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Jabalpur बरगी बांध का जलस्तर घटते ही सामने आया 40 साल पुराना इतिहास, 1986 में डूबी मोटर बोट फिर बनी आकर्षण का केंद्र

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Published On: 3 July 2026
Jabalpur
— बरगी बांध का जलस्तर घटते ही 40 साल पुराना इतिहास फिर सामने आया 1986 में डूबी मोटर बोट अब सतह पर दिखी,

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Jabalpur बरगी बांध का जलस्तर घटते ही सामने आया 40 साल पुराना इतिहास, 1986 में डूबी मोटर बोट फिर बनी आकर्षण का केंद्र

Jabalpur मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी बांध में इस समय जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। पानी घटने के साथ ही बांध के बैकवाटर क्षेत्र से एक ऐसा दृश्य सामने आया है, जिसने लोगों को हैरान कर दिया है। करीब चार दशक पुरानी एक लोहे की मोटर बोट, जो वर्ष 1986 में पानी में डूब गई थी, अब फिर से सतह पर दिखाई देने लगी है। यह अनोखा दृश्य न सिर्फ स्थानीय लोगों बल्कि पर्यटकों और सोशल मीडिया यूजर्स के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है।

पानी घटते ही सामने आया इतिहास

Jabalpur बरगी बांध का जलस्तर जैसे-जैसे कम हो रहा है, वैसे-वैसे पुराने जलमग्न हिस्से भी उजागर हो रहे हैं। इसी क्रम में बैकवाटर क्षेत्र में एक पुरानी मोटर बोट का ढांचा नजर आने लगा है। बताया जा रहा है कि यह नाव बरगी परियोजना के शुरुआती दौर की है और इसे उस समय निर्माण कार्य तथा आवागमन के लिए उपयोग में लाया जाता था।

स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्ष 1986 के आसपास यह मोटर बोट तकनीकी खराबी या किसी दुर्घटना के कारण पानी में डूब गई थी। उस समय किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई थी, लेकिन नाव को निकालने के प्रयास सफल नहीं हो सके थे। समय के साथ यह नाव पानी के नीचे दबकर इतिहास का हिस्सा बन गई थी।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरें

जैसे ही यह मोटर बोट पानी की सतह पर दिखाई दी, इसकी तस्वीरें तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं। लोग बड़ी संख्या में इसे देखने के लिए मौके पर पहुंच रहे हैं। कई पर्यटक और स्थानीय लोग इस दृश्य को अपने कैमरों में कैद कर रहे हैं।

नाव का अधिकांश हिस्सा अब पानी से बाहर नजर आ रहा है। लंबे समय तक पानी में रहने के कारण इसके ढांचे पर मोटी जंग की परत जम चुकी है, लेकिन इसके बावजूद इसका मूल आकार अब भी पहचाना जा सकता है।

“सुमा रेप्स प्रोजेक्ट जबलपुर” का नाम भी आया सामने

मोटर बोट पर लिखा “सुमा रेप्स प्रोजेक्ट जबलपुर” भी अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह नाव बरगी बांध परियोजना से जुड़ी रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह नाव उस दौर की तकनीकी और निर्माण गतिविधियों का हिस्सा रही होगी, जब बरगी बांध का विकास कार्य तेजी से चल रहा था।

यह दृश्य पहली बार बरगी बांध क्षेत्र में देखा गया है, जिसने स्थानीय लोगों के बीच उत्सुकता और आश्चर्य दोनों बढ़ा दिए हैं।

पर्यटकों के लिए बना आकर्षण का केंद्र

स्थानीय लोग इस मोटर बोट को सिर्फ एक पुरानी लोहे की संरचना नहीं बल्कि बरगी परियोजना के इतिहास की एक अनमोल निशानी मान रहे हैं। पर्यटकों का कहना है कि यह नाव उस दौर की याद दिलाती है जब बांध निर्माण अपने शुरुआती चरण में था और कई गांवों तथा क्षेत्रों का स्वरूप बदल रहा था।

लोग इसे देखने के लिए दूर-दूर से पहुंच रहे हैं और तस्वीरें व वीडियो बनाकर साझा कर रहे हैं। इससे यह स्थान अब एक अनौपचारिक पर्यटन स्थल जैसा बन गया है।

विशेषज्ञों की राय: जल संकट का संकेत भी

विशेषज्ञों का मानना है कि बरगी बांध में जलस्तर का इस तरह घट जाना केवल एक ऐतिहासिक खोज नहीं है, बल्कि यह आने वाले समय में जल संरक्षण की गंभीर चुनौती की ओर भी इशारा करता है।

उनका कहना है कि बार-बार जलस्तर में गिरावट न सिर्फ पर्यावरणीय असंतुलन का संकेत है, बल्कि इससे स्थानीय जल आपूर्ति और पारिस्थितिकी पर भी असर पड़ सकता है।

चार दशक पुरानी यादों का गवाह

करीब 40 साल तक पानी में दबी रही यह मोटर बोट आज सिर्फ एक जंग लगी संरचना नहीं रह गई है, बल्कि यह बरगी बांध के इतिहास, विकास और उस दौर की तकनीकी यात्रा की मूक गवाह बनकर सामने आई है।

यह दृश्य लोगों को न केवल अतीत से जोड़ रहा है, बल्कि जल संसाधनों के संरक्षण और उनके सही उपयोग पर सोचने के लिए भी प्रेरित कर रहा है।

बरगी बांध की यह “खोई हुई नाव” अब इतिहास और वर्तमान के बीच एक अनोखी कड़ी बनकर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है।

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