Jabalpur Rishwat Case: CMHO ऑफिस का बाबू 20 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, EOW ने 2 किमी पीछा कर दबोचा
मध्यप्रदेश (MP) के जबलपुर से एक बड़ा रिश्वत कांड सामने आया है, जिसने पूरे स्वास्थ्य विभाग और जिला अस्पताल प्रशासन पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। CMHO ऑफिस में पदस्थ एक बाबू आकाश गुप्ता को EOW (Economic Offences Wing) जबलपुर टीम ने 20 हजार रुपए की घूस लेते रंगे हाथ पकड़ा। आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए टीम को उसकी कार का करीब 2 किलोमीटर तक पीछा करना पड़ा, जिसके बाद यह गिरफ्तारी एक फिल्मी अंदाज में संभव हो सकी।
इस पूरे Jabalpur Rishwat Case की कार्रवाई ने फिर साबित कर दिया है कि स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं और कैसे आम नागरिकों और मेडिकल संस्थानों को छोटे–छोटे कामों के लिए भी रिश्वतखोरी का सामना करना पड़ता है।
कैसे हुआ खुलासा? चलती कार में ली घूस — EOW टीम रही पीछे-पीछे
शिकायत के अनुसार, जिला अस्पताल स्थित CMHO ऑफिस में पदस्थ लिपिक आकाश गुप्ता ने एक निजी MS पैथोलॉजी की जांच रिपोर्ट को रोकने के नाम पर 60 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी।
इस रिश्वतखोरी से परेशान होकर पैथोलॉजी संचालक मनोज श्रीवास्तव ने EOW जबलपुर से शिकायत दर्ज कराई। शिकायत की सत्यता की जांच के बाद EOW ने एक ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई।
शिकायतकर्ता को तय स्थान पर आरोपित से पैसे देने भेजा गया।
सूत्रों के अनुसार:
- आरोपी बाबू अपनी कार में बैठकर शिकायतकर्ता से मिला।
- चलती गाड़ी में ही उससे 20 हजार रुपए की पहली किस्त लिए।
- पैसे लेने के बाद उसने गाड़ी तेजी से दौड़ा दी और इधर-उधर घूमाकर EOW टीम को चकमा देने की कोशिश की।
लेकिन EOW टीम लगातार पीछा करती रही, और करीब दो किमी तक फिल्मी अंदाज में पीछा करने के बाद आरोपी को दबोच लिया।
यह फिल्मी पीछा अब Jabalpur EOW Team Action के रूप में सोशल मीडिया पर भी चर्चा में है।
20 हजार की रिश्वत लेते ही हाथों पर लग गया रंग — तुरंत हुई गिरफ्तारी
EOW की टीम पहले से तैयार थी और जैसे ही शिकायतकर्ता ने तय संकेत दिया, टीम ने आरोपी बाबू को घेर लिया।
आरोपी के हाथों तथा गाड़ी से रंग्त्वक पाउडर (Phenolphthalein Powder) के स्पष्ट निशान मिले, जिससे यह साबित हो गया कि उसने रिश्वत की रकम छुई थी।
इसके बाद आकाश गुप्ता को मौके पर ही रंगे हाथ गिरफ्तार (Caught Red Handed) कर लिया गया।
यह आरोप साबित करते हैं कि:
- पैसों का लेन–देन कार में हुआ
- आरोपी ने बचने की कोशिश की
- लेकिन EOW की पकड़ से निकल पाना आसान नहीं था
क्यों मांगी गई थी 60 हजार की रिश्वत? MS पैथोलॉजी की रिपोर्ट रोकने का दबाव
CMHO ऑफिस से जुड़े कई काम और फाइलिंग प्रक्रियाएं अक्सर लिपिकों के माध्यम से ही होती हैं। इसी कड़ी में आरोपी बाबू आकाश गुप्ता पर यह आरोप है कि:
- वह MS पैथोलॉजी की जांच रिपोर्ट रोक रहा था
- जांच आगे बढ़ाने के लिए उसने 60,000 रुपए की डिमांड की
- इसी रिश्वत का पहला 20,000 का किश्त लेते वह पकड़ा गया
शिकायतकर्ता के अनुसार, बिना पैसे दिए अधिकारी और बाबू फाइल आगे नहीं बढ़ने देते। यह मामला प्रमाण है कि स्वास्थ्य विभाग कार्यालयों में भ्रष्टाचार खुलकर चल रहा है।
CMHO ऑफिस में भ्रष्टाचार? पहले भी आए हैं ऐसे मामले
Jabalpur Rishwat Case ने एक बार फिर सवाल उठाए हैं कि क्या स्वास्थ्य विभाग के प्रशासनिक स्टाफ पर नजर रखने की जरूरत बढ़ गई है?
इससे पहले भी कई जिलों में:
- दवा खरीद
- पैथोलॉजी जांच
- मेडिकल स्टोर लाइसेंस
- हॉस्पिटल इम्पेनलमेंट
- स्वास्थ्य कार्ड सेटलमेंट
जैसे मामलों में रिश्वत की शिकायतें आती रही हैं।
सवाल यह है कि क्या सरकार इस पर कोई कड़ी कार्रवाई करेगी?
EOW की बड़ी कार्रवाई — देर रात तक चली पूछताछ
EOW की टीम ने आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसके कार्यालय और निजी दस्तावेजों की भी जांच शुरू कर दी है।
देर रात तक:
- आरोपी बाबू से पूछताछ
- रिश्वत के नोट की बरामदगी
- रंग परीक्षण (Color Test)
- बयान की रिकॉर्डिंग
- इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणों का एकत्रीकरण
जारी रहा।
सूत्रों के अनुसार, EOW यह जांच भी कर रही है कि क्या इसमें और कोई कर्मचारी भी शामिल था।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
- यह जबलपुर जिला अस्पताल रिश्वत मामला सीधे स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करता है।
- CMHO ऑफिस वह जगह है जहां से जांच रिपोर्ट, सर्टिफिकेट, लाइसेंस और प्रशासनिक अनुमतियाँ जारी होती हैं।
- ऐसे ऑफिस में रिश्वतखोरी आम जनता के अधिकारों पर सीधा हमला है।
इससे यह भी पता चलता है कि:
- पैथोलॉजी संचालक छोटे–छोटे कामों के लिए दबाव में रहते हैं
- फ़ाइल पास करवाने के नाम पर लाखों रुपये वसूले जाते हैं
- सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की तत्काल जरूरत है
निष्कर्ष: Jabalpur Rishwat Case ने खोली भ्रष्टाचार की परतें
Jabalpur Rishwat Case में CMHO ऑफिस के बाबू की गिरफ्तारी ने यह साफ कर दिया कि प्रशासनिक स्तर पर भ्रष्टाचार कितना मजबूत हो चुका है।
EOW की तेज कार्रवाई, लगातार पीछा, और फिल्मी अंदाज में हुई गिरफ्तारी यह बताती है कि भ्रष्टाचार में शामिल कोई भी व्यक्ति कानून से नहीं बच सकता।
अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि:
- क्या आरोपी पर सख्त कार्रवाई होगी?
- क्या स्वास्थ्य विभाग में व्यापक जांच शुरू होगी?
- क्या और लोगों के नाम सामने आएंगे?
यह मामला निश्चित रूप से MP भ्रष्टाचार मामलों की सूची में एक बड़ा और चर्चित केस बन चुका है।
