झाबुआ किसानों को चार गुना मुआवजा देने की मांग को लेकर पूर्व सांसद कांतिलाल भूरिया ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल को पत्र लिखा। किसानों का कलेक्ट्रेट पर आंदोलन जारी है।
झाबुआ किसानों को 4 गुना मुआवजा देने की बड़ी मांग, कांतिलाल भूरिया ने CM-राज्यपाल को लिखा पत्र
रिपोर्टर – मनीष कुमत, झाबुआ
झाबुआ। झाबुआ किसानों को चार गुना मुआवजा दिए जाने की मांग अब और तेज हो गई है। जिले में भूमि अधिग्रहण के बदले उचित मुआवजे की मांग को लेकर किसानों द्वारा पिछले पांच दिनों से कलेक्ट्रेट का घेराव कर आंदोलन किया जा रहा है। किसानों के इस आंदोलन के समर्थन में पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व सांसद कांतिलाल भूरिया भी सामने आए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री और राज्यपाल को पत्र लिखकर किसानों को बाजार दर से चार गुना अधिक मुआवजा प्रदान करने की मांग की है।
किसानों के आंदोलन के दौरान कांतिलाल भूरिया ने उनसे मुलाकात भी की थी और उनकी समस्याओं को सुना था। इस दौरान उन्होंने किसानों की मांगों का समर्थन करते हुए उचित मुआवजे का मुद्दा सरकार के समक्ष उठाने की बात कही थी।
कांतिलाल भूरिया ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल को लिखा पत्र
जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रकाश रांका ने जानकारी देते हुए बताया कि पूर्व सांसद कांतिलाल भूरिया ने इस संबंध में मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल को पत्र लिखा है। पत्र में झाबुआ जिले के किसानों की स्थिति और भूमि अधिग्रहण के कारण उनके सामने पैदा हो रही परेशानियों का उल्लेख किया गया है।
भूरिया ने पत्र में बताया कि झाबुआ आदिवासी बाहुल्य जिला है और यहां की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है। जिले के अधिकांश किसानों के पास कृषि भूमि बहुत कम है। ऐसे में भूमि अधिग्रहण होने से किसानों और उनके परिवारों की आजीविका पर सीधा प्रभाव पड़ने की आशंका है।
टिमरवानी से बदनावर तक बन रहा 4 लेन मार्ग
वर्तमान में झाबुआ जिले के टिमरवानी (थांदला) से बदनावर (धार) तक 4 लेन मार्ग का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना के लिए किसानों की भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई की जा रही है।
किसानों का कहना है कि शासन द्वारा भूमि के लिए निर्धारित की गई मुआवजा राशि काफी कम है। किसानों का दावा है कि मौजूदा मुआवजे से उन्हें उनकी जमीन का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। इसी मुद्दे को लेकर किसान लगातार आंदोलन कर रहे हैं।
झाबुआ किसानों को चार गुना मुआवजा देने की मांग
किसानों की मुख्य मांग है कि सरकार उन्हें भूमि अधिग्रहण कानून के तहत चार गुना मुआवजा प्रदान करे। आंदोलनकारी किसानों का कहना है कि सरकार द्वारा पूर्व में इस संबंध में घोषणा की गई थी और उसी के अनुरूप मुआवजा दिया जाना चाहिए।
कांतिलाल भूरिया ने भी मुख्यमंत्री और राज्यपाल को भेजे पत्र में किसानों के हित में तत्काल चार गुना मुआवजा दिए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसानों की मांग स्वीकार की जाती है तो आंदोलन समाप्त करने का रास्ता निकल सकता है।
पांच दिनों से कलेक्ट्रेट पर किसानों का आंदोलन
मुआवजे की मांग को लेकर किसान पिछले पांच दिनों से झाबुआ कलेक्ट्रेट का घेराव कर आंदोलन कर रहे हैं। किसान दिन-रात धरना-प्रदर्शन के माध्यम से सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
किसानों का कहना है कि उनकी कृषि भूमि ही परिवार की आजीविका का प्रमुख साधन है। यदि सड़क निर्माण के लिए जमीन ली जा रही है तो उसके बदले ऐसी मुआवजा राशि मिलनी चाहिए, जिससे भविष्य में परिवारों के सामने आर्थिक संकट पैदा न हो।
भूमि अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर चल रहा यह आंदोलन अब जिले का महत्वपूर्ण मुद्दा बनता जा रहा है।
किसानों को सौंपी गई भूरिया के पत्र की प्रति
इस संबंध में किसानों को भी कांतिलाल भूरिया द्वारा मुख्यमंत्री और राज्यपाल को लिखे गए पत्र की प्रति प्रदान की गई।
एनएसयूआई अध्यक्ष नरवेश अमलियार एवं आदिवासी कांग्रेस के जिलाध्यक्ष आयुष ओहारी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल आंदोलन कर रहे किसानों से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने किसानों को भूरिया द्वारा उठाई गई मांग और सरकार को भेजे गए पत्र की प्रति सौंपी।
प्रतिनिधिमंडल ने किसानों से चर्चा करते हुए कहा कि उनकी मुआवजे से संबंधित मांग को सरकार के सामने मजबूती से उठाया जा रहा है।
निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन में शामिल होगी कांग्रेस
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यदि सरकार किसानों के हित में निर्णय नहीं लेती है तो कांग्रेस भी किसानों के इस आंदोलन में सम्मिलित होगी और उनकी मांगों का समर्थन करेगी।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि झाबुआ जैसे आदिवासी बाहुल्य जिले में किसानों के पास पहले से ही सीमित कृषि भूमि है। ऐसे में भूमि अधिग्रहण के दौरान उचित मुआवजा मिलना किसानों के भविष्य और आजीविका के लिए महत्वपूर्ण है।
फिलहाल किसान अपनी मांग पर अड़े हुए हैं और सरकार से बाजार दर से चार गुना अधिक मुआवजा दिए जाने की मांग कर रहे हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि मुख्यमंत्री और राज्यपाल को पत्र भेजे जाने तथा लगातार जारी किसान आंदोलन के बाद सरकार इस मामले में क्या निर्णय लेती है।

