जर्जर मोहता मार्केट नागदा की खतरनाक हालत से शहर में डर का माहौल। बारिश और आंधी से पहले प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग तेज। भवन की गैलरी पहले भी गिर चुकी है।
जर्जर मोहता मार्केट नागदा बना मौत का खतरा, प्रशासन की अनदेखी से मंडरा रहा बड़ा हादसा
जर्जर मोहता मार्केट नागदा बना शहर के लिए बड़ा खतरा
जर्जर मोहता मार्केट नागदा इन दिनों शहरवासियों के लिए चिंता का सबसे बड़ा कारण बन चुका है। नागदा के महात्मा गांधी मार्ग स्थित रेलवे स्टेशन के समीप बना यह लगभग 70 वर्ष पुराना दो मंजिला भवन अब पूरी तरह खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो आने वाले बारिश के मौसम में यहां बड़ा हादसा हो सकता है।
करीब 3000 वर्गफीट क्षेत्र में बना यह भवन वर्षों पुराना है और अब इसकी दीवारों, छतों और फर्श में बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई देने लगी हैं। भवन के कई हिस्से झुक चुके हैं और गैलरी बाहर की ओर खतरनाक तरीके से लटक रही है।
70 साल पुराना मोहता मार्केट अब खतरनाक स्थिति में
जानकारी के अनुसार मोहता मार्केट का निर्माण स्वर्गीय सूरजमल कन्हैयालाल मोहता द्वारा करीब सात दशक पहले कराया गया था। उस समय भवन का निर्माण पारंपरिक गार्डर, फर्शी और चूने से किया गया था। लगातार समय बीतने और रखरखाव के अभाव में अब यह भवन पूरी तरह कमजोर हो चुका है।
करीब 14 वर्ष पूर्व नगर पालिका परिषद नागदा ने भवन की तीसरी मंजिल के निर्माण कार्य को रुकवा दिया था। इसके बावजूद भवन के अंदर व्यावसायिक गतिविधियां जारी रहीं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन में कई स्थानों पर गार्डर लगभग 2 इंच तक झुक चुके हैं। छत और दीवारों के बीच दूरी स्पष्ट दिखाई देने लगी है, जो इसकी गंभीर स्थिति को दर्शाती है।
जर्जर मोहता मार्केट नागदा की गैलरी पहले भी गिर चुकी
सबसे अधिक चिंता भवन की सामने की गैलरी को लेकर है। क्षेत्रवासियों के अनुसार यह गैलरी खतरनाक रूप से बाहर की ओर झुक चुकी है। इतना ही नहीं, भवन की एक गैलरी पहले भी भरभराकर गिर चुकी है।यह घटना प्रशासन के लिए चेतावनी साबित हो सकती थी, लेकिन इसके बाद भी भवन को पूरी तरह खाली नहीं कराया गया।आज भी भवन के नीचे दुकानों का संचालन जारी है। बड़ी संख्या में ग्राहक और राहगीर यहां से गुजरते हैं। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
बारिश और तेज आंधी से बढ़ सकता है खतरा
मानसून और तेज हवाओं का मौसम नजदीक आते ही लोगों की चिंता बढ़ गई है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि तेज बारिश या आंधी आने पर भवन का कोई भी हिस्सा गिर सकता है।भवन के आसपास धर्मशालाएं, व्यापारिक प्रतिष्ठान और भीड़भाड़ वाले क्षेत्र मौजूद हैं। विवाह समारोह, त्योहार और सामाजिक आयोजनों के दौरान यहां भारी संख्या में लोग जमा होते हैं।ऐसे में यदि भवन का कोई हिस्सा गिरता है तो बड़ी जनहानि हो सकती है।
तलघर में जलभराव से कमजोर हो चुकी है नींव
जर्जर मोहता मार्केट नागदा की सबसे गंभीर स्थिति इसके तलघर को लेकर बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार हर वर्ष लंबे समय तक बारिश का पानी तलघर में भरा रहता है।लगातार जलभराव और रिसाव के कारण भवन की नींव कमजोर हो चुकी है। दीवारों में धंसाव देखा जा रहा है।इसके अलावा दीमक, चूहों और वर्षों से रखरखाव नहीं होने के कारण भवन अंदर से पूरी तरह खोखला हो चुका है।विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार नमी और कमजोर नींव किसी भी पुराने भवन के लिए सबसे बड़ा खतरा होती है।
