जैन समाज में ईर्ष्या, कपट और एकता की कमी पर हार्दिक हुंडिया ने उठाए सवाल। डॉ. प्रदीप बाफना के नेतृत्व में आइजा से जुड़े करीब 450 जैन पत्रकारों की सराहना की।
जैन समाज में एकता की कमी और ईर्ष्या क्यों? हार्दिक हुंडिया ने उठाए सवाल, आइजा के 450 पत्रकारों को बताया मिसाल
समाज में प्रतिभाशाली लोगों को सहयोग देने और सकारात्मक सोच अपनाने की अपील, डॉ. प्रदीप बाफना के नेतृत्व की सराहना
दैनिक स्वराज वाणी | विशेष समाचार
जैन समाज में एकता, आपसी सहयोग, ईर्ष्या और सामाजिक नेतृत्व को लेकर वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक चिंतक हार्दिक हुंडिया ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जैन समाज धार्मिक परंपराओं, पूजा-पाठ, सामायिक, प्रतिक्रमण और संतों के प्रवचनों से जुड़ा होने के बावजूद यदि आपसी ईर्ष्या, जलन और कपट से मुक्त नहीं हो पाता, तो धार्मिक शिक्षाओं को व्यवहार में उतारने पर गंभीर आत्ममंथन की आवश्यकता है।
हार्दिक हुंडिया ने अपने 29 दिसंबर 2024 को लिखे लेख में समाज के भीतर बढ़ती प्रतिस्पर्धा, प्रतिभाशाली व्यक्तियों को पर्याप्त सहयोग नहीं मिलने और सामाजिक एकता की आवश्यकता पर विचार व्यक्त किए थे। इस लेख को एक बार फिर समाज के सामने प्रस्तुत करते हुए उन्होंने सकारात्मक बदलाव का संदेश दिया।
राजनीति और शिक्षा में आगे बढ़ने वालों को मिले समाज का सहयोग
हुंडिया ने कहा कि जब समाज का कोई योग्य व्यक्ति राजनीति या सामाजिक क्षेत्र में आगे बढ़ने का प्रयास करता है, तो उसे प्रोत्साहित करने के बजाय कई बार विरोध और असहयोग का सामना करना पड़ता है। इसी प्रकार आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को भी समाज से अपेक्षित सहायता नहीं मिल पाती।
उन्होंने समाज के सक्षम और संपन्न लोगों से अपील की कि वे केवल नाम और प्रतिष्ठा के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक जरूरतमंदों की सहायता के उद्देश्य से आगे आएं।
नेतृत्व के लिए विनम्रता, सत्य और सकारात्मक सोच जरूरी
हार्दिक हुंडिया के अनुसार समाज या राजनीति में नेतृत्व करने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति के भीतर विनम्रता, सत्यनिष्ठा और सहयोग की भावना होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ईर्ष्या, जलन और कपट की प्रवृत्ति व्यक्ति के साथ-साथ पूरे समाज की प्रगति में बाधा बनती है।
आइजा के 450 पत्रकारों की एकता को बताया प्रेरणादायक
हार्दिक हुंडिया ने ऑल इंडिया जैन जर्नलिस्ट एसोसिएशन (आइजा) का उदाहरण देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रदीप बाफना के नेतृत्व में लगभग 450 जैन पत्रकारों को एक मंच पर जोड़ना संगठनात्मक एकता की बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने विशेष रूप से चारों जैन संप्रदायों के पत्रकारों के एक साथ आने की सराहना की। उनके अनुसार यह संगठन इस बात का उदाहरण है कि सकारात्मक उद्देश्य और परस्पर सहयोग से समाज में बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।
सकारात्मक पत्रकारिता से समाज को नई दिशा देने का संदेश
हुंडिया ने आइजा परिवार के सभी पत्रकारों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाना, सत्य का साथ देना और धार्मिक तथा सामाजिक मूल्यों की रक्षा करना होना चाहिए।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि संगठन से जुड़े पत्रकार देश-विदेश में अपनी सकारात्मक पत्रकारिता और सामाजिक योगदान के माध्यम से पहचान बनाएंगे।
हार्दिक हुंडिया ने अपने संदेश का समापन समाज में एकता, पारदर्शिता, विनम्रता और आपसी सहयोग बढ़ाने की अपील के साथ किया।
