झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ दिल्ली पहुंचे, जिससे राज्य की राजनीति में नई अटकलें तेज हो गई हैं। भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर सोशल मीडिया और सियासी गलियारों में चर्चा चल रही है। हालांकि, झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने इसे पूरी तरह खारिज किया है। जेएमएम सांसद महुआ माझी ने कहा कि जब हेमंत सोरेन मुश्किल हालात में जेल में नहीं गए, तो बीजेपी के साथ गठबंधन की संभावना नहीं है।
इतिहास और वर्तमान राजनीतिक परिप्रेक्ष्य
झारखंड की राजनीति में हेमंत सोरेन का पहला चुनाव 2005 में दुमका से हारने के बाद 2009 में उन्हें जीत मिली। उस समय अर्जुन मुंडा मुख्यमंत्री बने और हेमंत पहली बार उपमुख्यमंत्री बने। कुछ महीनों बाद हेमंत ने बीजेपी का समर्थन खींच लिया और कांग्रेस एवं अन्य दलों के साथ मिलकर सरकार बनाई, जिससे उन्हें 2013 में झारखंड के 9वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ मिली। हालांकि 2014 में हेमंत सोरेन हार गए, लेकिन 2019 और 2024 में जेएमएम-कांग्रेस-राजद गठबंधन के नेतृत्व में वे दोबारा मुख्यमंत्री बने।
भाजपा के साथ गठबंधन की अफवाहों को खारिज
जेएमएम और भाजपा दोनों ने राज्य में किसी गठबंधन की संभावना को खारिज किया है। जेएमएम प्रवक्ता कुणाल सारंगी और भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने साफ कहा कि दोनों पार्टियां “समंदर के दो किनारे” जैसी हैं और गठबंधन का सवाल ही नहीं उठता। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने भी कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भाजपा के आगे नहीं झुकेंगे और महागठबंधन सरकार कार्यकाल पूरा करेगी।
