Indore में 20 फरवरी से सजेगा जात्रा-2026, गांधी हॉल में दिखेगी जनजातीय संस्कृति की जीवंत झलक
आदिवासी संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली को नई पीढ़ी से जोड़ने के उद्देश्य से Indore में 20 फरवरी से दो दिवसीय ‘जात्रा-2026’ का आयोजन किया जा रहा है। Indore में यह भव्य सांस्कृतिक उत्सव शहर के ऐतिहासिक गांधी हॉल परिसर में आयोजित होगा। इस आयोजन के जरिए आमजन को प्रदेश की समृद्ध जनजातीय विरासत, लोककला, संगीत और पारंपरिक खानपान से रूबरू कराने का प्रयास किया जा रहा है। आयोजन समिति के अध्यक्ष देवकीनंदन तिवारी और गिरीश चव्हाण ने जानकारी देते हुए बताया कि यह जत्रा आदिवासी समुदाय के प्रमुख पर्व भगौरिया से ठीक एक सप्ताह पहले आयोजित की जा रही है, ताकि लोग इस पर्व के सांस्कृतिक महत्व को और गहराई से समझ सकें। इस वर्ष जत्रा की थीम में पारंपरिक रंग, लोक संगीत और जनजातीय व्यंजन को केंद्र में रखा गया है, जिससे आगंतुकों को आदिवासी जीवनशैली का संपूर्ण अनुभव मिल सके।
जनजातीय कला और हस्तशिल्प की होगी प्रदर्शनी
Indore में जात्रा-2026 में प्रदेश के विभिन्न आदिवासी अंचलों से आए कलाकार अपनी पारंपरिक कला और हस्तशिल्प का प्रदर्शन करेंगे। मेले में लकड़ी, धातु, मिट्टी और कपड़े से बनी हस्तनिर्मित वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इन स्टॉल्स पर आगंतुक न केवल इन कलाकृतियों को देख सकेंगे, बल्कि कलाकारों से सीधे संवाद कर उनकी कला, तकनीक और परंपराओं के बारे में भी जान पाएंगे। इसके साथ ही, जनजातीय समाज के पारंपरिक व्यंजनों के विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे, जहां लोग मोटे अनाज से बने स्थानीय पकवानों का स्वाद ले सकेंगे। आयोजकों का मानना है कि इससे लोगों को आदिवासी खानपान की पौष्टिकता और पारंपरिक महत्व को समझने का अवसर मिलेगा।
नृत्य, लोक संगीत और भगोरिया की गूंज
जात्रा में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रहेंगी। प्रदेश के आदिवासी इलाकों से आए कलाकार जनजातीय नृत्य, लोक संगीत, भगोरिया गीत और मांदल वादन की प्रस्तुतियां देंगे। इन प्रस्तुतियों के लिए Indore में गांधी हॉल परिसर में विशेष रूप से एक भव्य मंच तैयार किया गया है। कार्यक्रम के दौरान भगोरिया पर्व से जुड़ी लोकधुनें और पारंपरिक गीत माहौल को पूरी तरह उत्सवमय बना देंगे। इसके साथ ही भगोरिया पर्व पर आधारित एक विशेष फोटो प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जिसमें आदिवासी समाज की परंपराएं, वेशभूषा और उत्सव की झलक देखने को मिलेगी।
पारंपरिक सजावट से सजेगा गांधी हॉल
Indore में आयोजन को और आकर्षक बनाने के लिए गांधी हॉल परिसर को पूरी तरह से पारंपरिक आदिवासी शैली में सजाया जाएगा। रंगीन कपड़े, लोकचित्र, प्राकृतिक सामग्री और पारंपरिक प्रतीकों के माध्यम से ऐसा वातावरण बनाया जाएगा, जिससे आगंतुक खुद को किसी जनजातीय मेले में मौजूद महसूस कर सकें।
मालवा-निमाड़ के त्योहारों की झलक
जात्रा-2026 में मालवा और निमाड़ क्षेत्र के पारंपरिक त्योहारों की झलक भी देखने को मिलेगी। दीवारों पर लगाई जाने वाली विशेष प्रदर्शनी के माध्यम से इन क्षेत्रों की लोक परंपराओं, पर्वों और सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाया जाएगा। समिति के अनुसार, यह प्रदर्शनी लोगों को प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।
संस्कृति विभाग की पहल
देवकीनंदन तिवारी ने बताया कि संस्कृति विभाग लगातार प्रयास कर रहा है कि प्रदेश की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को न केवल राज्य और देश, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई जा सके। इसी उद्देश्य से Indore में विभाग द्वारा संचालित जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी इस तरह के आयोजनों के माध्यम से जनजातीय संस्कृति को आम जनता तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभा रही है।
संस्कृति, कला और शिक्षा का संगम
जात्रा-2026 केवल एक मेला नहीं, बल्कि संस्कृति, कला और शिक्षा का संगम है। इस आयोजन के जरिए शहरवासी यह जान पाएंगे कि वनों और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय समुदाय की जीवनशैली कितनी समृद्ध, सरल और प्रकृति के अनुकूल है। आयोजन में यह भी दिखाया जाएगा कि किस तरह आदिवासी समाज पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संतुलन को अपने जीवन का हिस्सा मानता है। आगंतुकों को यहां कलाकारों से सीधे बातचीत करने, उनकी कलाओं को समझने और जनजातीय संस्कृति के मूल्यों को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। आयोजकों का मानना है कि इस तरह के आयोजन समाज में सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ परंपराओं को सहेजने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। जात्रा-2026 Indore वासियों के लिए एक ऐसा अवसर है, जहां वे मनोरंजन के साथ-साथ प्रदेश की जनजातीय विरासत को महसूस कर सकेंगे और उसे समझने का अनुभव प्राप्त करेंगे।
