जिनशासन स्थापना दिवस: जैन समाज का गौरवपूर्ण पर्व
Javra (निप्र)। जैन धर्म में जिनशासन स्थापना दिवस अत्यंत श्रद्धा, आस्था और गौरव का पर्व माना जाता है। यह दिन भगवान महावीर के उपदेशों और जिनशासन की परंपरा को स्मरण करने का अवसर प्रदान करता है। प्रत्येक जैन अनुयायी के लिए यह दिन आत्मचिंतन, संयम और धर्म के प्रति समर्पण का प्रतीक होता है।
इसी पावन अवसर की पूर्व संध्या पर जावरा नगर में एक भव्य धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन की तैयारियां जोरों पर हैं। यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूरे जैन समाज की आस्था, एकता और सेवा भावना का प्रतीक बनकर उभर रहा है।
गुरु कस्तुरचंद जी म.सा. की स्मृति को समर्पित पावन प्रयास
इस पूरे आयोजन का मुख्य उद्देश्य जैन दिवाकरीय श्रमण संघीय ज्योतिषाचार्य मालवरत्न उपाध्याय श्री कस्तुरचंद जी म.सा. की पावन स्मृति को चिरस्थायी बनाना है। उनके जीवन का त्याग, तपस्या और धर्म के प्रति समर्पण आज भी समाज के लिए प्रेरणादायी है।
इन्हीं भावनाओं के साथ “गुरु कस्तुर पावन धाम” के निर्माण का संकल्प लिया गया है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए आध्यात्मिक चेतना और धार्मिक प्रेरणा का केंद्र बनेगा।
इस कार्य में जैन दिवाकर श्री चौथमल जी म.सा., मेवाड़ भूषण श्री प्रतापमल जी म.सा. एवं संथारा साधक महाश्रमण प्रवर्तक श्री रमेशमुनि जी म.सा. के अनुयायी जैन दिवाकरीय श्रमण संघीय उपाध्याय श्री गौतममुनि जी म.सा. की पावन प्रेरणा अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।
गुरु कस्तुर पावन धाम: निर्माण कार्य की प्रगति
श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, जावरा के अंतर्गत गुरु कस्तुर पावन धाम ट्रस्ट द्वारा इस भव्य परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है।
निर्माण कार्य के प्रथम चरण में गुरु कस्तुर का स्मारक एवं मानव सेवा के लिए दो मंजिला विशाल हॉल का निर्माण लगभग पूर्णता की ओर है। यह धाम न केवल धार्मिक गतिविधियों का केंद्र होगा, बल्कि समाज सेवा और मानव कल्याण की गतिविधियों का भी प्रमुख स्थल बनेगा।
उद्घाटन समारोह की भव्य रूपरेखा
गुरु कस्तुर पावन धाम उद्घाटन समारोह समिति के मीडिया प्रभारी संदीप रांका एवं सुभाष टुकड़िया ने जानकारी देते हुए बताया कि आगामी 17 मई, रविवार को इस पावन धाम का भव्य उद्घाटन किया जाएगा।
इससे पूर्व 16 और 17 मई को दो दिवसीय विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 16 मई को गौमाता का स्वामी वात्सल्य कार्यक्रम होगा, जबकि 17 मई को गुरु कस्तुर पावन धाम के प्रथम चरण का लोकार्पण चतुर्विध संघ की पावन उपस्थिति में सम्पन्न होगा।
संतों की पावन उपस्थिति से होगा कार्यक्रम दिव्य
इस ऐतिहासिक अवसर पर जैन दिवाकरीय श्रमण संघीय बहुश्रुत कवि, आगम मनीषी प्रवर्तक श्री विजयमुनि जी म.सा., उपाध्याय श्री गौतममुनि जी म.सा., उपप्रवर्तक श्री चंद्रेशमुनि जी म.सा. एवं सेवाभावी वैभवमुनि जी म.सा. आदि ठाणा की पावन उपस्थिति रहेगी।
