शासकीय संदीपनी विद्यालय सोंडवा में ‘जन सुरक्षा युवा सृजन संवाद’, विद्यार्थियों को साइबर और महिला सुरक्षा के प्रति किया जागरूक
दैनिक स्वराज वाणी | ब्यूरो रिपोर्टर — खलील मंसूरी, अलीराजपुर
महिला थाना प्रभारी मनोरमा सिसोदिया ने विद्यार्थियों को बताए साइबर अपराध से बचाव के तरीके; बाल विवाह के दुष्परिणाम और कानून की दी जानकारी, सोंडवा थाने का भ्रमण कर पुलिस की कार्यप्रणाली भी समझी
अलीराजपुर/सोंडवा। युवाओं और स्कूली विद्यार्थियों को साइबर अपराध, महिला सुरक्षा, बाल विवाह के दुष्परिणाम और कानून के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से शनिवार, 22 अगस्त 2026 को शासकीय संदीपनी विद्यालय सोंडवा में ‘जन सुरक्षा युवा सृजन संवाद’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कक्षा 11वीं और 12वीं के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। विद्यार्थियों को सुरक्षित और जिम्मेदार भविष्य के निर्माण के साथ आत्मनिर्भर बनने तथा किसी भी संकट की स्थिति में उपलब्ध सहायता सेवाओं का उपयोग करने के संबंध में जानकारी दी गई।
पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देशानुसार अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती ज्योति उमठ बघेल के मार्गदर्शन में महिला थाना प्रभारी निरीक्षक मनोरमा सिसोदिया एवं महिला थाने के स्टाफ द्वारा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के बाद विद्यार्थियों को थाना सोंडवा का भ्रमण भी कराया गया, जहां उन्हें पुलिस की कार्यप्रणाली और थाने में होने वाली विभिन्न प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई।
साइबर अपराध से बचाव के लिए सतर्क रहने की सलाह
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को वर्तमान समय में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों के बारे में विस्तार से जागरूक किया गया। छात्र-छात्राओं को बताया गया कि मोबाइल फोन और इंटरनेट का उपयोग करते समय सावधानी रखना बेहद जरूरी है।
विद्यार्थियों को सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग, अनजान व्यक्तियों से ऑनलाइन संपर्क करते समय सतर्कता और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा के बारे में समझाया गया। उन्हें बताया गया कि डिजिटल माध्यमों पर किसी भी संदिग्ध गतिविधि को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर इसकी जानकारी अपने परिजनों, शिक्षकों या पुलिस को देनी चाहिए।
पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों को ऑनलाइन दुनिया में जिम्मेदार व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया। साथ ही बताया कि साइबर अपराध का शिकार होने पर घबराने या घटना को छिपाने के बजाय समय रहते उचित माध्यम से सहायता लेना जरूरी है।
महिला सुरक्षा को लेकर छात्र-छात्राओं से संवाद
महिला थाना प्रभारी निरीक्षक मनोरमा सिसोदिया ने विद्यार्थियों के साथ महिला सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी संवाद किया। विशेष रूप से छात्राओं को अपने अधिकारों और सुरक्षा से संबंधित कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में बताया गया कि किसी भी प्रकार की परेशानी, उत्पीड़न अथवा असुरक्षा की स्थिति में पीड़ित को चुप रहने के बजाय तत्काल परिवार, शिक्षक, पुलिस या संबंधित सहायता सेवा से संपर्क करना चाहिए।
विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया गया कि सुरक्षित समाज के निर्माण की जिम्मेदारी केवल पुलिस या प्रशासन की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की है। युवाओं को महिलाओं और बालिकाओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार अपनाने तथा समाज में सुरक्षा और समानता का वातावरण बनाने में योगदान देना चाहिए।
बाल विवाह के दुष्परिणामों की दी जानकारी
कार्यक्रम में बाल विवाह जैसे सामाजिक मुद्दे पर भी विद्यार्थियों को जागरूक किया गया। पुलिस अधिकारियों ने छात्र-छात्राओं को बाल विवाह से होने वाले सामाजिक, शैक्षणिक और व्यक्तिगत दुष्परिणामों की जानकारी दी।
