जगदीश देवड़ा बने ‘हथियार’: नाराज़ दिग्गज नेताओं ने उन्हीं के जरिए CM मोहन यादव पर साधा निशाना
MP Politics: BJP की अंदरूनी खींचतान कैबिनेट मीटिंग में खुलकर सतह पर, शिवराज की शह के आरोप भी तेज
भोपाल, विशेष प्रतिनिधि।
मध्य प्रदेश की राजनीति में पिछले एक वर्ष से दबे हुए सत्ता–समीकरण अब खुले मंच पर टकराते नज़र आने लगे हैं। मोहन यादव सरकार के गठन के बाद से जिन अंदरूनी तनावों की आशंका जताई जा रही थी, बुधवार की कैबिनेट मीटिंग ने उन आशंकाओं पर मुहर लगा दी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि निशाना मुख्यमंत्री मोहन यादव पर था, लेकिन वार किया गया उपमुख्यमंत्री व वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा पर—यानी देवड़ा विपक्ष नहीं, बल्कि पार्टी के ही वरिष्ठ नेताओं के हमलों का माध्यम बने।
CM पद से वंचित तीन दिग्गजों की महत्वाकांक्षा फिर सतह पर
2023 के विधानसभा चुनाव के बाद जब BJP ने प्रचंड बहुमत हासिल किया, तब मुख्यमंत्री पद के लिए तीन बड़े नाम सबसे आगे बताए जा रहे थे—
- नरेंद्र सिंह तोमर
- प्रहलाद पटेल
- कैलाश विजयवर्गीय
मीडिया हो या राजनीतिक विश्लेषक—सभी का मानना था कि इनमें से कोई एक नेता प्रदेश की कमान संभालेगा। लेकिन अंतिम समय में BJP हाईकमान ने चौंकाने वाला निर्णय लेते हुए डॉ. मोहन यादव को मुख्यमंत्री बना दिया। यह निर्णय पार्टी के भीतर कई दिग्गजों की महत्वाकांक्षा पर सीधा प्रहार था।
- विजयवर्गीय और पटेल को मंत्रिमंडल में जगह मिली,
- तोमर को विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया।
परंतु नाराज़गी की आग पूरी तरह शांत नहीं हुई। इसी दबे असंतोष ने अब कैबिनेट मीटिंग में अपना पहला “सार्वजनिक रूप” दिखा दिया।
कैबिनेट मीटिंग में पहला बड़ा ‘विस्फोट’ — GST बहाना, निशाना CM मोहन यादव?
बुधवार की कैबिनेट मीटिंग में GST संग्रह में गिरावट का मुद्दा उठा।
यही वह क्षण था जब कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल ने अप्रत्यक्ष रूप से CM मोहन यादव पर दबाव बनाने की कोशिश की।
उन्होंने सीधा हमला वित्त विभाग और उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा पर बोला।
यह सबके लिए स्पष्ट था कि—
तीर देवड़ा पर छोड़ा गया, लेकिन लक्ष्य मोहन यादव थे।
देवड़ा की छवि हमेशा से
- शांत,
- सरल,
- विवादों से दूर
मानी जाती रही है।
ऐसे नेता पर अचानक प्रहार होना दर्शाता है कि यह सिर्फ GST का मुद्दा नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश था।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि कैबिनेट में उठा यह विवाद BJP के भीतर गहरे बैठे असंतोष का पहला सार्वजनिक संकेत है।
विजयवर्गीय–पटेल की ‘नाराज़गी’ और बदले समीकरण
ध्यान देने वाली बात यह है कि यही दोनों नेता—कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल—कभी शिवराज सिंह चौहान की बढ़ती लोकप्रियता से असहज रहे थे।
- विजयवर्गीय कई बार शिवराज पर तंज कस चुके हैं,
- पटेल भी शिवराज के बढ़ते प्रभुत्व से दूरी बनाए रखते थे।
लेकिन राजनीति परिस्थितियों पर पलटती है—
आज विश्लेषकों का बड़ा वर्ग कह रहा है कि इन दोनों नेताओं की मौजूदा नाराज़गी के पीछे शिवराज सिंह चौहान की ‘मौन सहमति’ हो सकती है।
यह दावा इसलिए भी किया जा रहा है क्योंकि
- शिवराज अब केंद्र में अधिक सक्रिय हैं,
- प्रदेश में उनकी पकड़ मजबूत है,
- और समर्थक भी बड़ी संख्या में उनके साथ खड़े माने जाते हैं।
यदि ऐसा है, तो यह विवाद मात्र GST की बहस नहीं बल्कि भविष्य के शक्ति–संतुलन की लड़ाई है।
जगदीश देवड़ा क्यों चुने गए ‘हमले का माध्यम’?
