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Bhopal निगमायुक्त संस्कृति जैन को सजा पर रोक, Jabalpur हाईकोर्ट की युगलपीठ ने सिंगल बेंच के आदेश को रोका

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Published On: 6 February 2026
Jabalpur High Court Puts Stay on Punishment for Bhopal Municipal Commissioner Sanskriti Jain; Single Bench Hearing Postponed
— Jabalpur High Court Puts Stay on Punishment for Bhopal Municipal Commissioner Sanskriti Jain; Single Bench Hearing Postponed

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Jabalpur हाईकोर्ट ने Bhopal निगमायुक्त संस्कृति जैन की सजा पर लगाई रोक

Bhopal नगर निगम की आयुक्त संस्कृति जैन को सजा देने के मामले में Jabalpur हाईकोर्ट की युगलपीठ ने रोक लगा दी है। यह मामला उस आदेश से जुड़ा है जिसमें जस्टिस विशाल मिश्रा की सिंगल बेंच ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना करने के आरोप में दोषी ठहराया था।

निगमायुक्त संस्कृति जैन को पहले सिंगल बेंच में सजा सुनवाई के लिए उपस्थित होने को कहा गया था। इसके बावजूद उन्होंने युगलपीठ में आवेदन दायर कर सजा पर रोक की मांग की, जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया। इससे स्पष्ट होता है कि निगमायुक्त ने सजा से बचाव के लिए कोर्ट की डबल बेंच में अपनी याचिका लगाई, जिससे सुनवाई फिलहाल स्थगित हो गई है।

याचिका का विवरण

मामला मर्लिन बिल्डकान प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि नगर निगम ने 18 नवंबर, 2025 को उनकी संपत्ति का सामने का हिस्सा नियमानुसार प्रक्रिया अपनाए बिना तोड़ दिया। निगम ने इसका जवाब दिया कि निर्माण अवैध था, और पहले ही अनुमति 7 नवंबर, 2024 को निरस्त की जा चुकी थी। इसके बाद 14 मई, 2025 को नोटिस जारी किया गया और कार्रवाई की गई।

याचिकाकर्ता का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया और संपत्ति के मालिक को नैसर्गिक न्याय सिद्धांत के तहत सुनवाई का अवसर नहीं मिला। सीधे संपत्ति को तोड़ देना अवैध है और इससे उनके अधिकारों का हनन हुआ।

सिंगल बेंच का फैसला

गुरुवार को जस्टिस विशाल मिश्रा की सिंगल बेंच ने देखा कि नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट की 2025 में जारी गाइडलाइन का पालन नहीं किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया, सुनवाई की कोई कार्यवाही दर्ज नहीं की गई और न ही कोई अंतिम आदेश पारित किया गया। इसके बजाय सीधे तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई, जो वैधानिक नहीं थी।

सिंगल बेंच ने निगमायुक्त को अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 2(बी) के तहत दोषी ठहराया और सजा पर सुनवाई 6 फरवरी 2026 को सुबह 10.30 बजे नियत की गई थी।

Court ने यह भी कहा कि यदि संपत्ति को बिना शर्त माफी के साथ बहाल किया जाता, तो मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सकता था। हालांकि निगमायुक्त ने कोर्ट में यह स्पष्ट किया कि निर्माण को बहाल करना संभव नहीं है।

युगलपीठ में आवेदन और सजा पर रोक

निगमायुक्त संस्कृति जैन ने सजा पर रोक के लिए मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ में आवेदन किया। युगलपीठ ने सिंगल बेंच के आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी और सुनवाई अब युगलपीठ में होगी।

इस कदम से यह स्पष्ट होता है कि निगमायुक्त ने सजा से बचाव के लिए उच्चतम न्यायिक बेंच का रुख किया है। युगलपीठ की रोक से मामले की प्रक्रिया फिलहाल स्थगित हो गई है और आगामी सुनवाई के लिए तारीख तय की जाएगी।

Bhopal निगमायुक्त का पक्ष

संस्कृति जैन ने Court में यह कहा कि निर्माण को बहाल करना संभव नहीं है। उनका तर्क था कि संपत्ति का तोड़ना नियमानुसार किया गया और यह निगम के अधिकार क्षेत्र में आता है। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि संपत्ति को बहाल किया जाता तो मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सकता था, लेकिन ऐसा न होने से कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया।

इस दौरान निगमायुक्त ने युगलपीठ में भी अपना पक्ष रखा, जिससे सुनवाई का तरीका बदल गया और सजा पर चर्चा फिलहाल स्थगित हो गई।

मामला क्यों अहम है

यह मामला नगर निगम की कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन के बीच संतुलन बनाए रखने का महत्वपूर्ण उदाहरण है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी कार्रवाई करते समय नैसर्गिक न्याय का पालन करना आवश्यक है। सीधे तोड़फोड़ करना और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना करना गंभीर अपराध माना गया।

इस घटना से यह भी सामने आया कि यदि प्रशासन अपने अधिकारों का प्रयोग करता है तो भी कोर्ट की गाइडलाइन और नियमों का पालन अनिवार्य है। यह मामला अन्य नगर निगमों और सरकारी विभागों के लिए सावधानी और अनुशासन का संदेश भी है।

भविष्य की प्रक्रिया

हाईकोर्ट की युगलपीठ ने सजा पर रोक लगाने के बाद कहा कि मामले की अगली सुनवाई युगलपीठ में होगी। इससे यह स्पष्ट होता है कि सिंगल बेंच द्वारा तय समय पर सजा सुनवाई फिलहाल नहीं होगी।

आगामी सुनवाई में निगमायुक्त का पक्ष और सिंगल बेंच द्वारा दोषी ठहराए जाने के तर्कों पर विस्तार से चर्चा होगी। याचिकाकर्ता और नगर निगम दोनों की दलीलों को युगलपीठ में सुना जाएगा, और इसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला न केवल भोपाल नगर निगम के प्रशासनिक निर्णयों की समीक्षा के लिए अहम है, बल्कि यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और अवमानना मामलों में एक मिसाल भी बनेगा।

निष्कर्ष

संस्कृति जैन का यह मामला दिखाता है कि अधिकार और जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है। Court ने यह स्पष्ट किया कि सरकारी कार्यवाही करते समय नैसर्गिक न्याय सिद्धांत का पालन अनिवार्य है।

युगलपीठ की रोक से मामला फिलहाल स्थगित हुआ है, लेकिन आने वाले हफ्तों में सुनवाई और सजा पर अंतिम निर्णय का इंतजार रहेगा। यह मामला प्रशासनिक जिम्मेदारी, कानूनी प्रक्रिया और न्याय के बीच संतुलन बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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