मनावर में ही बने जवाहर नवोदय विद्यालय: विधायक डॉ. हीरालाल अलावा का धरना, राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन
संवाददाता: कौशिक पंडित
मनावर (धार)। धार जिले में नवस्वीकृत जवाहर नवोदय विद्यालय की स्थापना को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विवाद गहराता जा रहा है। प्रस्तावित विद्यालय को मनावर के बजाय धरमपुरी तहसील के तारापुर में स्थापित किए जाने की चर्चा के विरोध में बुधवार को मनावर विधायक डॉ. हीरालाल अलावा कांग्रेस कार्यकर्ताओं और क्षेत्रवासियों के साथ सड़क पर उतर आए। उन्होंने मनावर एसडीएम कार्यालय के सामने लगभग दो घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया और सरकार से निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की।
धरने के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन एसडीएम के माध्यम से सौंपा। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से मांग की गई कि जवाहर नवोदय विद्यालय को मनावर में ही स्थापित किया जाए, क्योंकि भौगोलिक, शैक्षणिक और प्रशासनिक दृष्टि से यही स्थान सबसे उपयुक्त है।
नवोदय विद्यालय संघर्ष समिति के ज्ञापन के बाद शुरू हुआ आंदोलन
इस आंदोलन की पृष्ठभूमि 28 जुलाई को तैयार हुई, जब नवोदय विद्यालय संघर्ष समिति, मनावर ने विधायक डॉ. हीरालाल अलावा को ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की थी। समिति ने बताया कि यदि विद्यालय को तारापुर स्थानांतरित किया गया तो हजारों विद्यार्थियों को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा।
समिति ने विधायक से शासन स्तर पर प्रभावी पहल करने की अपील की थी। इसके बाद विधायक ने इस मुद्दे को जनहित का विषय बताते हुए आंदोलन का नेतृत्व संभाला और धरना-प्रदर्शन के माध्यम से शासन तक अपनी बात पहुंचाने का निर्णय लिया।
मनावर को बताया सबसे उपयुक्त स्थान
धरने के दौरान सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि मनावर भौगोलिक दृष्टि से पूरे क्षेत्र का केंद्र बिंदु है। यहां बेहतर सड़क संपर्क, स्वास्थ्य सुविधाएं, परिवहन व्यवस्था और प्रशासनिक संसाधन उपलब्ध हैं। इन सभी कारणों से नवोदय विद्यालय की स्थापना के लिए मनावर सबसे उपयुक्त स्थान है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि किसी भी राष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक संस्था की स्थापना ऐसे स्थान पर होनी चाहिए, जहां अधिकतम विद्यार्थियों को लाभ मिल सके। मनावर इस कसौटी पर पूरी तरह खरा उतरता है।
दूरस्थ विद्यार्थियों को होगी भारी परेशानी
ज्ञापन में यह प्रमुख तर्क भी दिया गया कि यदि विद्यालय को तारापुर में स्थापित किया जाता है तो गंधवानी विकासखंड के अंतिम गांवों और अलीराजपुर जिले की सीमा से आने वाले विद्यार्थियों को लगभग 120 से 125 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ेगी।
ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए इतनी लंबी दूरी शिक्षा के मार्ग में बड़ी बाधा बन सकती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए आवागमन और अन्य व्यवस्थाएं करना बेहद कठिन होगा।
धरना दे रहे लोगों का कहना था कि सरकार को शिक्षा के अवसरों का विस्तार करना चाहिए, न कि विद्यार्थियों की पहुंच को सीमित करने वाले निर्णय लेने चाहिए।
सेमल्दा पुल बनने से मनावर बना क्षेत्रीय संपर्क केंद्र
संघर्ष समिति ने अपने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया कि सेमल्दा पुल बनने के बाद मनावर की कनेक्टिविटी पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई है।
अब मनावर मध्य प्रदेश के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान से भी बेहतर सड़क संपर्क रखता है। ऐसे में यह क्षेत्र शिक्षा, व्यापार और प्रशासनिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।
समिति का कहना है कि यदि विद्यालय मनावर में स्थापित किया जाता है तो चार राज्यों की सीमा से जुड़े अनेक क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी इसका लाभ मिलेगा।
विधायक बोले— विद्यार्थियों के भविष्य के लिए हर लड़ाई लड़ेंगे
धरने को संबोधित करते हुए विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने कहा कि उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर शासन को पहले ही पत्र लिख दिया है। उन्होंने कहा कि यह केवल किसी भवन की स्थापना का मामला नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा हुआ विषय है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
