—Advertisement—

जॉनसन्स बेबी का नवजात सुरक्षा मिशन: 16 साल में 2 लाख स्वास्थ्यकर्मी प्रशिक्षित, ‘पहिला सांस’ जागरूकता अभियान लॉन्च

Author Picture
Published On: 5 December 2025
WhatsApp Image 2025 12 05 at 8.09.04 PM

—Advertisement—

जॉनसन्स बेबी ने नवजात सुरक्षा मिशन को दिया बड़ा समर्थन: 16 साल में 2 लाख से अधिक स्वास्थ्यकर्मी प्रशिक्षित, ‘पहिला सांस’ अभियान लॉन्च


भारत में हर साल हजारों नवजात शिशु जन्म के पहले ही दिन अपनी जान गंवा देते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है—जन्म के समय सांस रुक जाना या बर्थ एस्फिक्सिया (Birth Asphyxia)। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि भारत में हर साल लगभग 1.2 लाख नवजात शिशु जन्म के 24 घंटे के भीतर ही मौत के शिकार हो जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या उन बच्चों की होती है जिन्हें जन्म के बाद समय पर सांस नहीं मिल पाती।

इसी गंभीर स्थिति को बदलने के लिए शिशु देखभाल के विश्वसनीय ब्रांड जॉनसन्स बेबी (Johnson’s Baby) ने पिछले 16 वर्षों से नियोनेटल रिससिएशन प्रोग्राम (NRP) का समर्थन किया है। इस पहल का उद्देश्य है—स्वास्थ्यकर्मियों को जन्म के पहले मिनट में सही हस्तक्षेप करना सिखाना, ताकि अधिक से अधिक नवजात शिशुओं की जान बचाई जा सके।


जन्म का पहला मिनट क्यों है सबसे महत्वपूर्ण?

चिकित्सा विज्ञान के अनुसार नवजात शिशु के जीवन का पहला मिनट उसकी पूरी जिंदगी तय कर देता है। इसे चिकित्सा भाषा में ‘गोल्डन मिनट’ (Golden Minute) कहा जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस पहले मिनट में सही कदम उठाए जाएँ तो शिशु के जीवित बचने की संभावना 50% तक बढ़ जाती है

भारत में कई स्थानों पर अभी भी प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों, आधुनिक तकनीकों और रिससिएशन प्रोटोकॉल की कमी नवजात मृत्यु दर बढ़ने का मुख्य कारण है। इस अंतर को भरने के लिए जॉनसन्स बेबी ने एक लंबी और प्रभावी यात्रा तय की है।


16 साल में 2 लाख से अधिक स्वास्थ्यकर्मी प्रशिक्षित

जॉनसन्स बेबी ने एक प्रमुख बाल रोग विशेषज्ञ संघ के साथ साझेदारी कर पूरे देश में व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया है।

इस कार्यक्रम के अंतर्गत:

  • 2 लाख से अधिक नर्सें, दाइयाँ और बाल रोग विशेषज्ञ प्रशिक्षित हुए

  • नवजात पुनर्जीवन की महत्वपूर्ण तकनीकें सिखाई गईं

  • आपातकालीन स्थितियों में त्वरित कार्रवाई की प्रोटोकॉल आधारित ट्रेनिंग दी गई

  • ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों तक स्वास्थ्यकर्मियों को विशेषज्ञता प्रदान की गई

इस व्यापक प्रशिक्षण का सीधा उद्देश्य है—जन्म लेते ही सांस न ले पाने वाले शिशुओं को सुरक्षित जीवन देना


जॉनसन्स बेबी की प्रतिबद्धता—पहले दिन नहीं, पहले क्षण से सुरक्षा

मनोज गाडगिल, एसेन्शियल हेल्थ एंड स्किन हेल्थ और मार्केटिंग उपाध्यक्ष, केनव्यू, भारत ने कहा—

“नवजात की सुरक्षा पहले क्षण के उचित हस्तक्षेप पर आधारित है। जॉनसन्स बेबी शिशुओं को जन्म के पहले ही क्षण से सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है। इस मिशन के तहत हम 16 वर्षों से बाल रोग विशेषज्ञ संघ का समर्थन कर रहे हैं और 2 लाख से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों को नवजात पुनर्जीवन की ट्रेनिंग दिला चुके हैं।”