विश्लेषकों का मानना है कि
देवड़ा पर हमला करना तीन बड़े कारणों से आसान और रणनीतिक था—
1. देवड़ा CM मोहन यादव के सबसे विश्वसनीय मंत्री माने जाते हैं
उन पर निशाना साधकर सीधे–सीधे CM की छवि को चुनौती दी जा सकती थी।
2. उनकी गैर–विवादित छवि उन्हें ‘soft target’ बनाती है
उन्हें पलटवार करते नहीं देखा जाता, इसलिए उन पर हमला सुरक्षित विकल्प होता है।
3. वित्त विभाग पर सवाल = सरकार की ‘कार्यक्षमता’ पर सवाल
GST संग्रह पर हमला कर असंतुष्ट नेता सीधे–सीधे यह संदेश देना चाहते थे कि
“मोहन यादव सरकार, वित्तीय प्रबंधन में कमजोर है।”
कांग्रेस ने मौके का पूरा लाभ उठाया
विपक्ष कैसे पीछे रहता?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने तुरंत बयान जारी किया—
“BJP के कुछ मंत्री, शिवराज सिंह चौहान की शह पर मोहन यादव सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि यह कैबिनेट विवाद
- BJP की अंदरूनी लड़ाई,
- नेतृत्व संघर्ष,
- और सत्ता के लिए खींचतान
का खुला प्रमाण है।
कांग्रेस अब इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाकर
BJP की एकजुटता पर चोट करना चाहती है।
क्या यह सिर्फ शुरुआत है? आने वाले समय में और बड़े धमाके संभव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ “पहला वेंटिलेशन” है।
नीचे रखी आग अभी और भड़क सकती है।
आगे क्या हो सकता है?
1. संगठनात्मक फेरबदल की मांग
नाराज़ नेता आने वाले महीनों में नेतृत्व से बदलाव और हिस्सेदारी की मांग बढ़ा सकते हैं।
2. CM मोहन यादव पर बढ़ता दबाव
देवड़ा के मुद्दे को बहाना बनाकर CM पर सीधा दबाव बनाया जा सकता है।
3. किसी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की आशंका
यह विवाद यदि बढ़ता है, तो BJP नेतृत्व को मध्य प्रदेश में बड़े बदलाओं के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
मोहन यादव सरकार की चुनौती—विकास या भीतर की राजनीति?
CM मोहन यादव ने अब तक
- शांत,
- धरातल पर काम करने वाले,
- बिना विवाद वाले नेता की छवि बनाई है।
लेकिन अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है—
सरकार चलाने से ज्यादा, सरकार को स्थिर रखना।
क्योंकि यदि वरिष्ठ नेताओं का असंतोष आगे बढ़ा, तो
- नीतियाँ प्रभावित होंगी,
- कैबिनेट की एकजुटता टूटेगी,
- और सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे।
निष्कर्ष: मध्य प्रदेश की राजनीति में ‘भीतर की लड़ाई’ अब खुले मंच पर
GST बहस के बहाने शुरू हुआ यह विवाद अब एक सामान्य प्रशासनिक मुद्दा नहीं रहा।
यह साफ दिखाता है कि—
BJP की अंदरूनी राजनीति में बड़ा उबाल है।
जगदीश देवड़ा सिर्फ माध्यम बने—लक्ष्य कोई और था।
और आने वाले महीनों में यह ‘भीतर की लड़ाई’
मध्य प्रदेश की राजनीति के तापमान को और गर्म करेगी।
