दिल्ली में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और मुंबई से सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे से JISO (जिसो) संगठन के पदाधिकारियों ने शिष्टाचार भेंट की। यह मुलाकात पूरी तरह से सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर आयोजित की गई, जिसमें आगामी कार्यक्रमों और संगठन के कार्यों पर विस्तार से चर्चा हुई। इस बैठक को लेकर संगठन के भीतर भी उत्साह देखा गया।
यह भेंट दिल्ली स्थित उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के आवास पर हुई, जहां JISO प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें संगठन की सामाजिक गतिविधियों और भविष्य की योजनाओं से अवगत कराया।
JISO प्रतिनिधिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक
इस मुलाकात में JISO के अंतरराष्ट्रीय चेयरमैन एवं संस्थापक सुरेश पुनमिया (मुंबई) और राष्ट्रीय मंत्री नीलेशकुमार सुराणा (जावरा) शामिल रहे। दोनों पदाधिकारियों ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से विस्तृत चर्चा की और संगठन की गतिविधियों का प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया।
बैठक के दौरान संगठन के सामाजिक कार्यों, जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रमों और विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की गई। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि JISO देश और विदेश में सामाजिक सेवा के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।
ठाणे में होने वाले कार्यक्रम के लिए आमंत्रण
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी कार्यक्रम को लेकर औपचारिक आमंत्रण देना था। JISO पदाधिकारियों ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे को ठाणे में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।
यह कार्यक्रम अगस्त माह में प्रस्तावित है, जिसमें संगठन बड़े स्तर पर सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन करने जा रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने इस आयोजन की तैयारियों और उद्देश्यों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।
एकनाथ शिंदे ने दिया सकारात्मक संकेत
बैठक के दौरान उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने JISO के आमंत्रण को सहर्ष स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि यदि समय और परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो वे कार्यक्रम में अवश्य शामिल होने का प्रयास करेंगे।
उन्होंने संगठन के सामाजिक कार्यों की सराहना भी की और कहा कि समाजसेवा के क्षेत्र में इस तरह के प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके इस सकारात्मक रुख से प्रतिनिधिमंडल में उत्साह का माहौल देखा गया।
डॉ. श्रीकांत शिंदे की उपस्थिति
इस अवसर पर मुंबई से सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे भी मौजूद रहे। उन्होंने भी JISO प्रतिनिधियों से बातचीत की और संगठन की गतिविधियों के बारे में जानकारी ली।
बैठक के दौरान आपसी सौहार्द और सामाजिक सहयोग को लेकर सकारात्मक वातावरण बना रहा। प्रतिनिधियों ने बताया कि संगठन विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

संगठन की सामाजिक गतिविधियों पर चर्चा
JISO के संस्थापक सुरेश पुनमिया ने उपमुख्यमंत्री को संगठन की अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संगठन शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता और अन्य क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम चला रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि JISO का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुंचाना और सामाजिक विकास को गति देना है। इस दौरान उपमुख्यमंत्री ने भी संगठन के कार्यों की सराहना की।
स्मृति चिन्ह देकर किया सम्मान
चर्चा के बाद JISO पदाधिकारियों ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का स्मृति चिन्ह (मोमेंटो) देकर सम्मान किया। यह सम्मान संगठन की ओर से एक औपचारिक और शिष्टाचार भेंट के रूप में किया गया।
इस दौरान माहौल सौहार्दपूर्ण और सकारात्मक रहा। दोनों पक्षों ने भविष्य में सामाजिक सहयोग और संवाद को जारी रखने पर सहमति जताई।
सामाजिक सहयोग और संवाद पर जोर
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि समाज के विकास के लिए संगठनों और प्रशासन के बीच संवाद और सहयोग बेहद जरूरी है। JISO पदाधिकारियों ने कहा कि वे भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से समाजसेवा को आगे बढ़ाते रहेंगे।
उपमुख्यमंत्री ने भी इस विचार का समर्थन किया और कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए इस तरह की पहल महत्वपूर्ण हैं।
ठाणे कार्यक्रम को लेकर उत्साह
आगामी ठाणे कार्यक्रम को लेकर संगठन में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। JISO का मानना है कि इस कार्यक्रम के माध्यम से सामाजिक मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी और कई महत्वपूर्ण पहलुओं को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
संगठन ने यह भी कहा कि इस आयोजन में कई गणमान्य अतिथियों के शामिल होने की संभावना है, जिससे कार्यक्रम का महत्व और बढ़ जाएगा।
निष्कर्ष
दिल्ली में हुई यह शिष्टाचार भेंट पूरी तरह से सामाजिक और संगठनात्मक उद्देश्यों पर आधारित रही। इस बैठक ने JISO और महाराष्ट्र सरकार के बीच संवाद को और मजबूत किया है।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का सकारात्मक रुख और संगठन के प्रति उनकी रुचि इस बात का संकेत है कि भविष्य में ऐसे सहयोग और भी बढ़ सकते हैं। आने वाले समय में ठाणे कार्यक्रम इस संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है, जिस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