जॉनसन्स बेबी का मानना है कि शिशुओं की सुरक्षा केवल उत्पादों की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी भी है। इसलिए कंपनी लगातार उन पहलों में योगदान देती है जो नवजात जीवन की रक्षा कर सकें।


‘प्रोजेक्ट गोल्डन मिनट’—दिल छू लेने वाली फिल्म लॉन्च

जागरूकता बढ़ाने के लिए जॉनसन्स बेबी ने डीडीबी मुद्रा द्वारा निर्मित एक प्रभावशाली डिजिटल फिल्म जारी की है।

फिल्म एक कस्बाई अस्पताल की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जहाँ कई नई माताएं अपने नवजातों के साथ मौजूद हैं। अचानक एक बच्चे का जन्म होता है, लेकिन वह सांस नहीं लेता। माहौल तनावपूर्ण हो जाता है। उसी समय प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी NRP प्रोटोकॉल लागू करती है और शिशु की पहली सांस को सुरक्षित कर देती है।

इसके बाद सभी माताएं मिलकर खुशी और राहत के भाव में पारंपरिक गीत गाती हैं—यह दृश्य नवजात जीवन की नाजुकता और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की अहमियत को प्रदर्शित करता है।

डीडीबी मुद्रा के क्रिएटिव डायरेक्टर्स सिद्धेश खटावकर और हर्षदा मेनन कहते हैं:

“बच्चे के पहली बार रोने की आवाज मां के जीवन का सबसे खूबसूरत क्षण होती है। हमारी फिल्म उन हजारों स्वास्थ्यकर्मियों को समर्पित है जो इस पहले रोने को संभव बनाते हैं।”


पारंपरिक ‘सोहर’ गीत की पुनर्कल्पना—मालिनी अवस्थी की आवाज में ‘पहिला सांस’

इस अभियान का सबसे भावनात्मक हिस्सा है—लोकगीत ‘सोहर’ का आधुनिक रूप ‘पहिला सांस’, जिसे पद्मश्री लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने गाया है।

मालिनी अवस्थी कहती हैं:

“सोहर सिर्फ गीत नहीं, जीवन की शुरुआत का उत्सव है। इस अभियान के लिए गाना मेरे लिए सम्मान की बात है। संगीत दिलों को जोड़ता है और यह गीत हर उस शिशु के लिए दुआ है जो दुनिया में अपना पहला सांस ले रहा है।”

यह गीत प्रमुख म्यूज़िक प्लेटफॉर्म्स पर जारी किया जाएगा, और उससे होने वाली आय इस सामाजिक पहल को और आगे बढ़ाने में दान की जाएगी।


इन्फ्लुएंसर्स, सोशल मीडिया और सिनेमा हॉल के जरिए जागरूकता

जॉनसन्स बेबी इस अभियान को विभिन्न माध्यमों से जनता तक पहुँचा रहा है:

  • मां बनने वाली और नई माताओं से जुड़े इन्फ्लुएंसर

  • सोशल मीडिया पर भावनात्मक वीडियो

  • पीवीआर सिनेमाज़ में विज्ञापन प्रदर्शन

  • स्वास्थ्यकर्मियों की वास्तविक कहानियाँ

उद्देश्य है—हर परिवार को यह बताना कि जन्म के पहले मिनट की जागरूकता कितनी महत्वपूर्ण है


अभियान की फिल्म लिंक:

https://www.youtube.com/watch?v=IAwvHXnEGe4


निष्कर्ष: नवजात जीवन की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है जॉनसन्स बेबी

इस पहल ने देशभर में नवजात शिशुओं की सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई है। 16 वर्षों में 2 लाख स्वास्थ्यकर्मियों का प्रशिक्षण न केवल एक उपलब्धि है, बल्कि लाखों परिवारों की उम्मीदों का आधार भी है।

‘पहिला सांस’ सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि हर उस मां का भाव है जिसे अपने बच्चे की पहली सांस की अनमोल ध्वनि सुननी है।

जॉनसन्स बेबी की यह पहल इस बात की पुष्टि करती है कि—
“जब बात नवजात की सुरक्षा की हो, तो हर क्षण मायने रखता है, खासकर पहला क्षण।”

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp