जैन श्रीसंघ ने सेवानिवृत्ति पर वर्षीतप तपस्वी प्रो. डॉ. ज्ञानचंद मेहता का किया भव्य सम्मान, तपस्वियों का पाद प्रक्षालन कर की अनुमोदना
झाबुआ। स्थानीय श्री ऋषभदेव 52 जिनालय जैन श्वेतांबर श्रीसंघ द्वारा समाज के वरिष्ठ संरक्षक, शिक्षाविद् एवं वर्षीतप के तपस्वी प्रो. डॉ. ज्ञानचंद मेहता के शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त होने के अवसर पर एक गरिमामय सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। शहर के अंबा पैलेस में आयोजित इस कार्यक्रम में जैन श्वेतांबर श्रीसंघ के पदाधिकारियों, कार्यकारिणी सदस्यों, समाजजनों, शिक्षाविदों एवं विभिन्न क्षेत्रों से आए गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही। समारोह में डॉ. मेहता को शाल, श्रीफल एवं अभिनंदन-पत्र भेंट कर उनके 43 वर्षों के उत्कृष्ट शिक्षकीय योगदान और समाज सेवा का सम्मान किया गया।
इस अवसर पर मेहता परिवार द्वारा झाबुआ नगर में चल रहे सामूहिक वर्षीतप के सभी तपस्वियों का दूध से पाद प्रक्षालन कर उनका बहुमान किया गया तथा उनके बियाशने (पारण) का लाभ लेकर धार्मिक भावना एवं तपस्वियों के प्रति श्रद्धा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया गया।
43 वर्षों की निष्कलंक शैक्षणिक सेवा का सम्मान
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रो. डॉ. ज्ञानचंद मेहता के चार दशक से अधिक लंबे शैक्षणिक जीवन और समाज के प्रति उनके समर्पण का सम्मान करना था। उन्होंने अपने सेवाकाल के दौरान मध्यप्रदेश के विभिन्न शासकीय महाविद्यालयों में अध्यापन करते हुए हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान की और उनके व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि डॉ. मेहता ने हमेशा अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूर्ण ईमानदारी, अनुशासन और समर्पण के साथ किया। वे केवल एक शिक्षक ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के मार्गदर्शक, प्रेरणास्रोत और संस्कारों के संवाहक भी रहे हैं।
जैन श्रीसंघ ने किया अभिनंदन
जैन श्वेतांबर श्रीसंघ की ओर से आयोजित इस सम्मान समारोह में संघ के सभी पदाधिकारियों एवं कार्यकारिणी सदस्यों ने प्रो. डॉ. ज्ञानचंद मेहता का शाल ओढ़ाकर, श्रीफल एवं अभिनंदन-पत्र भेंट कर सम्मान किया।
संघ के अध्यक्ष संजय मेहता ने अभिनंदन-पत्र का वाचन करते हुए डॉ. मेहता के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डॉ. मेहता ने शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में जो योगदान दिया है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। उनके जीवन की सादगी, अनुशासन और सेवा भावना प्रत्येक व्यक्ति के लिए अनुकरणीय है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश छाजेड़ ने भी किया सम्मानित
समारोह में अखिल भारतीय श्री राजेंद्र जैन नवयुवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश छाजेड़ (पारा) विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने परिषद की ओर से भी अभिनंदन-पत्र भेंट कर प्रो. डॉ. ज्ञानचंद मेहता का सम्मान किया।
उन्होंने कहा कि डॉ. मेहता जैसे शिक्षाविद् समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने अपने पूरे सेवाकाल में शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी निभाई। उनका जीवन युवा पीढ़ी को सदैव प्रेरित करता रहेगा।
43 वर्षों तक विभिन्न महाविद्यालयों में दी उल्लेखनीय सेवाएं
कार्यक्रम में डॉ. प्रदीप संघवी ने प्रो. डॉ. ज्ञानचंद मेहता के सेवाकाल पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने लगभग 43 वर्षों तक मध्यप्रदेश के विभिन्न शासकीय महाविद्यालयों में अपनी सेवाएं दीं।
उन्होंने अपने शिक्षकीय जीवन की शुरुआत खाचरोद से की तथा इसके बाद आलीराजपुर, थांदला और झाबुआ के महाविद्यालयों में प्राध्यापक के रूप में कार्य किया। अपनी प्रशासनिक दक्षता और नेतृत्व क्षमता के कारण वे थांदला कॉलेज के प्राचार्य भी रहे।
डॉ. संघवी ने कहा कि डॉ. मेहता समय के अत्यंत पाबंद, अनुशासित और कर्मनिष्ठ अधिकारी रहे हैं। उन्होंने अपने ज्ञान, अनुभव और सकारात्मक सोच से सैकड़ों विद्यार्थियों का भविष्य संवारा। उनके कई विद्यार्थी आज शिक्षा, प्रशासन, व्यवसाय और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय सेवाएं दे रहे हैं।
विद्यार्थियों और सहयोगियों ने साझा किए संस्मरण
