जावरा में दीपावली मिलन: अपनापन, सम्मान और ऊर्जा का संगम
मध्य प्रदेश के छोटे-से-नगर जावरा में इस वर्ष कार्तिक मास के अंतिम सोपान पर आयोजित दीपावली मिलन ने एक नई ऊर्जा को जन्म दिया है। जब-जब मैं जावरा आया हूँ, वहाँ का अपार „अपनापन“ और सम्मान-भाव मुझे हमेशा मेरी पूँजी लगते रहे हैं। इस बार की आगमन-दौड़ विशेष थी — क्योंकि मैं अपने साथियों के साथ मिला, समाज-सेवा के साझा विचारों और उत्साह का अनुभव किया।
इस मिलन-प्रसंग का आयोजन था जैन सोशल ग्रुप्स इंटरनेशनल फेडरेशन (JSGIF) के अंतरराष्ट्रीय डायरेक्टर अनिल धारीवाल के निवास-स्थल पर, जहाँ मैं और मेरी टीम — जनरल सेक्रेटरी मनीष शाह एवं पूर्व उपाध्यक्ष सुशील कांठेड — पहुंचें। वहाँ की आत्मियता और स्वागत-भाव अनुकरणीय था।
मित्रता-परिवार के संयोजन से विशेष रूप से कृतज्ञ हूँ — जैन सोशल ग्रुप जावरा के माध्यम से, और साथ ही नेचुरल अवेयरनेस कमेटी के चेयरमैन गुरु संदीप रांका जावरा की सक्रिय भागीदारी ने इस मिलन को यादगार बना दिया।
इस अवसर पर, मित्रता-परिवार द्वारा बिरेन शाह, मनीष शाह एवं सुशील कांठेड का माला-शाल पहनाकर सम्मानित किया गया। इस स्वागत-और-सम्मान की प्रक्रिया ने न केवल मिलन-भाव को पुष्ट किया, बल्कि जावरा में जैन समाज के बीच एकता व सहयोग की भावना को भी सशक्त बनाया।
साथ ही, जैन सोशल ग्रुप जावरा द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित समारोह — कार्तिक पूर्णिमा (5 नवंबर, बुधवार) को ग्राम रोजाना आदिनाथ जैन मंदिर पर सभी जैन समाज के लिए नवकारसी (नव कारसी) आयोजन का फ्लेक्स अनावरण भी किया गया। यह परम्परा जावरा में सामाजिक-सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाती है, जहाँ दीपावली की रोशनी के बीच मित्रता-परिवार व जैन समाज मिलकर नव-उद्यम व नव-उर्जा का संचार करते हैं।
इस आयोजन में ग्रुप के अध्यक्ष राजेश पोखरना, पूर्व अध्यक्षों में शामिल द्वय — संदीप रांका व पंकज काठेड, आशीष पोखरना, आलोक बरैया, सचिव शशांक मेहता, शैलेष श्रीश्रीमाल, मनीष मेहता, अर्पल कोच्चटा, वैभव ओस्तवाल, तरुण टुकडिया, संदीप श्रीश्रीमाल, विपिन चोरड़िया, राजेश हिंगड, पियुष कांठेड, पंकज जैन आदि साथी-गण उपस्थित थे। इस विस्तृत उपस्थिति ने जावरा-मंच पर सामाजिक सहभागिता और सक्रियता की दिशा को दर्शाया।
इस मिलन-प्रसंग में प्रमुख बातें निम्नलिखित हैं:
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अपनापन एवं सम्मान – जावरा-मंच पर जहां पर मैं आया, प्रत्येक आगंतुक को परिवार-सदस्य की तरह गले-लगाया गया। इस सुखद-स्वागत का अनुभव मेरी “पूँजी” बन गया है।
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मिलन-उत्साह – दीपावली मिलन के तौर पर यह कार्यक्रम नए विचारों, सहयोग के नए अवसरों तथा सामुदायिक ऊर्जा के समावेश का प्रतीक बना है।
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सामाजिक-सेवा व संगठनात्मक संघर्ष – जैन सोशल ग्रुप्स इंटरनेशनल फेडरेशन, मित्रता-परिवार, नेचुरल अवेयरनेस कमेटी जैसी संस्थाएं जावरा में सक्रिय रूप से सामाजिक उत्तरदायित्व निभा रही हैं।
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परम्परा व नवाचार का समागम – कार्तिक मास के अंतिम सोपान पर आयोजित दीपावली मिलन के साथ-साथ नवकारसी समारोह जैसे आयोजन इस क्षेत्र में परम्परागत व आधुनिक सोच का मेल प्रस्तुत करते हैं।
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सामाजिक नेटवर्किंग व सहयोग – इस प्रकार का मंच कार्यकर्ताओं, समाज-सेवकों व समुदाय-सदस्यों को एक साथ लाता है, जहाँ नए मित्र बनते हैं, विचार साझा होते हैं और आने वाले समय में मिलकर कार्य करने की प्रेरणा मिलती है।

मेरा मानना है कि इस वर्ष के जावरा आगमन ने न केवल व्यक्तिगत दृष्टि से बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी बहुत-कुछ दिया है। जहाँ अनिल धारीवाल का स्वामित्व-आयोजन, गुरु संदीप रांका का नेचुरल अवेयरनेस फोकस, जैन सोशल ग्रुप जावरा और मित्रता-परिवार का सामूहिक योगदान मिला — वहाँ जावरा-समाज ने आतिथ्य व आत्मीयता से यह संदेश दिया कि “हम एक हैं, हम मिलकर आगे बढ़ेंगे।”
मैं इस अवसर पर एक बार फिर स्वयं और अपनी टीम की ओर से — बिरेन शाह, मनीष शाह, सुशील कांठेड — मित्रता-परिवार, जैन सोशल ग्रुप्स इंटरनेशनल फेडरेशन एवं जैन सोशल ग्रुप जावरा के समस्त सदस्यों का आभारी हूँ। आपकी इस स्वागत-शाल संस्कृति ने हमें प्रेरणा दी है और हम आने वाले समय में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी हेतु उत्सुक हैं।
अतः, जब आप जावरा आए, तो केवल एक स्थल-दर्शन नहीं बल्कि एक अनुभव-संवाद, सहयोग-आंदोलन और सामाजिक-उर्जा का संचार प्राप्त होता है। इस दीपावली मिलन ने हमें यह याद दिलाया कि जहाँ अपनापन हो, वहाँ ऊर्जा स्वाभाविक है; जहाँ सम्मान हो, वहाँ प्रेरणा स्वतः उत्पन्न होती है।
इस प्रकार, जावरा में कार्तिक मास के अंतिम सोपान पर यह दीपावली मिलन, नवकारसी आयोजन और सामाजिक-मिलन कार्यक्रम एक पूर्ण पैकेज के रूप में उभरा है — जो हमें याद दिलाता है कि मिलकर बढ़ना, साथ मिलकर उत्सव मनाना और सामाजिक-जागरूकता विकसित करना कितना महत्वपूर्ण है।
