Jabalpur में संदिग्ध मौत का मामला: बाथरूम में गिरी पत्नी को पास के अस्पताल पहुंचाने में ढाई घंटे लगे, उठे गंभीर सवाल
मध्य प्रदेश के Jabalpur से एक बार फिर ऐसा मामला सामने आया है जिसने दहेज प्रताड़ना और इलाज में देरी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला राजधानी भोपाल में चर्चित त्विषा शर्मा केस जैसा बताया जा रहा है। आरोप है कि आर्मी क्षेत्र में बाथरूम में गिरी महिला को मात्र 5 मिनट की दूरी पर स्थित अस्पताल पहुंचाने में करीब ढाई घंटे का समय लग गया, जिसके बाद उसकी मौत हो गई।
कविता दक्षिणामूर्ति की संदिग्ध मौत
यह मामला विधि स्नातक कविता दक्षिणामूर्ति से जुड़ा है, जिनकी मौत आर्मी एरिया स्थित ऑफिसर्स मैस में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी। जानकारी के अनुसार, कविता अपने पति मेजर डॉ. ओम नागार्जुन के साथ वहां रह रही थीं। घटना के समय वह बाथरूम में अचानक गिर पड़ीं।
परिजनों का आरोप है कि यदि समय पर इलाज मिल जाता तो उनकी जान बचाई जा सकती थी।
अस्पताल की दूरी सिर्फ 5 मिनट, लेकिन इलाज में लगी ढाई घंटे की देरी
कविता के पिता, जो चेन्नई के कोयंबेडू निवासी पी. दक्षिणामूर्ति हैं, ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जिस स्थान पर यह घटना हुई, वहां से मिलिट्री अस्पताल की दूरी मात्र 5 मिनट की थी, लेकिन उन्हें अस्पताल पहुंचाने में लगभग 2 घंटे 39 मिनट का समय लग गया।
परिजनों का आरोप है कि इस देरी के कारण कविता की हालत बिगड़ती गई और अगले दिन उनकी मौत हो गई।
दहेज हत्या का आरोप और एफआईआर न दर्ज होने पर सवाल
मामले में परिजनों ने दहेज प्रताड़ना और हत्या का आरोप लगाया है। हालांकि, गोराबाजार पुलिस पर यह आरोप है कि एक वर्ष बीत जाने के बाद भी इस मामले में अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
इस देरी को लेकर मृतका के पिता ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं और न्याय की मांग की है।
कोर्ट में दायर परिवाद और रिवीजन याचिका
पीड़ित परिवार ने पहले प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी दीपा पाल की अदालत में परिवाद दायर किया था, लेकिन वहां से उन्हें कोई राहत नहीं मिली।
इसके बाद उन्होंने अपर सत्र न्यायालय में रिवीजन याचिका दायर की। इस मामले की अगली सुनवाई 3 जून को निर्धारित की गई है। इस केस में अधिवक्ता मनीष वर्मा, विनोद सिसोदिया और निधि सोनकर पैरवी कर रहे हैं।
आर्मी क्षेत्र में हुई घटना ने बढ़ाई संवेदनशीलता
कविता की मौत आर्मी क्षेत्र के सदर स्थित जैक आरआरसी ऑफिसर्स मैस में हुई थी। यह क्षेत्र संवेदनशील माना जाता है, ऐसे में मामले ने और अधिक गंभीरता पकड़ ली है।
परिजनों का कहना है कि घटना के बाद की गई कार्रवाई और समय पर इलाज में हुई देरी कई सवाल खड़े करती है।
त्विषा शर्मा केस से हो रही तुलना
इस पूरे मामले की तुलना भोपाल में हाल ही में सामने आए त्विषा शर्मा केस से की जा रही है, जिसमें दहेज हत्या के आरोप लगे थे। दोनों मामलों में परिवारों का आरोप है कि समय पर इलाज और उचित कार्रवाई न होने से मौत हुई।
जांच और न्याय की मांग
मृतका के पिता लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि मामले में पुलिस और प्रशासन की ओर से लापरवाही बरती गई है। उनका कहना है कि जब तक निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक वे न्याय की उम्मीद करते रहेंगे।
निष्कर्ष
Jabalpur का यह मामला न केवल एक पारिवारिक त्रासदी है, बल्कि सिस्टम पर भी कई गंभीर सवाल खड़े करता है। अस्पताल की नजदीकी के बावजूद इलाज में हुई देरी, एफआईआर दर्ज न होना और न्यायिक प्रक्रिया में देरी इस केस को और अधिक संवेदनशील बना रहे हैं। अब सभी की नजर 3 जून को होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई है, जहां इस मामले में आगे की दिशा तय हो सकती है।
