं। घायल छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और पारदर्शिता की मांग को लेकर है तथा वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।
छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने बिना पर्याप्त पूर्व चेतावनी के कार्रवाई की। उनका कहना है कि कई छात्र पहले से ही आंदोलन और भूख हड़ताल पर थे। ऐसे में पुलिस की कार्रवाई से बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को चोटें आईं।
इस पूरे मामले में प्रशासन और छात्रों के दावों में स्पष्ट अंतर सामने आया है। प्रशासन जहां पथराव और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति को बल प्रयोग का कारण बता रहा है, वहीं छात्र पुलिस पर अनावश्यक कार्रवाई का आरोप लगा रहे हैं।
मंगलवार के बंद को लेकर प्रशासन ने दी चेतावनी
छात्र आंदोलन के समर्थन में झारखंड BJP ने मंगलवार को बंद का आह्वान किया है। इसे लेकर रांची प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
रांची के उपायुक्त ने कहा कि किसी भी स्थिति में कानून-व्यवस्था खराब करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने दूर-दराज से रांची पहुंचे छात्रों की सहायता के लिए भी व्यवस्था करने की बात कही है। इसके लिए हेल्पलाइन नंबर जारी करने की तैयारी है। इसके माध्यम से जरूरतमंद छात्रों को बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन तक पहुंचाने के लिए परिवहन की व्यवस्था उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
JPSC मामले में ED की जांच भी शुरू
JPSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मामला अब जांच एजेंसियों तक भी पहुंच गया है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित गड़बड़ी से जुड़े मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत ECIR दर्ज कर जांच शुरू की है।
ऐसे में एक ओर छात्र भर्ती प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता और जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दे रहा है।
फिलहाल JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन और पुलिस कार्रवाई का विवाद दोनों जारी हैं। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से छात्रों की मांगों और जांच से जुड़े मामलों पर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
