बावन जिनालय में संगीतमय संयम उपकरण वंदनावली का भव्य आयोजन
36 दिवसीय गुरुपद तप के अनुमोदनार्थ त्रिदिवसीय भक्ति महोत्सव का शुभारंभ
Jhabua । स्थानीय जैन तीर्थ श्री ऋषभदेव बावन जिनालय परिसर में परम पूज्य साध्वी श्री शशिकला श्री जी म.सा. की सुशिष्या परम विदुषी साध्वी श्री अविचलदृष्टा श्री जी म.सा. आदि ठाणा-7 की पावन निश्रा में 36 दिवसीय गुरुपद तप के अनुमोदनार्थ त्रिदिवसीय भक्ति महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। महोत्सव के प्रथम दिन आयोजित संयम संवेदना कार्यक्रम में श्रद्धा, भक्ति और तप की त्रिवेणी देखने को मिली। करीब तीन घंटे तक चले संगीतमय संयम उपकरण वंदनावली कार्यक्रम ने उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को भाव-विभोर कर दिया।
संयम उपकरणों के महत्व पर साध्वी श्री ने दिया संदेश
कार्यक्रम का शुभारंभ पूज्य साध्वी भगवंत के मंगलाचरण के साथ हुआ। धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी श्री अविचलदृष्टा श्री जी म.सा. ने संयम और चारित्र धर्म के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पंचम काल में चारित्र का प्रभाव ही ऐसा माध्यम है, जिसके कारण जिन शासन निरंतर प्रभावी और जयवंत हो रहा है।
उन्होंने कहा कि साधु-साध्वी भगवंतों के संयम जीवन में उपयोग आने वाले उपकरण केवल वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि वे त्याग, तपस्या, अनुशासन और आत्मसंयम के प्रतीक हैं। इन उपकरणों का प्रतिदिन दर्शन करने और उनके प्रति भावना भाने से भी व्यक्ति के भीतर चारित्र धर्म के प्रति श्रद्धा जागृत होती है। संयम और चारित्र की भावना आत्मा को मोक्ष मार्ग की ओर ले जाने वाली महत्वपूर्ण साधना है।
भजनों के बीच श्रद्धालुओं ने लिया पुण्यार्जन
प्रवचन के पश्चात प्रसिद्ध संगीतकार हर्षद भाई जैन एवं महावीर भाई (उन्हेल) की टीम द्वारा प्रस्तुत भक्ति भजनों का कार्यक्रम हुआ। मधुर भजनों और धार्मिक वातावरण के बीच श्रद्धालुओं ने साधु-साध्वी भगवंतों द्वारा उपयोग किए जाने वाले 22 संयम उपकरणों एवं उनसे जुड़े नियमों का पुण्यार्जन किया।
पूज्य साध्वी श्री द्वारा बताए गए संयम उपकरणों को लाभार्थी परिवारों ने श्रद्धा और उत्साह के साथ ग्रहण किया। इस दौरान परिवारों ने तीन प्रदक्षिणा देकर भक्ति भाव व्यक्त किया। पूरा परिसर जयकारों और भक्ति गीतों से गूंज उठा।

विभिन्न परिवारों ने ग्रहण किए संयम उपकरण एवं नियम
कार्यक्रम में अनेक श्रावक-श्राविकाओं और परिवारों ने अलग-अलग संयम उपकरणों का लाभ लिया तथा विविध धार्मिक नियम अंगीकार किए। पात्रा जोड़ का लाभ श्री हुकमीचंदजी एवं रमेशजी छाजेड़ परिवार ने लिया। बड़े पात्रा का लाभ श्री राकेशजी नैना मेहता परिवार ने लिया और 15 हजार गुरुमहाराज प्रदक्षिणा का नियम स्वीकार किया।
नवकारवाली के अंतर्गत 4500 माला का नियम श्री धर्मचंदजी एवं संजयजी मेहता परिवार ने लिया। छाब ओर और डांडा सहित संपूर्ण उपकरण का लाभ श्री सार्थक कुमार एवं राजेश कुमार मेहता परिवार ने प्राप्त किया।
रजोहरण के अवसर पर श्री संजयजी एवं कविता मेहता ने 601 दिन का ब्रह्मचर्य व्रत तथा श्री दीपकजी एवं सविता मुथा ने 551 दिन का ब्रह्मचर्य व्रत अंगीकार किया।
कांबली और रेशमी कांबली का लाभ श्री पंकजजी वेदजी कोठारी परिवार तथा श्री निशांतजी मधुकरजी शाह परिवार ने लिया। इनके द्वारा 36 जोड़ पूजा कपड़े की साधर्मिक भक्ति का नियम भी लिया गया।
मुंहपत्ती के लिए श्री निशांतजी मधुकरजी शाह ने 180 घंटे मौन का नियम स्वीकार किया। संथारा आजीवन पेपराल तीर्थ फ्रेम का लाभ श्रीमती सुशीलाबेन खेमसरा, लीमड़ी ने लिया।

