वो गली वो मकान ने रचा इतिहास, Dr. Ramshankar Chanchal को मिला प्रतिष्ठित ‘अमृता प्रतिम सम्मान’
झाबुआ प्रतिनिधि मनीष कुमट – मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचल झाबुआ की साहित्यिक धरती के लिए गौरव का विषय है कि वरिष्ठ साहित्यकार एवं कथाकार Dr. Ramshankar Chanchal को उनकी चर्चित कृति “वो गली वो मकान” के लिए प्रतिष्ठित “अमृता प्रतिम सम्मान” से सम्मानित किया गया है।
डॉ. रामशंकर चंचल ने अपना संपूर्ण जीवन झाबुआ की धरती पर रहकर साहित्य साधना को समर्पित किया है। वर्षों की अथक मेहनत, निष्ठा और समर्पण के साथ उन्होंने साहित्य जगत में अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उनकी चर्चित रूह-प्रेम कथाओं पर आधारित कालजयी कृति “वो गली वो मकान”, जिसे इंकलाब पब्लिकेशन, मुंबई द्वारा प्रकाशित किया गया है, का चयन एक विशिष्ट चयन समिति द्वारा किया गया और उसे इस महत्वपूर्ण सम्मान के लिए चुना गया।
यह कृति डॉ. चंचल की अमेज़न पर उपलब्ध 15वीं पुस्तक है, जिसने देशभर के पाठकों के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई है। इस सम्मान को प्राप्त करने पर डॉ. चंचल ने इसे ईश्वर की कृपा, रूहानी आशीर्वाद और अपने पाठकों के प्रेम का परिणाम बताया।
उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि झाबुआ जैसे आदिवासी जिले में रहकर की गई उनकी साहित्य साधना उन्हें विश्व पटल तक पहुंचाएगी। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय ईश्वर, अपने लाखों पाठकों, शुभचिंतकों, मीडिया जगत और इंकलाब पब्लिकेशन, मुंबई के प्रकाशक सागर जख्मी को दिया, जिन्होंने हमेशा उन्हें पिता तुल्य स्नेह और सम्मान प्रदान किया।
डॉ. चंचल ने भावुक शब्दों में कहा कि झाबुआ की पावन धरती, जहां उनका जन्म हुआ, उनके लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत रही है। उन्होंने इस सम्मान को झाबुआ जिले और यहां के साहित्य प्रेमियों को समर्पित करते हुए सभी का आभार व्यक्त किया।
डॉ. रामशंकर चंचल को प्राप्त इस सम्मान से न केवल झाबुआ जिले, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश का नाम साहित्य जगत में गौरवान्वित हुआ है।
