जैनिज्म युवा संवाद कार्यक्रम ग्वालियर में मुनिश्री 108 समत्व सागर महाराज ने युवाओं को नैतिकता, संस्कार, अनुशासन और धर्म का संदेश दिया। जानिए कार्यक्रम की पूरी रिपोर्ट, सभी अतिथियों एवं आयोजकों के नाम।
जैनिज्म युवा संवाद: ग्वालियर में मुनिश्री समत्व सागर महाराज ने युवाओं को दिए सफलता और संस्कार के 5 सूत्र
जैनिज्म युवा संवाद
ग्वालियर। संवाददाता।
जैनिज्म युवा संवाद कार्यक्रम का आयोजन मंगलवार को जैन मिलन ग्वालियर द्वारा महावीर कॉम्पलेक्स में मुनिश्री 108 समत्व सागर महाराज के सानिध्य में भव्य रूप से किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को जैन संस्कृति, नैतिक मूल्यों, अनुशासन तथा आधुनिक जीवन में धर्म के महत्व से जोड़ना रहा।कार्यक्रम में मुनिश्री 108 समत्व सागर महाराज ने कहा कि युवा शक्ति किसी भी समाज और राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत होती है। यदि युवाओं में संस्कार, संयम और नैतिकता होगी तो राष्ट्र का भविष्य भी उज्ज्वल होगा।मंच पर मुनिश्री शील सागर जी महाराज एवं मुनिश्री सुप्रभात सागर महाराज भी विराजमान रहे।
जैनिज्म युवा संवाद कार्यक्रम का शुभारंभ
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान महावीर के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।दीप प्रज्वलित करने वालों में—
- डॉ. वीरेंद्र गंगवाल
- अध्यक्ष रोहित जैन
- सचिव दीपक जैन
- कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन
शामिल रहे।कार्यक्रम का मंगलाचरण राखी जैन ने प्रस्तुत किया।विशेष अतिथि के रूप में घाटीगांव की एसडीएम वंदन जैन उपस्थित रहीं।
मुनिश्री समत्व सागर महाराज ने युवाओं को दिए सफलता के 5 संस्कार
जैनिज्म युवा संवाद को संबोधित करते हुए मुनिश्री 108 समत्व सागर महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति और जैन संस्कृति दोनों ही संस्कार प्रधान हैं।उन्होंने कहा कि आज केवल डिग्री, नौकरी या बड़ा पैकेज ही सफलता का पैमाना नहीं है बल्कि—
- आत्मिक शांति
- नैतिकता
- अनुशासन
- आत्मविश्वास
- संस्कार
ही वास्तविक सफलता की पहचान हैं।उन्होंने कहा कि जीवन की दिशा युवावस्था में ही तय होती है। इसलिए युवाओं को शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार भी ग्रहण करने चाहिए।
धर्म और आधुनिक जीवन में कैसे बनाएं संतुलन
मुनिश्री ने कहा कि वर्तमान समय में व्यवसाय, परिवार और धर्म के बीच संतुलन बनाकर जीवन को सुखी बनाया जा सकता है।उन्होंने कहा कि—“धर्म केवल मंदिर तक सीमित नहीं है बल्कि जीवन जीने की श्रेष्ठ कला है।”उन्होंने युवाओं से कहा कि वे अपने व्यवहार में अहिंसा, संयम और सत्य को अपनाएं।
कोई भी कर सकता है धर्म साधना
मुनिश्री समत्व सागर महाराज ने कहा कि—“कोई जैन हो या अजैन, धर्म साधना प्रत्येक व्यक्ति कर सकता है।”उन्होंने बताया कि अणुव्रत की साधना किसी धर्म विशेष तक सीमित नहीं है।इसमें मुख्य रूप से—
- अहिंसा
- संयम
- सत्य
- सदाचार
- आत्मसंयम
का पालन किया जाता है।
विद्यार्थियों ने पूछे सवाल, मुनिश्री ने दिए प्रेरक उत्तर
जैनिज्म युवा संवाद के दौरान विद्यार्थियों एवं युवाओं ने जीवन, धर्म, करियर, परिवार और सफलता से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे।मुनिश्री ने सभी प्रश्नों के सरल, सहज और प्रेरणादायक उत्तर देकर युवाओं का मार्गदर्शन किया।
भोजन के समय मोबाइल से रहें दूर
अपने उद्बोधन में मुनिश्री ने कहा कि—भोजन करते समय मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करना चाहिए।उन्होंने कहा कि इससे—
- स्वास्थ्य प्रभावित होता है।
- परिवार में संवाद कम होता है।
- मानसिक तनाव बढ़ता है।
- बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने सभी अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को अच्छे संस्कार दें और उन्हें धार्मिक वातावरण से जोड़ें।
युवाओं पर है जैन समाज की संस्कृति और धरोहर की जिम्मेदारी
मुनिश्री ने कहा कि—जिन युवाओं का जन्म जैन समाज में हुआ है वे अत्यंत पुण्यशाली हैं।अब जैन समाज की संस्कृति, परंपरा और धरोहर को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी नई पीढ़ी के कंधों पर है।उन्होंने कहा कि—सही शिक्षा के साथ यदि अच्छे संस्कार हों तो व्यक्ति का चहुंमुखी विकास निश्चित है।
अतिथियों ने किया श्रीफल भेंट
कार्यक्रम के दौरान मुनिश्री के चरणों में श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया।इनमें प्रमुख रूप से—
- अध्यक्ष रोहित जैन
- सचिव दीपक जैन
- कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन
- प्रवीण गंगवाल
- पंकज बाकलीवाल
- योगेश बोहरा
उपस्थित रहे।
संचालन एवं आभार
कार्यक्रम का सफल संचालन विनय कासलीवाल ने किया।आभार प्रदर्शन दीपक जैन ने व्यक्त किया।
निष्कर्ष
जैनिज्म युवा संवाद कार्यक्रम ने युवाओं को धर्म, संस्कार, अनुशासन और नैतिक जीवन की प्रेरणा दी। मुनिश्री 108 समत्व सागर महाराज ने स्पष्ट कहा कि यदि युवा सही दिशा में आगे बढ़ेंगे तो समाज और राष्ट्र दोनों का भविष्य उज्ज्वल होगा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा, समाजजन एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।






