Jabalpur Jain समाज का ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायक निर्णय
धर्म, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों की रक्षा की दिशा में सशक्त पहल
संस्कारधानी Jabalpur की पावन धरा पर Jain समाज द्वारा एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरदर्शी सामाजिक निर्णय लिया गया है, जो न केवल स्थानीय समाज के लिए बल्कि समस्त भारत वर्षीय जैन समाज के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध होगा। यह निर्णय धर्म, संस्कृति, परंपरा और सात्विक जीवन मूल्यों की रक्षा के उद्देश्य से लिया गया है। समाज के वरिष्ठ धर्मप्रचारक राजेश जैन दद्दू (इंदौर) ने जानकारी देते हुए बताया कि इस ऐतिहासिक पहल का मुख्य उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों में धार्मिक चेतना, मर्यादा और शुद्ध आचार-विचार को सुदृढ़ करना है।
इस अवसर पर संस्कारधानी में विराजमान परम पूज्य गुणायतन प्रेरक मुनि श्री 108 प्रमाण सागर जी महामुनिराज ने अपनी मंगल देशना में समाजजनों को धर्म और संस्कृति की सुरक्षा हेतु जागरूक किया। उन्होंने अपने प्रेरक प्रवचनों के माध्यम से समाज को यह संदेश दिया कि यदि हम अपने धार्मिक सिद्धांतों और परंपराओं के प्रति सजग रहेंगे, तभी समाज की मूल पहचान सुरक्षित रह सकेगी। मुनिश्री ने समाज को संकल्प दिलाया कि वे अपने सामाजिक और वैवाहिक आयोजनों में ऐसे निर्णयों का पालन करेंगे जो जैन धर्म की अहिंसा, सात्विकता और मर्यादा के अनुरूप हों।
श्री दिगंबर Jain पंचायत सभा का महत्वपूर्ण प्रस्ताव
मुनिश्री की प्रेरणा एवं सानिध्य में श्री दिगंबर जैन पंचायत सभा, जबलपुर द्वारा एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। यह प्रस्ताव जैन समाज के वैवाहिक एवं पारिवारिक आयोजनों को अधिक सात्विक, मर्यादित और धर्मानुकूल बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। इस प्रस्ताव के अंतर्गत निम्नलिखित प्रमुख निर्णय लिए गए हैं:
1. मल्टी कुज़ीन होटलों में आयोजन पर प्रतिबंध
समाज ने यह निर्णय लिया है कि जिन स्थानों पर मांसाहारी एवं शाकाहारी भोजन एक ही परिसर में तैयार किया जाता हो—चाहे उनकी रसोई अलग-अलग हो या भवन अलग-अलग हों—ऐसे मल्टी कुज़ीन होटल या परिसर में जैन समाज के वैवाहिक एवं पारिवारिक आयोजन नहीं किए जाएंगे।
जैन धर्म का मूल सिद्धांत अहिंसा है, और मांसाहार पूर्णतः वर्जित है। इसलिए ऐसे स्थानों का चयन करना, जहाँ मांसाहार का निर्माण या परोसा जाता हो, जैन धर्म की भावना के विपरीत माना गया है। समाज ने यह स्पष्ट किया है कि धार्मिक मूल्यों से समझौता किए बिना ही सामाजिक कार्यक्रम संपन्न किए जाने चाहिए।
2. रात्रिकालीन विवाह एवं भोज पर रोक
दूसरा महत्वपूर्ण निर्णय यह लिया गया कि संपूर्ण वैवाहिक कार्यक्रम दिन के समय ही संपन्न किए जाएंगे। सूर्यास्त के पश्चात किसी भी प्रकार का भोज या वैवाहिक रस्में आयोजित नहीं की जाएंगी।
जैन परंपरा में रात्रि भोजन वर्जित माना गया है और सूर्यास्त के पश्चात संयमित आहार-विहार का विशेष महत्व है। इसी परंपरा को ध्यान में रखते हुए समाज ने यह निर्णय लिया है कि विवाह जैसे पवित्र संस्कार को भी दिन में ही संपन्न किया जाए, ताकि वह पूर्णतः धार्मिक मर्यादाओं के अनुरूप हो।
