Jabalpur में दर्दनाक हिट एंड रन हादसा: महिला मजदूरों की मौत से उबाल, गांव में पसरा मातम, सीएम मोहन यादव ने मुआवजे का किया एलान
मध्य प्रदेश के Jabalpur जिले में रविवार को हुआ दर्दनाक हिट एंड रन हादसा अब पूरे क्षेत्र में आक्रोश और शोक का कारण बन गया है। बरेला थाना क्षेत्र में हुए इस हादसे में जान गंवाने वाली पांच महिला मजदूरों की मौत की खबर जब मंडला जिले के बीजाडांडी विकासखंड स्थित बम्होरी गांव पहुंची, तो वहां का माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया। सोमवार देर रात जब मृतक महिलाओं के पार्थिव शरीर गांव लाए गए, तो परिजनों की चीख-पुकार से पूरा गांव दहल उठा। गांव में पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाजों के अनुसार महिलाओं का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान गांव के हर घर में मातम पसरा रहा। महिलाएं अपने आंसू नहीं रोक सकीं और बुजुर्गों की आंखें भी नम हो गईं। गांव के लोग स्तब्ध थे कि रोजी-रोटी कमाने निकली महिलाएं इस तरह कभी वापस नहीं लौटेंगी।
हादसे से गांव में आक्रोश, सड़क पर उतरे ग्रामीण
घटना की सूचना फैलते ही Jabalpur के बम्होरी गांव और आसपास के इलाकों में गम के साथ-साथ गुस्से की लहर दौड़ गई। सोमवार को मृतक महिलाओं के परिजन और बड़ी संख्या में ग्रामीण इंसाफ की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने लालीपुर के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्काजाम कर दिया, जिससे घंटों तक यातायात पूरी तरह ठप रहा। राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों और पीड़ित परिवारों की मांग थी कि हादसे के लिए जिम्मेदार वाहन चालक को तत्काल गिरफ्तार किया जाए, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो और मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। प्रदर्शन के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की गई।
Jabalpur में पुलिस और प्रशासन ने संभाले हालात
Jabalpur स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग तुरंत हरकत में आया। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उन्हें शांत करने का प्रयास किया। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि आरोपी चालक की तलाश तेजी से की जा रही है और दोषी को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। अधिकारियों के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने सड़क जाम हटाया, जिससे यातायात धीरे-धीरे बहाल हो सका। एहतियातन गांव और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
मुख्यमंत्री ने जताया दुख, मुआवजे का एलान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने Jabalpur इस हादसे को बेहद दुखद और हृदयविदारक बताया। उन्होंने मृतक महिला मजदूरों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और इस त्रासदी को प्रदेश के लिए बड़ी क्षति बताया। मुख्यमंत्री ने तत्काल प्रभाव से आर्थिक सहायता की घोषणा करते हुए कहा कि राज्य सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री द्वारा घोषित मुआवजे के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वाली प्रत्येक महिला मजदूर के परिवार को चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। इसके अलावा, गंभीर रूप से घायल श्रमिकों को एक लाख रुपये और सामान्य रूप से घायल लोगों को पचास हजार रुपये की आर्थिक मदद प्रदान की जाएगी।
कार्य एजेंसी को भी सहायता के निर्देश
मुख्यमंत्री ने केवल सरकारी सहायता तक ही बात सीमित नहीं रखी, बल्कि संबंधित कार्य एजेंसी को भी निर्देश दिए कि वह मृतकों और घायलों को अलग से मुआवजा प्रदान करे। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, कार्य एजेंसी द्वारा मृत महिला मजदूरों के परिजनों को छह-छह लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को एक लाख रुपये और सामान्य घायलों को पचास हजार रुपये की राशि दी जाएगी।
गरीब मजदूर परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
Jabalpur के इस हादसे ने उन परिवारों की कमर तोड़ दी है, जिनकी महिलाएं मजदूरी कर घर का खर्च चला रही थीं। गांव के लोगों का कहना है कि ये महिलाएं रोज की तरह काम पर निकली थीं, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि यह उनका आखिरी सफर साबित होगा। परिवारों के सामने अब रोजी-रोटी का संकट भी खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने सरकार से केवल मुआवजा ही नहीं, बल्कि पीड़ित परिवारों के पुनर्वास और रोजगार की भी मांग की है। उनका कहना है कि मृतक महिलाओं के बच्चों और परिजनों के लिए स्थायी समाधान जरूरी है।
जांच तेज, आरोपी की तलाश जारी
Jabalpur के पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हिट एंड रन मामले की जांच तेजी से की जा रही है। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और संदिग्ध वाहन की पहचान की जा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही आरोपी चालक को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
पूरे इलाके में शोक का माहौल
इस हादसे के बाद Jabalpur से लेकर मंडला जिले तक शोक और आक्रोश का माहौल बना हुआ है। लोग लगातार पीड़ित परिवारों के घर पहुंचकर उन्हें ढांढस बंधा रहे हैं। यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और मजदूरों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर गया है। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि अगर समय रहते सख्त कदम उठाए जाएं, तो भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सकता है।