तप और धार्मिक नियमों के प्रति बढ़ा उत्साह
गुरु चादर का लाभ श्री मनोहरलालजी छाजेड़ परिवार एवं श्रीमती वीणाजी कटारिया ने लिया। श्रीमती कटारिया ने आजीवन गर्म पानी का नियम भी स्वीकार किया। कल्पसूत्र के अंतर्गत तन्वीबेन, मुंबई ने 201 नई गाथा याद करने का नियम लिया।
अष्टमंगलिक के लिए श्री पंकजजी कोठारी ने 157 दिन गुरुकुलवास का नियम अंगीकार किया। आसन का लाभ श्री जीवनबेन पोरवाल ने 51 आयम्बिल के नियम के साथ लिया। डंडा का लाभ श्री विवेकजी वागरेचा ने 15,500 प्रदक्षिणा के नियम के साथ लिया।
साधु झोली का लाभ श्रीमती चंद्रकांताबेन चंद्रशेखरजी जैन, नाकोड़ा ने लिया और प्रतिदिन पांच सामायिक का नियम स्वीकार किया। इसके अलावा श्री भरतजी जितेंद्रजी बाबेल ने साड़ा, श्री प्रदीपजी आशाजी कटारिया ने सापड़ा, श्वेताबेन कुक्षी ने पुंजणी व सुपड़ी, श्री मुकेशजी नाकोड़ा परिवार ने चोलपट्टा तथा श्रीमती सरिताजी बाबेल ने चोलपट्टा के साथ 61 एकाशना का नियम अंगीकार किया।

आकर्षक सजावट बनी विशेष आकर्षण
संयम उपकरणों की आकर्षक एवं कलात्मक सजावट श्रीमती सरिता बाबेल एवं श्रीमती सुनीता बाबेल द्वारा की गई। उनकी इस सेवा और रचनात्मक सहयोग के लिए चातुर्मास समिति की ओर से उनका बहुमान किया गया।
सजाए गए संयम उपकरणों ने आयोजन की धार्मिक गरिमा को और बढ़ा दिया। श्रद्धालुओं ने उपकरणों के दर्शन किए और उनके महत्व को समझते हुए संयम तथा साधना के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
महिलाओं और श्रद्धालुओं की रही विशेष सहभागिता
त्रिदिवसीय भक्ति महोत्सव के प्रथम दिन धार्मिक आयोजनों के साथ सांस्कृतिक एवं भक्तिमय गतिविधियों का भी आयोजन किया गया। दोपहर में महिलाओं की सहभागिता से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित हुए। महिलाओं और बच्चों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
पूरे आयोजन में धार्मिक ज्ञान, भक्ति, संस्कृति और सामूहिक सहभागिता का सुंदर समन्वय देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं धार्मिक गतिविधियों में हिस्सा लेकर महोत्सव को और अधिक जीवंत बनाया।
तीन दिवसीय आयोजन में होंगे विविध कार्यक्रम
36 दिवसीय गुरुपद तप के अनुमोदनार्थ आयोजित यह त्रिदिवसीय भक्ति महोत्सव श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक साधना और आत्मचिंतन का अवसर बन रहा है। आयोजन के माध्यम से संयम, तप, त्याग और गुरु भक्ति के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
धर्मसभा में साध्वी श्री ने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि धार्मिक आयोजनों की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब उनसे व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आए। संयम के उपकरणों का दर्शन केवल बाहरी श्रद्धा तक सीमित न रहे, बल्कि उनके पीछे छिपे त्याग और आत्मसंयम के संदेश को जीवन में उतारने का प्रयास होना चाहिए।
बावन जिनालय परिसर में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम ने श्रद्धालुओं के बीच गुरु भक्ति और संयम साधना की भावना को और मजबूत किया। भक्ति गीतों, धार्मिक जयघोषों और साध्वी भगवंत के प्रेरणादायी प्रवचनों से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। त्रिदिवसीय महोत्सव के आगामी कार्यक्रमों को लेकर भी श्रावक-श्राविकाओं में उत्साह बना हुआ है।
