Javra के दिवाकर भवन में भव्य धर्म सभा: संतों ने दिया जीवन, धर्म और आचरण पर गहन संदेश
Javra (निप्र)। मध्य प्रदेश के जावरा नगर में स्थित दिवाकर भवन में आयोजित धर्म सभा ने पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण का संचार कर दिया। इस अवसर पर जैन धर्म के अनेक पूज्य संतों की पावन उपस्थिति में प्रवचनों का आयोजन किया गया, जिसमें जीवन के वास्तविक अर्थ, धर्म के महत्व और आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया गया।
इस धर्म सभा का आयोजन जैन समाज की धार्मिक परंपराओं के अनुरूप अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और अनुशासन के साथ किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, समाजजन और विभिन्न संघों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
सभा में राष्ट्र संत जैन धर्म दिवाकर श्रमण संघीय आचार्य सम्राट पूज्य गुरुदेव श्री आनंद ऋषि जी महाराज साहब के सुशिष्य, ध्यान योगी युगपुरुष आचार्य सम्राट डॉक्टर शिवमुनि जी महाराज के आज्ञानुवर्ती श्रमण संघीय युवाचार्य, प्रज्ञा महर्षि आगम ज्ञाता पूज्य गुरुदेव श्री महेंद्र ऋषि जी महाराज साहब, हित मित भाषी पूज्य गुरुदेव श्री हितेंद्र ऋषि जी महाराज साहब, तपस्वी पूज्य गुरुदेव श्री धवल ऋषि जी महाराज साहब तथा नवदीक्षित पूज्य श्री महक ऋषि जी महाराज साहब आदि ठाणा-4 का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ।
संतों के सान्निध्य में आध्यात्मिक वातावरण
दिवाकर भवन में जैसे ही संतों का आगमन हुआ, पूरा वातावरण “जय गुरुदेव” के उद्घोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने संतों का विधिवत स्वागत किया और उनके दर्शन-वंदन का लाभ प्राप्त किया। कार्यक्रम स्थल को धार्मिक झंडों, पुष्पमालाओं और आध्यात्मिक सजावट से भव्य रूप दिया गया था।
सभा में उपस्थित लोगों ने बताया कि संतों के प्रवचन सुनकर मन को एक अद्भुत शांति और ऊर्जा प्राप्त होती है। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला आध्यात्मिक संगम था।
युवाचार्य महेंद्र ऋषि जी महाराज का प्रेरक प्रवचन
धर्म सभा को संबोधित करते हुए युवाचार्य महेंद्र ऋषि जी महाराज ने जीवन और धर्म के गूढ़ अर्थ को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया। उन्होंने कहा कि आज के समय में जीवन की गति बहुत तेज हो गई है। पहले जहां छोटी दूरी की यात्रा भी कठिन और समय लेने वाली होती थी, वहीं आज आधुनिक साधनों के कारण लंबी दूरी भी कुछ ही घंटों में पूरी हो जाती है।
उन्होंने कहा कि यात्रा चाहे कितनी भी सरल क्यों न हो, यदि साथ में पाथेय (भोजन, साधन और आवश्यक सामग्री) न हो तो वह यात्रा कठिन बन जाती है। उसी प्रकार जीवन की यात्रा भी तभी सफल और सुखद बनती है जब उसमें धर्म का पाथेय साथ हो।
युवाचार्य ने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ या कर्मकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक पद्धति है, जो व्यक्ति को सही मार्ग दिखाती है और उसके आचरण को शुद्ध करती है।
धर्म जीवन का वास्तविक पाथेय है
अपने प्रवचन में उन्होंने स्पष्ट किया कि जैसे शरीर को जीवित रहने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है, वैसे ही आत्मा को शुद्ध और संतुलित रखने के लिए धर्म की आवश्यकता होती है। धर्म मनुष्य के जीवन में संतुलन, संयम और सदाचार लाता है।
उन्होंने कहा कि यदि जीवन में धर्म नहीं है, तो वह केवल भौतिक सुख-सुविधाओं से भरा एक खाली ढांचा बनकर रह जाता है। धर्म ही वह शक्ति है जो मनुष्य को कठिन परिस्थितियों में भी स्थिर रखती है।
जंक फूड और आधुनिक जीवन पर गहन संदेश
युवाचार्य महेंद्र ऋषि जी महाराज ने आज के समय की जीवनशैली पर चर्चा करते हुए जंक फूड का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि आजकल जंक फूड का प्रचलन बहुत बढ़ गया है। यह भोजन देखने में आकर्षक होता है, स्वादिष्ट लगता है, लेकिन शरीर को आवश्यक पोषक तत्व, विटामिन और शक्ति प्रदान नहीं करता।
उन्होंने कहा कि इसी प्रकार आज के समय में लोग धर्म को केवल बाहरी दिखावे के रूप में अपनाते हैं। वे धार्मिक क्रियाएं तो करते हैं, लेकिन उनके पीछे का वास्तविक भाव और उद्देश्य नहीं समझते।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जैसे जंक फूड शरीर को कमजोर करता है, वैसे ही दिखावटी धर्म आत्मा को कमजोर करता है। इसलिए आवश्यक है कि धर्म को केवल क्रिया नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा बनाया जाए।