3. महिला संगीत के स्थान पर भक्ति या पारंपरिक कार्यक्रम
वर्तमान समय में विवाह समारोहों में महिला संगीत के नाम पर आधुनिकता और दिखावे का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए समाज ने यह निर्णय लिया है कि महिला संगीत के स्थान पर भक्ति संगीत या पारंपरिक लोकगीतों का आयोजन किया जाएगा।
इससे विवाह समारोह का वातावरण अधिक धार्मिक, सांस्कृतिक और गरिमामय बनेगा। भक्ति संगीत से जहाँ आध्यात्मिक वातावरण निर्मित होगा, वहीं पारंपरिक गीतों से हमारी सांस्कृतिक धरोहर भी सुरक्षित रहेगी।
4. कोरियोग्राफर आमंत्रित नहीं किए जाएंगे
समाज ने यह भी स्पष्ट किया है कि महिला संगीत या अन्य कार्यक्रमों के लिए कोरियोग्राफर को आमंत्रित नहीं किया जाएगा। विवाह एक पवित्र संस्कार है, जिसे सादगी और मर्यादा के साथ संपन्न किया जाना चाहिए। अनावश्यक दिखावा, भव्यता और आधुनिक प्रदर्शन से दूर रहकर धार्मिक एवं पारिवारिक मूल्यों को प्राथमिकता देना ही इस निर्णय का उद्देश्य है।
5. प्रमाणित पूर्ण शाकाहारी परिसरों में ही आयोजन
समाज ने यह भी तय किया है कि वैवाहिक एवं अन्य सामाजिक आयोजन केवल उन्हीं परिसरों में किए जाएंगे जिन्हें श्री दिगंबर जैन पंचायत सभा द्वारा पूर्ण शाकाहारी होने का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया हो।
समाजजनों से यह भी आग्रह किया गया है कि वे विवाह स्थल का चयन करते समय यह सुनिश्चित करें कि संबंधित परिसर को पंचायत सभा से प्रमाणित शुद्ध शाकाहारी दर्जा प्राप्त हो। इस प्रकार समाज अपने आयोजनों की शुद्धता और सात्विकता को सुनिश्चित करेगा।
विशेष घोषणा
स्पष्ट रूप से यह निर्णय लिया गया है कि रात्रिकालीन विवाह तथा मल्टी कुज़ीन परिसरों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में जैन समाज सम्मिलित नहीं होगा। यह निर्णय समाज की एकता, अनुशासन और धार्मिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
समाज के लिए प्रेरणा
यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक प्रस्ताव नहीं, बल्कि धार्मिक जागरण का प्रतीक है। जबलपुर जैन समाज ने यह सिद्ध किया है कि यदि समाज संगठित होकर ठोस संकल्प ले, तो वह अपनी संस्कृति और परंपराओं की रक्षा प्रभावी रूप से कर सकता है। यह पहल अन्य नगरों और प्रांतों के लिए भी प्रेरणा का कार्य करेगी।
आज के समय में जहाँ आधुनिकता के नाम पर परंपराएँ कमजोर पड़ती जा रही हैं, वहीं यह निर्णय समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करेगा। यह आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देगा कि धर्म और संस्कृति से बढ़कर कुछ भी नहीं है।
निष्कर्ष
श्री दिगंबर Jain पंचायत सभा एवं सकल Jain समाज, जबलपुर द्वारा लिया गया यह ऐतिहासिक निर्णय समाज की धार्मिक निष्ठा, संगठन शक्ति और सांस्कृतिक जागरूकता का प्रमाण है। परम पूज्य मुनि श्री 108 प्रमाण सागर जी महामुनिराज के मार्गदर्शन में लिया गया यह संकल्प जैन समाज के लिए एक आदर्श स्थापित करता है।
यह पहल निश्चित रूप से भारत वर्षीय Jain समाज के लिए प्रेरणादायक सिद्ध होगी और धर्म, संस्कृति तथा अहिंसा के मूल्यों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
संवाददाता : राजेश जैन दद्दू