विधायक ने कहा कि उनका संघर्ष किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि क्षेत्र के विद्यार्थियों के अधिकारों और शिक्षा के हितों की रक्षा के लिए है।
भाजपा पर बोला हमला
धरना-प्रदर्शन के दौरान विधायक ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यदि मनावर के भाजपा मंडल अध्यक्ष जनता और विद्यार्थियों के हित में आवाज़ नहीं उठा सकते, तो उन्हें अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों और संगठन पदाधिकारियों का पहला दायित्व जनता के हितों की रक्षा करना है। यदि वे इस मुद्दे पर चुप रहते हैं तो जनता उनके मौन का जवाब समय आने पर देगी।
केंद्रीय राज्य मंत्री पर लगाए राजनीतिक दबाव के आरोप
डॉ. हीरालाल अलावा ने आरोप लगाया कि स्थानीय सांसद एवं केंद्र सरकार में राज्य मंत्री अपने राजनीतिक प्रभाव का उपयोग करते हुए जवाहर नवोदय विद्यालय को अपने गृह ग्राम तारापुर ले जाने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि पहले से स्वीकृत किसी राष्ट्रीय शैक्षणिक संस्था का स्थान राजनीतिक प्रभाव के आधार पर बदला जाता है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था, सुशासन और संविधान की मूल भावना के विपरीत होगा।
हालांकि, इस आरोप पर संबंधित सांसद या केंद्र सरकार की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
“भाजपा स्वयं मनावर को जिला मुख्यालय मानती रही है”


विधायक ने कहा कि भाजपा लंबे समय से मनावर को प्रस्तावित ग्रामीण जिले का मुख्यालय बनाने की बात करती रही है। यदि सरकार स्वयं मनावर के महत्व को स्वीकार करती है तो फिर जवाहर नवोदय विद्यालय जैसी राष्ट्रीय संस्था की स्थापना भी यहीं होना स्वाभाविक और न्यायसंगत है।
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक दृष्टि से भी मनावर अधिक सक्षम और सुविधाजनक स्थान है।
हजारों विद्यार्थियों को मिलेगा सीधा लाभ
धरना-प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यदि विद्यालय मनावर में स्थापित किया जाता है तो मनावर, कुक्षी, गंधवानी, धरमपुरी तथा अलीराजपुर जिले के हजारों विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा।
जवाहर नवोदय विद्यालय ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए स्थापित किए जाते हैं। ऐसे में विद्यालय का स्थान चयन करते समय विद्यार्थियों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं और क्षेत्रवासियों की रही बड़ी भागीदारी
धरना-प्रदर्शन में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, कार्यकर्ता, नवोदय विद्यालय संघर्ष समिति के सदस्य, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए विद्यालय की स्थापना मनावर में ही की जाए। प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ और अंत में प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा।
जवाहर नवोदय विद्यालय क्यों है महत्वपूर्ण?
जवाहर नवोदय विद्यालय भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत संचालित देश के प्रतिष्ठित आवासीय विद्यालय हैं। इनका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के मेधावी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराना है।
इन विद्यालयों में कक्षा 6 से प्रवेश परीक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों का चयन किया जाता है। चयनित विद्यार्थियों को आवास, भोजन, पुस्तकें, गणवेश और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं। इसलिए किसी जिले में नवोदय विद्यालय की स्थापना शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है।
शासन के फैसले पर टिकी हैं निगाहें
मनावर में हुए इस प्रदर्शन के बाद अब क्षेत्र की जनता और विद्यार्थियों की निगाहें प्रदेश शासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। यदि सरकार इस मांग पर पुनर्विचार करती है तो हजारों विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं का लाभ मिल सकता है।
वहीं यदि विद्यालय को तारापुर में स्थापित करने का निर्णय बरकरार रहता है तो इस मुद्दे पर आंदोलन और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। विधायक डॉ. हीरालाल अलावा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि विद्यार्थियों के हितों से जुड़े इस विषय पर वे आगे भी जनसंघर्ष जारी रखेंगे।
