जसप्रीत बुमराह की फिटनेस पर उठा बड़ा सवाल, COE की मेडिकल टीम और चयनकर्ताओं के बीच तालमेल की कमी आई सामने
भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की फिटनेस को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। बुमराह घुटने में दर्द और मांसपेशियों में खिंचाव की समस्या के कारण श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज से बाहर हो गए हैं। उनकी जगह टीम में आकिब नबी को शामिल किया गया है। हालांकि, बुमराह के बाहर होने के बाद अब सवाल सिर्फ उनकी चोट पर नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) की कार्यप्रणाली पर भी उठने लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, COE की स्पोर्ट्स साइंस और मेडिकल टीम तथा राष्ट्रीय चयनकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल नहीं होने के कारण यह स्थिति पैदा हुई। बताया जा रहा है कि चयन समिति को पहले जानकारी दी गई थी कि जसप्रीत बुमराह टेस्ट सीरीज के लिए पूरी तरह फिट हैं, लेकिन बाद में उनकी चोट को गंभीर बताया गया और उन्हें आराम देने का फैसला लिया गया।
बुमराह की फिटनेस रिपोर्ट पर उठे सवाल
जसप्रीत बुमराह भारतीय टीम के सबसे अहम खिलाड़ियों में शामिल हैं। उनकी फिटनेस हमेशा से टीम प्रबंधन के लिए प्राथमिकता रही है, क्योंकि लंबे समय तक चोटों से जूझने के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शानदार वापसी की थी।
लेकिन अब उनकी चोट को लेकर सामने आई जानकारी ने BCCI की मेडिकल व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि चयनकर्ताओं को शुरुआत में बुमराह के खेलने के लिए उपलब्ध होने की जानकारी दी गई थी। इसके बाद अचानक उनकी स्थिति को लेकर अलग रिपोर्ट सामने आई।
यही वजह है कि अब यह चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर बुमराह की फिटनेस को लेकर सही जानकारी समय पर क्यों नहीं दी गई। अगर उनकी चोट पहले से गंभीर थी तो चयन समिति को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं मिली, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
COE में खाली है स्पोर्ट्स साइंस प्रमुख का पद
इस पूरे मामले के बीच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की आंतरिक व्यवस्था भी चर्चा में आ गई है। जानकारी के मुताबिक, COE में स्पोर्ट्स साइंस विभाग के प्रमुख का पद लंबे समय से खाली है।
पिछले साल नितिन पटेल को पद से हटाए जाने के बाद से यह जिम्मेदारी स्थायी रूप से किसी को नहीं सौंपी गई है। फिलहाल धनंजय कौशिक अंतरिम रूप से खेल विज्ञान विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
हालांकि, धनंजय कौशिक की क्षमता और अनुभव पर सवाल नहीं उठाए जा रहे हैं, लेकिन बुमराह जैसी महत्वपूर्ण खिलाड़ी की चोट के प्रबंधन को लेकर उनसे जवाब मांगे जाने की संभावना है। टीम इंडिया के प्रमुख खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर छोटी सी चूक भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।
वर्चुअल बैठक में हुई चोट प्रबंधन पर चर्चा
सोमवार को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के अधिकारियों और मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर के बीच एक वर्चुअल बैठक हुई थी। इस बैठक में केंद्रीय अनुबंध वाले खिलाड़ियों की चोट, फिटनेस और इंजरी मैनेजमेंट को लेकर चर्चा की गई।
इस बैठक का उद्देश्य खिलाड़ियों की फिटनेस रिपोर्ट और उनके रिहैबिलिटेशन प्रक्रिया को बेहतर बनाना था। लेकिन बुमराह की चोट के मामले ने यह साफ कर दिया कि मेडिकल टीम और चयन समिति के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान में सुधार की जरूरत है।
पहले भी उठ चुके हैं फिटनेस रिपोर्ट पर सवाल
यह पहला मौका नहीं है जब भारतीय टीम के किसी खिलाड़ी की फिटनेस रिपोर्ट को लेकर सवाल उठे हैं। इससे पहले तेज गेंदबाज हर्षित राणा की फिटनेस को लेकर भी चर्चा हुई थी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हर्षित राणा का वजन बढ़ गया था, इसके बावजूद उन्हें फिट घोषित कर दिया गया। बाद में उन्हें हैमस्ट्रिंग इंजरी का सामना करना पड़ा। इस घटना के बाद भी खिलाड़ी की फिटनेस जांच और निगरानी प्रक्रिया पर सवाल उठे थे।
बुमराह की चोट टीम इंडिया के लिए चिंता का विषय
जसप्रीत बुमराह की मौजूदगी भारतीय टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उनकी गेंदबाजी क्षमता और दबाव वाले मौकों पर प्रदर्शन उन्हें दुनिया के सबसे प्रभावशाली तेज गेंदबाजों में शामिल करता है।
ऐसे में उनकी चोट सिर्फ एक खिलाड़ी की समस्या नहीं, बल्कि टीम की रणनीति पर भी असर डालती है। भारत को आने वाले समय में कई महत्वपूर्ण मुकाबले खेलने हैं और ऐसे में बुमराह का पूरी तरह फिट होना टीम प्रबंधन के लिए बेहद जरूरी है।
फिलहाल BCCI की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन बुमराह की चोट ने एक बार फिर खिलाड़ियों की फिटनेस निगरानी, मेडिकल रिपोर्टिंग और COE की कार्यप्रणाली को लेकर बहस शुरू कर दी है।
अब यह देखना होगा कि BCCI इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या स्पोर्ट्स साइंस विभाग में स्थायी नियुक्ति कर खिलाड़ियों की इंजरी मैनेजमेंट प्रक्रिया को मजबूत किया जाता है या नहीं।
