जैन समाज की एकता: शिक्षा, स्वास्थ्य और छात्रावास के लिए अंकित जैन ने रखे तीन संकल्प
दैनिक स्वराज वाणी
अंकित जैन | अखिल भारतीय जैन महासंघ
जैन समाज की एकता और संसाधनों के बेहतर उपयोग को लेकर अखिल भारतीय जैन महासंघ से जुड़े अंकित जैन ने साझा सामाजिक भवन, किफायती शिक्षण संस्थान, अस्पताल और छात्रावास विकसित करने की अपील की है। अपने विचार लेख ‘एक जैन, अनेक भवन—अब इस विभाजन को रोकने का समय है’ में उन्होंने अलग-अलग संप्रदायों के सामाजिक भवन बनाने की होड़ पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि समाज को ऐसे संस्थानों में निवेश बढ़ाना चाहिए, जिनका लाभ आने वाली पीढ़ियों को मिले। धार्मिक परंपराओं और उपासना स्थलों की अपनी व्यवस्था कायम रखते हुए सामाजिक सुविधाओं का संयुक्त उपयोग किया जा सकता है।
जैन समाज की एकता के लिए साझा सामाजिक भवन का प्रस्ताव
अंकित जैन ने अपने लेख में तेरापंथ भवन, स्थानकवासी भवन, मूर्तिपूजक उपाश्रय और दिगंबर जैन भवन का उल्लेख करते हुए कहा कि एक ही शहर में अलग-अलग भवनों में समान सुविधाएं विकसित की जाती हैं। उनके अनुसार, कई भवनों का उपयोग मुख्य रूप से चातुर्मास या विशेष कार्यक्रमों के दौरान होता है। उन्होंने इन परिसरों के नियमित और व्यापक उपयोग की आवश्यकता बताई।
उनका प्रस्ताव है कि नया सामाजिक भवन बनाने से पहले शहर के सभी जैन संप्रदायों की संयुक्त बैठक हो। बैठक में क्षेत्र की जरूरत, उपलब्ध भवनों और उनकी सुविधाओं का आकलन किया जाए। इसके बाद आवश्यकता होने पर ऐसा साझा जैन सेंटर विकसित किया जाए, जिसका उपयोग सभी संप्रदाय कर सकें।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर और स्थानक अपनी जगह बने रहें, जबकि सामाजिक कार्यक्रमों के लिए साझा परिसर की व्यवस्था पर विचार किया जाए। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग और समाज के बीच संवाद बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
आयोजनों के खर्च को शिक्षा और स्वास्थ्य की ओर मोड़ने की अपील
अंकित जैन ने विवाह, चातुर्मास और दीक्षा समारोहों में सजावट, फूलों, बैनरों तथा स्वागत जुलूसों पर होने वाले अत्यधिक खर्च को सीमित करने का सुझाव दिया। उनका कहना है कि क्षणिक उपयोग वाली व्यवस्थाओं के साथ समाज को दीर्घकालीन सुविधाओं पर भी ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने प्रस्ताव रखा कि बचाई गई राशि स्कूल, अस्पताल और छात्रावास बनाने में लगाई जाए। उनके अनुसार, शिक्षा और स्वास्थ्य में किया गया निवेश परिवारों को राहत देने के साथ बच्चों तथा युवाओं के भविष्य को मजबूत कर सकता है।
लेख में उन्होंने सेवा के माध्यम से समाज को सशक्त बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अच्छी शिक्षा, सुलभ उपचार और सुरक्षित आवास जैसी जरूरतों को पूरा करने के लिए संयुक्त प्रयास आवश्यक हैं।
जैन समाज की एकता और बेहतर भविष्य के लिए तीन संकल्प
पहला संकल्प—किफायती जैन इंटरनेशनल स्कूल:
हर बड़े शहर में ऐसे स्कूल विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है, जहां सीबीएसई पाठ्यक्रम के साथ जैन संस्कारों की शिक्षा मिले। अंकित जैन ने फीस किफायती रखने की बात कही, ताकि अधिक परिवार अपने बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिला सकें।
दूसरा संकल्प—सुपर स्पेशलिटी अस्पताल:
दक्षिण, पश्चिम और उत्तर जैसे क्षेत्रीय जोन में आधुनिक सुविधाओं वाले अस्पताल स्थापित करने का सुझाव दिया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, इन अस्पतालों में साधु-साध्वियों और श्रावकों के लिए निशुल्क उपचार की व्यवस्था विकसित की जाए।
तीसरा संकल्प—विद्यार्थियों के लिए छात्रावास:
महानगरों में पढ़ाई और व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए आने वाले जैन विद्यार्थियों हेतु छात्रावास बनाने का प्रस्ताव है। इनमें लगभग तीन हजार रुपये मासिक में रहने और भोजन की सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखने की बात कही गई है।
पांच वर्षों तक संयुक्त प्रयासों को प्राथमिकता देने का आह्वान
अंकित जैन ने अगले पांच वर्षों तक नए सामाजिक भवन बनाने की होड़ सीमित कर इन तीन क्षेत्रों में संसाधन लगाने की अपील की है। उन्होंने समाज से विचार करने को कहा कि अलग-अलग संप्रदायों के भवनों के विस्तार के साथ साझा शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों को कितनी प्राथमिकता दी जा रही है।
उनका संदेश है कि समाज की पहचान सेवा, सहयोग और पीढ़ियों के निर्माण से मजबूत हो। उन्होंने कहा कि साझा संकल्पों के माध्यम से जैन समाज की एकता को व्यावहारिक रूप दिया जा सकता है और उपलब्ध संसाधनों को भविष्य की जरूरतों से जोड़ा जा सकता है।
