प्रकाशनार्थ
जैन सोशल ग्रुप नागदा द्वारा वर्षीतप आराधकों का भव्य बहुमान
नागदा (निप्र)। Jain धर्म में तप, संयम और आत्मशुद्धि को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। इसी भावना को आत्मसात करते हुए नगर के तेरह श्रावक-श्राविकाओं द्वारा की जा रही वर्षीतप आराधना अपने पूर्णता के चरण की ओर अग्रसर है। इस पावन अवसर पर जैन सोशल ग्रुप नागदा द्वारा वर्षीतप आराधकों का अनुमोदनार्थ एवं प्रेरणादायक बहुमान समारोह अत्यंत श्रद्धा और भव्यता के साथ आयोजित किया गया।
यह आयोजन न केवल धार्मिक भावना का प्रतीक बना, बल्कि समाज में तपस्या, साधना और आत्मनियंत्रण के महत्व को भी पुनः स्थापित करने वाला अवसर सिद्ध हुआ।
तीर्थंकर चौबीसी का भव्य आयोजन
बहुमान समारोह से पूर्व जैन समाज की आस्था और श्रद्धा का केंद्र रहे तीर्थंकर चौबीसी का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस दौरान पूरा वातावरण भक्ति, आध्यात्मिक ऊर्जा और धार्मिक उल्लास से परिपूर्ण रहा।
श्रद्धालुओं ने तीर्थंकर भगवान के समक्ष अपनी वंदना अर्पित की और जीवन में संयम, अहिंसा तथा धर्म मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। इस आयोजन ने पूरे कार्यक्रम को और अधिक पवित्र और आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान किया।
वर्षीतप आराधकों का सम्मान
जैन सोशल ग्रुप द्वारा तेरह वर्षीतप आराधकों का विशेष सम्मान किया गया। इन आराधकों ने कठिन तपस्या और आत्मसंयम के माध्यम से आध्यात्मिक साधना की मिसाल प्रस्तुत की है।
कार्यक्रम में सभी आराधकों का पुष्पमालाओं, सम्मान पत्रों एवं मंगलभावनाओं के साथ अभिनंदन किया गया। उपस्थित समाजजनों ने उनके तप, त्याग और समर्पण की भूरी-भूरी प्रशंसा की तथा उनके इस आध्यात्मिक प्रयास को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
आयोजन का लाभ एवं परिवार का योगदान
इस संपूर्ण धार्मिक आयोजन का लाभ वीरेन्द्र कुमार, सुशील कुमार एवं सचिन कुमार सकलेचा परिवार द्वारा लिया गया। उनके सहयोग से यह कार्यक्रम अत्यंत भव्य, सुव्यवस्थित और श्रद्धापूर्ण वातावरण में संपन्न हो सका।
परिवार द्वारा किए गए इस धार्मिक सहयोग को समाज ने सराहा और इसे धर्म-संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान बताया।
स्वागत, संचालन एवं आभार प्रदर्शन
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वागत उद्बोधन से हुआ, जिसे जैन सोशल ग्रुप के अध्यक्ष धर्मेन्द्र बंम ने प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि “तपस्या केवल शरीर का संयम नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि का मार्ग है। वर्षीतप जैसे व्रत हमें जीवन के वास्तविक उद्देश्य की ओर ले जाते हैं।”
कार्यक्रम का कुशल एवं व्यवस्थित संचालन मनोज वागरेचा द्वारा किया गया। उनके प्रभावी संचालन ने पूरे कार्यक्रम को अनुशासित और गरिमामय बनाए रखा।
कार्यक्रम के अंत में सचिव प्रशांत नाहर ने सभी अतिथियों, आराधकों, समाजजनों एवं सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में धार्मिक चेतना और एकता को मजबूत करते हैं।
उपस्थित गणमान्य सदस्य एवं समाजजन
इस पावन अवसर पर समाज के अनेक गणमान्य सदस्य एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा और अधिक बढ़ा दी।
उपस्थित प्रमुख सदस्यों में शामिल रहे—
अरविंद नाहर, कमल जैन, दिलीप कांठेड़, शरद जैन, श्रेणिक बंम, मनीष चपलोत, संजय मुरडिया, राजेश सकलेचा, अमित बंम, हितेष कांठेड़, रवि संघवी, सिद्धार्थ कांठेड़, सुरेश नाहटा, ब्रजेश बोहरा, राजा कर्नावट, आशीष पोखरना, अंकुर जैन, सतीश जैन (सांवेर वाले), राकेश ओरा, यशवंत धूपिया, अर्पित सिसौदिया, मनोज कोठारी, दिलीप गांधी, सचिन सकलेचा, साधना जैन, शर्मिला बंम, मनीषा गांग, डॉ. नितिशा वागरेचा, संगीता बंम, संध्या संघवी, विभा बंम सहित अनेक सदस्य।
इन सभी की सक्रिय उपस्थिति ने आयोजन को सामाजिक एकता और धार्मिक सौहार्द का सुंदर उदाहरण बना दिया।
वर्षीतप का आध्यात्मिक महत्व
वर्षीतप जैन धर्म का अत्यंत कठिन एवं महत्वपूर्ण तप माना जाता है, जिसमें साधक वर्षभर विभिन्न प्रकार के संयम, उपवास और आत्मनियंत्रण का पालन करते हैं। यह तप आत्मा की शुद्धि, कर्मों के क्षय और मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होने का माध्यम है।
इस प्रकार के तप समाज को यह संदेश देते हैं कि जीवन का वास्तविक उद्देश्य भोग-विलास नहीं, बल्कि आत्मकल्याण और संयमित जीवन है।
समाज के लिए प्रेरणा
यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश भी लेकर आया कि यदि व्यक्ति दृढ़ संकल्प और श्रद्धा के साथ आगे बढ़े, तो कठिन से कठिन साधना भी संभव है।
वर्षीतप आराधकों का यह समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए एक आदर्श उदाहरण बनेगा और उन्हें आध्यात्मिक मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करेगा।
निष्कर्ष
जैन सोशल ग्रुप नागदा द्वारा आयोजित यह भव्य बहुमान समारोह धार्मिक, सामाजिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत सफल एवं सार्थक सिद्ध हुआ। इस आयोजन ने समाज में एकता, श्रद्धा और तपस्या के महत्व को पुनः स्थापित किया।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि तप, संयम और साधना ही जीवन को वास्तविक अर्थ प्रदान करते हैं। वर्षीतप आराधकों का यह सम्मान पूरे समाज के लिए गर्व का विषय है और यह आयोजन लंबे समय तक स्मरणीय रहेगा।
दिनांक: 12/04/2026
धर्मेन्द्र बंम
मो. 94248 45093