इसके अतिरिक्त जावरा नगर की गौरवशाली पुत्री, जैन दिवाकरीय श्रमण संघीय अनुष्ठान आराधिका, ज्योतिष चंद्रिका एवं शासन प्रभाविका साध्वी डॉ. कुमुदलता जी म.सा., साध्वी डॉ. महाप्रज्ञा जी म.सा., साध्वी पदमकीर्ति जी म.सा. एवं साध्वी राजकीर्ति जी म.सा. आदि ठाणा 4 का पावन सान्निध्य भी प्राप्त होगा।
जैन समाज की व्यापक भागीदारी और उत्साह
इस भव्य आयोजन में देशभर से जैन दिवाकर अनुयायी, जैन कॉन्फ्रेंस के पदाधिकारी एवं अनेक सामाजिक संगठन भाग लेंगे। आयोजन को सफल बनाने हेतु विभिन्न समितियों का गठन किया गया है।
श्री संघ की बैठक में पूर्व अध्यक्ष बसंतीलाल चपड़ोद, पारसमल बरड़िया, सुशील चपड़ोद एवं पुखराजमल कोच्चटा सहित अनेक वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन को ऐतिहासिक बनाने हेतु अपने सुझाव प्रस्तुत किए।
संरक्षक एवं ट्रस्ट पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका
इस आयोजन को सफल बनाने में ट्रस्ट के पदाधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। संरक्षक श्रीपाल कोच्चटा, कमल चपड़ोद, ट्रस्ट सचिव सुजानमल कोच्चटा, कोषाध्यक्ष पारसमल गादिया एवं राकेश ओस्तवाल ने लगातार तैयारियों की समीक्षा की।
उपाध्यक्ष चंद्रप्रकाश ओस्तवाल, अजीत रांका तथा निर्माण समिति चेयरमैन राकेश पी. कोच्चटा एवं विनोद लुणिया ने निर्माण कार्यों को गति प्रदान की।
युवा शक्ति और महिला मंडल की सक्रिय भूमिका
इस आयोजन में युवा शक्ति और महिला मंडल की भागीदारी भी अत्यंत उल्लेखनीय रही। नवयुवक मंडल अध्यक्ष आकाश जैन, महिला मंडल अध्यक्ष ललिता नांदेचा एवं बहू मंडल अध्यक्ष गरिमा जैन के नेतृत्व में समाज की युवा एवं महिला शक्ति ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
समाज के अनेक सदस्य जैसे दिलीप चत्तर, भंवरलाल मेहता, जवाहरलाल श्रीश्रीमाल, सुजानमल ओरा, विनोद चपड़ोद, पुखराज भंडारी, नगीन चपड़ोद, फतेहलाल बुरड़, अनिल चत्तर, राहुल रांका, यश छाजेड, आयुष चोरड़िया, पारस ओरा, सुरेश ओस्तवाल, ऋषभ मेहता सहित कई लोग सक्रिय रूप से शामिल रहे।
बैठक का संचालन और समापन
पूरे कार्यक्रम की बैठक का संचालन सुजानमल कोच्चटा द्वारा किया गया। बैठक के अंत में संजय भंडारी ने सभी उपस्थित सदस्यों का आभार व्यक्त किया और कहा कि सभी के सहयोग से यह आयोजन अत्यंत भव्य और ऐतिहासिक रूप में सम्पन्न होगा।
निष्कर्ष: धर्म, सेवा और एकता का अद्वितीय संगम
गुरु कस्तुर पावन धाम का यह भव्य आयोजन केवल एक उद्घाटन समारोह नहीं, बल्कि जैन समाज की एकता, श्रद्धा और सेवा भावना का प्रतीक है।
यह धाम आने वाले समय में न केवल धार्मिक गतिविधियों का केंद्र बनेगा, बल्कि मानव सेवा, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक उत्थान का भी प्रमुख केंद्र साबित होगा।
जावरा में आयोजित यह ऐतिहासिक आयोजन जैन समाज की समृद्ध परंपरा, गुरु भक्ति और सेवा भाव को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाला सिद्ध होगा।