भवन संचालक वल्लभ मोहता ने प्रशासन को दिए कई आवेदन
भवन संचालक वल्लभ मोहता ने बताया कि वे वर्ष 2019 से लगातार नगर पालिका परिषद नागदा, अनुविभागीय अधिकारी और संबंधित विभागों को लिखित आवेदन देकर भवन को जमींदोज करने की मांग कर रहे हैं।उनके अनुसार पूर्व में कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू भी हुई थी, लेकिन कुछ किरायेदारों के विरोध और प्रशासनिक ढिलाई के चलते मामला अधूरा रह गया।
वल्लभ मोहता का कहना है कि कई किरायेदार वर्षों से बिना किराया दिए दुकानें संचालित कर रहे हैं और भवन खाली करने को तैयार नहीं हैं।
प्रशासन की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
नगर पालिका परिषद नागदा द्वारा भवन को खतरनाक घोषित किया जा चुका है। साथ ही स्ट्रक्चर स्टेबिलिटी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए थे।इसके बावजूद अब तक कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन केवल नोटिस जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।लोगों का आरोप है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।
नागदा में पहले भी हो चुके हैं बड़े हादसे
नागदा शहर में इससे पहले भी जर्जर भवनों के कारण हादसे हो चुके हैं।पूर्व में जवाहर मार्ग स्थित एक दो मंजिला भवन गिरने से उसमें काम कर रहे दो लोगों की मौत हो गई थी।इसके अलावा हाल ही में उज्जैन ढाबा रोड स्थित एक कमजोर तीन मंजिला भवन को भी जमींदोज किया गया था।इन घटनाओं के बावजूद शहर के अन्य खतरनाक भवनों की ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।
क्षेत्रवासियों की प्रशासन से मांग
क्षेत्रवासियों और सामाजिक संगठनों ने नगर पालिका, पुलिस प्रशासन और अनुविभागीय अधिकारियों से मांग की है कि आगामी वर्षा ऋतु को देखते हुए तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए।लोगों का कहना है कि प्रशासन को विशेष अभियान चलाकर शहर के सभी जर्जर भवनों को चिन्हित करना चाहिए।साथ ही खतरनाक भवनों को खाली कराकर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में किसी बड़ी त्रासदी को रोका जा सके।
क्या हो सकती है बड़ी त्रासदी?
विशेषज्ञों के अनुसार यदि लगातार बारिश, तेज हवा या कंपन के दौरान भवन का कोई हिस्सा गिरता है तो आसपास मौजूद दुकानदार, ग्राहक और राहगीर इसकी चपेट में आ सकते हैं।रेलवे स्टेशन के समीप होने के कारण यहां हर समय भीड़ बनी रहती है।ऐसे में जर्जर मोहता मार्केट नागदा केवल एक भवन नहीं बल्कि शहर के लिए संभावित खतरा बन चुका है।
प्रशासन के लिए बड़ी चेतावनी
यह मामला प्रशासन के लिए बड़ी चेतावनी माना जा रहा है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में होने वाली किसी भी दुर्घटना की जिम्मेदारी संबंधित विभागों पर आ सकती है।शहरवासियों का कहना है कि हादसे के बाद कार्रवाई करने से बेहतर है कि पहले ही सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
निष्कर्ष
जर्जर मोहता मार्केट नागदा आज शहर के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। भवन की कमजोर स्थिति, गिरी हुई गैलरी, जलभराव, झुकी दीवारें और प्रशासनिक लापरवाही आने वाले समय में किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती हैं।अब देखना यह होगा कि प्रशासन समय रहते कार्रवाई करता है या फिर किसी बड़े हादसे के बाद व्यवस्था जागती है।