धर्म का वास्तविक अर्थ: आचरण में उतारना आवश्यक
युवाचार्य ने कहा कि धर्म का वास्तविक अर्थ उसे जीवन में उतारना है। केवल मंदिर जाना, पूजा करना या धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होना पर्याप्त नहीं है। जब तक व्यक्ति अपने व्यवहार, सोच और आचरण में धर्म को शामिल नहीं करता, तब तक उसका पूर्ण लाभ नहीं मिलता।
उन्होंने कहा कि सत्य बोलना, अहिंसा का पालन करना, संयम रखना, दूसरों के प्रति करुणा रखना और अनुशासन में रहना ही धर्म का वास्तविक स्वरूप है।
श्री संघ और जैन समाज की सक्रिय भूमिका
इस अवसर पर श्री संघ अध्यक्ष इंदरमल टुकड़िया एवं जैन दिवाकर नवयुवक मंडल अध्यक्ष आकाश जैन ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि युवाचार्य श्री के दर्शन-वंदन हेतु प्रतापगढ़ (राजस्थान) श्री संघ एवं नासिक श्री संघ के श्रद्धालु भी विशेष रूप से उपस्थित हुए।
इससे यह स्पष्ट होता है कि यह आयोजन केवल जावरा तक सीमित नहीं था, बल्कि विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं की भागीदारी ने इसे एक भव्य धार्मिक संगम का रूप दिया।
निशुल्क नेत्र परीक्षण शिविर का आयोजन
धर्म सभा के पश्चात सामाजिक सेवा के अंतर्गत जैन दिवाकर नवयुवक मंडल द्वारा एक निशुल्क नेत्र परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर युवाचार्य महेंद्र ऋषि जी महाराज की पावन प्रेरणा एवं जैन दिवाकर लाभमुनि नेत्र चिकित्सालय मंदसौर के सहयोग से प्रारंभ किया गया।
शिविर का शुभारंभ युवाचार्य महेंद्र ऋषि जी महाराज के मंगलाचरण के साथ हुआ, जिससे पूरे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ।
125 से अधिक लोगों ने कराया नेत्र परीक्षण
इस निशुल्क शिविर में लगभग 125 से अधिक लोगों ने अपने नेत्रों की जांच करवाई। ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों ने इस सेवा का भरपूर लाभ लिया।
चिकित्सा टीम द्वारा सभी मरीजों की जांच की गई और आवश्यक परामर्श भी दिया गया। शिविर में नवयुवक मंडल के सदस्यों ने पूरी सक्रियता के साथ व्यवस्थाओं को संभाला।
सामाजिक सेवा और धर्म का संगम
इस आयोजन की विशेषता यह रही कि इसमें धर्म और सेवा दोनों का सुंदर समन्वय देखने को मिला। एक ओर जहां धर्म सभा के माध्यम से आध्यात्मिक ज्ञान दिया गया, वहीं दूसरी ओर निशुल्क चिकित्सा शिविर के माध्यम से समाज सेवा का कार्य किया गया।
यह संदेश दिया गया कि सच्चा धर्म वही है जो दूसरों के जीवन में भी सुधार और सहायता लाए।
अतिथियों का सम्मान और आतिथ्य
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों का पारंपरिक रूप से पुष्पमालाओं और शालों से सम्मान किया गया। बाहर से आए संघों और महानुभावों के आतिथ्य सत्कार का लाभ विभिन्न परिवारों द्वारा लिया गया।
श्रीमती दाखा बाई समीरमल कोचट्टा परिवार, श्रीमती चांद बाई हस्तीमल कोचट्टा एवं श्री विनोद कुमार-अजीत कुमार रांका परिवार द्वारा प्रभावना और आतिथ्य का लाभ लिया गया।
प्रमुख समाजजन और कार्यकर्ताओं की उपस्थिति
इस अवसर पर जैन कांफ्रेंस आत्म ध्यान योजना नई दिल्ली के राष्ट्रीय संगठन मंत्री संदीप रांका, महामंत्री महावीर छाजेड़, आकाश जैन, पारसमल बरड़िया, बसंतीलाल चपड़ोद, दीपचंद डांगी, सुरेन्द्र मेहता, अंशुल मेहता, चिंतन टुकड़िया, मनोज डांगी, राहुल रांका, तरुण टुकड़िया, राहुल गादिया, प्रीतेश कोचट्टा, पराग कोचट्टा, राकेश जैन, उज्जवल भंडारी, महेन्द्र रांका, सुभाष ओस्तवाल, अशोक भंडारी सहित अनेक समाजसेवी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन
पूरे कार्यक्रम का संचालन महामंत्री महावीर छाजेड़ द्वारा किया गया। उनके कुशल संचालन ने कार्यक्रम को व्यवस्थित और प्रभावशाली बनाया। सभा के दौरान श्रद्धालुओं ने संतों के प्रवचनों को अत्यंत ध्यानपूर्वक सुना और उन्हें अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
निष्कर्ष
जावरा के दिवाकर भवन में आयोजित यह धर्म सभा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला आध्यात्मिक महोत्सव था। युवाचार्य महेंद्र ऋषि जी महाराज के प्रवचनों ने यह स्पष्ट किया कि धर्म केवल बाहरी क्रिया नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है।
इसके साथ आयोजित निशुल्क नेत्र परीक्षण शिविर ने समाज सेवा का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। इस पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि जब धर्म और सेवा एक साथ चलते हैं, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन निश्चित रूप से आता है।