सम्मान समारोह के दौरान डॉ. मेहता के सहयोगियों, पूर्व सहकर्मियों और विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए। सभी वक्ताओं ने उनके सरल स्वभाव, सहज व्यवहार, कार्य के प्रति समर्पण और विद्यार्थियों के प्रति स्नेहपूर्ण दृष्टिकोण की सराहना की।
इस अवसर पर झाबुआ कॉलेज के प्रो. सुरेश जैन, डॉ. अंजना मुवेल, प्रो. पी.के. जैन (राजगढ़), प्रो. नटवरलाल गुप्ता (बड़वानी), प्रो. सुभधा भोसले (इंदौर), चेतना सराफ (बदनावर), डॉ. सृष्टि छाजेड़ (दाहोद) तथा प्रो. शहनाज खान (रतलाम) सहित कई शिक्षाविदों ने अपने संस्मरण सुनाए।
वक्ताओं ने बताया कि डॉ. मेहता हमेशा विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रखते थे, बल्कि उन्हें जीवन मूल्यों, नैतिकता, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति भी जागरूक करते थे। यही कारण है कि उनके छात्र आज भी उन्हें सम्मान और आदर के साथ याद करते हैं।
वर्षीतप के तपस्वी के रूप में भी प्रेरणादायी व्यक्तित्व
प्रो. डॉ. ज्ञानचंद मेहता केवल शिक्षा जगत में ही नहीं, बल्कि धार्मिक क्षेत्र में भी अपनी विशेष पहचान रखते हैं। वे वर्तमान में वर्षीतप जैसी कठिन एवं महान तपस्या का पालन कर रहे हैं।
जैन धर्म में वर्षीतप को अत्यंत महत्वपूर्ण तप माना जाता है, जिसमें साधक एक वर्ष तक विशेष नियमों के साथ वैकल्पिक उपवास और संयम का पालन करता है। इस तपस्या के माध्यम से आत्मशुद्धि, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का संदेश मिलता है।
समारोह में उपस्थित समाजजनों ने डॉ. मेहता की धार्मिक निष्ठा और तपस्या की भी मुक्तकंठ से प्रशंसा की।
मेहता परिवार ने तपस्वियों का किया पाद प्रक्षालन
कार्यक्रम का एक अत्यंत भावनात्मक और धार्मिक पक्ष तब देखने को मिला, जब मेहता परिवार के सदस्यों ने झाबुआ नगर में चल रहे सामूहिक वर्षीतप के सभी तपस्वियों का दूध से पाद प्रक्षालन कर उनका सम्मान किया।
जैन परंपरा में तपस्वियों का पाद प्रक्षालन श्रद्धा, विनम्रता और तप के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जाता है। मेहता परिवार ने सभी तपस्वियों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए उनके बियाशने (पारण) का लाभ भी लिया।
इस अवसर पर समाजजनों ने कहा कि तपस्वियों के प्रति सम्मान और सेवा का यह कार्य समाज में धार्मिक संस्कारों को सुदृढ़ करने वाला है।
समाज ने दी उज्ज्वल एवं स्वस्थ जीवन की शुभकामनाएं
समारोह के अंत में सभी उपस्थितजनों ने प्रो. डॉ. ज्ञानचंद मेहता के स्वस्थ, सुखमय एवं सक्रिय जीवन की मंगलकामनाएं व्यक्त कीं। वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि सेवानिवृत्ति के बाद भी वे समाज, शिक्षा और धार्मिक गतिविधियों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाते रहेंगे तथा अपने अनुभवों से नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करते रहेंगे।
समाज के वरिष्ठजनों ने कहा कि सेवानिवृत्ति किसी व्यक्ति के कार्य का अंत नहीं, बल्कि जीवन के नए अध्याय की शुरुआत होती है। डॉ. मेहता का अनुभव, ज्ञान और सामाजिक सक्रियता आने वाले समय में भी समाज के लिए अमूल्य सिद्ध होगी।
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में जैन श्वेतांबर श्रीसंघ के वरिष्ठ सदस्य एवं पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से निर्मल मेहता, प्रदीप रूनवाल, मितेश गादिया, मनोहर छाजेड़, प्रकाश कटारिया, अंतिम जैन, रमेश छाजेड़, वीरेंद्र सकलेचा, भारत बाबेल, अनिल रूनवाल, राजेश मेहता, उपाध्यक्ष तेजप्रकाश कोठारी, अनिल राठौर, मुकेश रूनवाल, नरेंद्र संघवी, मुकेश लोढ़ा, उपव्यवस्थापक जयेश संघवी, रचित कटारिया, सचिन रत्नदीप सकलेचा, कोषाध्यक्ष उल्लास जैन, प्रवक्ता संजय जगावत, सहसचिव निशान शाह, अंकित छाजेड़, अंकित कटारिया, हेमेंद्र संघवी, अमित मेहता, रवि राठौर, प्रतीक मोदी, प्रतीक मुथा, अंकित रूनवाल सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
समर्पण, संस्कार और सेवा का प्रेरक समारोह
यह सम्मान समारोह केवल एक सेवानिवृत्त शिक्षक के सम्मान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा, समाज सेवा, धार्मिक आस्था और तप के प्रति सम्मान का सुंदर संगम बन गया। प्रो. डॉ. ज्ञानचंद मेहता के व्यक्तित्व ने यह संदेश दिया कि एक शिक्षक का वास्तविक योगदान केवल कक्षा तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह समाज और आने वाली पीढ़ियों के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
जैन श्वेतांबर श्रीसंघ द्वारा आयोजित यह आयोजन समाज में गुरुजनों, शिक्षकों और तपस्वियों के प्रति सम्मान की परंपरा को मजबूत करने वाला प्रेरणादायी समारोह सिद्ध हुआ।