विद्यार्थियों को समझाया गया कि कम उम्र में विवाह से शिक्षा प्रभावित हो सकती है और भविष्य के अवसर सीमित हो सकते हैं। इसलिए युवाओं को अपनी शिक्षा, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता पर ध्यान देना चाहिए।
पुलिस टीम ने विद्यार्थियों से कहा कि वे स्वयं जागरूक होने के साथ अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं के प्रति जागरूक करें। युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही सामाजिक बदलाव को मजबूती दी जा सकती है।
‘सशक्त युवा से बनेगा सुरक्षित और सशक्त समाज’
‘
जन सुरक्षा युवा सृजन संवाद’ के माध्यम से विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए शिक्षा, आत्मनिर्भरता और कानून के प्रति जागरूकता का महत्व समझाया गया।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि आज के विद्यार्थी ही आने वाले समय में समाज और देश की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसलिए उनमें सामाजिक जिम्मेदारी, आत्मविश्वास, अनुशासन और कानून के प्रति सम्मान की भावना विकसित होना आवश्यक है।
छात्र-छात्राओं को अपने लक्ष्य निर्धारित कर शिक्षा और कौशल के माध्यम से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही यह संदेश दिया गया कि कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने और समय पर सहायता मांगने की समझ भी युवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
हेल्पलाइन सेवाओं के बारे में विद्यार्थियों को किया जागरूक
कार्यक्रम के दौरान प्रधान आरक्षक वीरेंद्र मंडलोई ने छात्र-छात्राओं को संकट की स्थिति में उपलब्ध विभिन्न हेल्पलाइन सेवाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि किसी भी आपात स्थिति या परेशानी में सहायता प्राप्त करने के लिए संबंधित हेल्पलाइन का उपयोग किया जा सकता है।
विद्यार्थियों को हेल्पलाइन सेवाओं का सही तरीके से उपयोग करने और जरूरत पड़ने पर बिना संकोच सहायता मांगने के लिए प्रेरित किया गया। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि छात्र-छात्राएं केवल कानून और सुरक्षा के विषय में जानकारी ही न रखें, बल्कि जरूरत के समय उपलब्ध सहायता व्यवस्था तक पहुंचना भी जानें।
विद्यार्थियों ने किया सोंडवा थाने का भ्रमण
विद्यालय में जागरूकता कार्यक्रम पूरा होने के बाद छात्र-छात्राओं को थाना सोंडवा का भ्रमण कराया गया। विद्यार्थियों के लिए यह कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा, क्योंकि उन्हें प्रत्यक्ष रूप से पुलिस थाने की कार्यप्रणाली समझने का अवसर मिला।
पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों को बताया कि थाना स्तर पर किस तरह नागरिकों की शिकायतों और विभिन्न मामलों पर कार्रवाई की जाती है तथा कानून व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस की क्या भूमिका होती है।
थाना भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों और पुलिस के बीच सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देना भी रहा। छात्र-छात्राओं को यह समझाने का प्रयास किया गया कि पुलिस आम नागरिकों की सुरक्षा और सहायता के लिए कार्य करती है तथा किसी भी समस्या में पुलिस से संपर्क करने में झिझक नहीं होनी चाहिए।
विद्यालय के प्राचार्य और शिक्षक भी रहे उपस्थित
कार्यक्रम में महिला थाना स्टाफ के साथ शासकीय संदीपनी विद्यालय के प्राचार्य और शिक्षकगण उपस्थित रहे। विद्यालय प्रबंधन ने भी विद्यार्थियों को कार्यक्रम में सक्रिय रूप से शामिल होने और सुरक्षा से संबंधित जानकारियों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
‘जन सुरक्षा युवा सृजन संवाद’ के माध्यम से विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा, महिला सुरक्षा, बाल विवाह की रोकथाम, आत्मनिर्भरता, कानूनी जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों से जोड़ा गया।
पुलिस की इस पहल का प्रमुख उद्देश्य युवाओं को केवल अपराधों से बचाव की जानकारी देना ही नहीं, बल्कि उन्हें जिम्मेदार, जागरूक और आत्मनिर्भर नागरिक बनने के लिए प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों को सुरक्षित और सशक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया गया।
