विश्व पर्यावरण दिवस पर इटारसी में “Seed Ball ” प्रशिक्षण कार्यक्रम, 1 लाख बीज रोपण का संकल्प
इटारसी, 5 जून 2025 – विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वैश्य महासम्मेलन महिला इकाई और भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट द्वारा “हर हाथ हरियाली” अभियान के तहत एक विशेष Seed Ball प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और अधिक से अधिक हरियाली फैलाना था।
कार्यक्रम में महिलाओं को मिट्टी, जैविक खाद, हवन की राख और देशी बीजों की मदद से सीड बॉल बनाने की विधि का प्रशिक्षण दिया गया। जिला अध्यक्ष श्रीमती श्रद्धा अग्रवाल ने स्वयं उपस्थित महिलाओं को सीड बॉल तैयार करने की प्रक्रिया समझाई और उन्हें पर्यावरण संरक्षण के इस सरल लेकिन प्रभावी उपाय के बारे में जानकारी दी।
“सीड से बनेगा भविष्य” – हरियाली का संकल्प
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए कहा कि अब वे अपने घर-घर में सीड बॉल अभियान को आगे बढ़ाएंगी। जिला अध्यक्ष श्रद्धा अग्रवाल ने कहा कि जब महिलाएं किसी कार्य को ठान लेती हैं, तो उसका प्रभाव घर से लेकर समाज और पर्यावरण तक दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि महिलाएं इस ज्ञान को अपने बच्चों और परिवार तक पहुंचाएंगी, जिससे पर्यावरण जागरूकता तेजी से बढ़ेगी। यह अभियान केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि एक व्यवहारिक शिक्षा भी है जो आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति से जोड़ती है।

1 लाख Seed Ball लगाने का लक्ष्य
कार्यक्रम में उपस्थित सभी महिलाओं ने अगले एक वर्ष में कम से कम 1 लाख सीड बॉल तैयार कर उन्हें सार्वजनिक स्थानों, खाली जमीनों, पहाड़ी क्षेत्रों और सड़क किनारों पर लगाने का संकल्प लिया। इस पहल का उद्देश्य प्राकृतिक रूप से हरियाली बढ़ाना और पर्यावरण संतुलन बनाए रखना है।
सीड बॉल तकनीक को कम खर्चीला और प्रभावी तरीका बताया गया, जिससे बिना अधिक देखभाल के पौधे प्राकृतिक रूप से उग सकते हैं। यह तकनीक विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी है जहां पानी और देखभाल की कमी के कारण पौधारोपण मुश्किल होता है।
महिलाओं की सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और सीड बॉल बनाने की प्रक्रिया को सीखा। सभी प्रतिभागियों ने इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
जिला अध्यक्ष ने बताया कि यह अभियान केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जागरूकता आंदोलन है, जो समाज में हरियाली के प्रति सोच को बदलने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं आगे आती हैं तो समाज में सकारात्मक बदलाव तेजी से होता है।
पर्यावरण संरक्षण का सरल लेकिन प्रभावी तरीका
सीड बॉल बनाने की प्रक्रिया में मिट्टी, जैविक खाद, हवन की राख और देशी बीजों का उपयोग किया जाता है। इन सभी तत्वों को मिलाकर छोटी-छोटी गेंदों का रूप दिया जाता है, जिन्हें सूखाकर उपयुक्त स्थानों पर फेंका जाता है।
बारिश या नमी मिलने पर इनमें मौजूद बीज अंकुरित हो जाते हैं और बिना अतिरिक्त देखभाल के पौधे विकसित होने लगते हैं। यह तकनीक न केवल सरल है, बल्कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में उपयोगी मानी जाती है।
घरेलू कचरे से बागवानी की प्रेरणा
कार्यक्रम में इकाई की सदस्य श्रीमती आशा भारद्वाज ने भी अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि वे घर के वेस्ट मटेरियल, सब्जी के छिलके और पूजा सामग्री से जैविक खाद तैयार कर अपने घर में सुंदर गार्डन विकसित कर रही हैं।
उनका यह प्रयास उपस्थित सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। उन्होंने बताया कि घरेलू कचरे का सही उपयोग करके भी पर्यावरण संरक्षण में बड़ा योगदान दिया जा सकता है। इससे न केवल कचरे का निपटान आसान होता है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है।
समाज को जोड़ने का प्रयास
वैश्य महासम्मेलन महिला इकाई ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे इस अभियान से जुड़ें और सीड बॉल बनाकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें। संस्था का मानना है कि सामूहिक प्रयास से ही बड़े स्तर पर हरियाली बढ़ाई जा सकती है और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटा जा सकता है।
संगठन ने यह भी कहा कि यदि हर घर से कुछ लोग भी इस अभियान से जुड़ते हैं, तो आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर पर्यावरण सुधार देखा जा सकता है।
जागरूकता और शिक्षा का माध्यम
इस कार्यक्रम को केवल एक प्रशिक्षण सत्र के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यापक जागरूकता अभियान के रूप में देखा जा रहा है। इसमें शामिल महिलाओं ने न केवल सीड बॉल बनाने की तकनीक सीखी, बल्कि यह भी समझा कि छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़े और स्थायी बदलाव ला सकते हैं। इस पहल ने प्रतिभागियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई सोच और जिम्मेदारी विकसित की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सामुदायिक अभियान समाज में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब महिलाएं और परिवार मिलकर ऐसे प्रयासों में भाग लेते हैं, तो उसका प्रभाव केवल घर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज में दिखाई देता है। इसके अलावा, बच्चों में भी प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण की भावना विकसित होती है, जो भविष्य के लिए बेहद आवश्यक है। ऐसे कार्यक्रम पर्यावरण शिक्षा को व्यवहारिक रूप देते हैं और सतत विकास की दिशा में सकारात्मक कदम साबित होते हैं।

भविष्य की योजना
कार्यक्रम के अंत में यह निर्णय लिया गया कि आने वाले समय में इस अभियान को और व्यापक स्तर पर चलाया जाएगा। विभिन्न स्थानों पर प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे और अधिक से अधिक महिलाओं और युवाओं को जोड़ा जाएगा।
संस्था का लक्ष्य है कि इस पहल को एक स्थायी पर्यावरण आंदोलन में बदला जाए, जो केवल एक दिन तक सीमित न रहे बल्कि पूरे वर्ष सक्रिय रूप से चलता रहे।
निष्कर्ष
इटारसी में आयोजित यह सीड बॉल प्रशिक्षण कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल साबित हुआ है। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और 1 लाख सीड बॉल लगाने का संकल्प इस बात का संकेत है कि सामुदायिक प्रयासों से बड़े स्तर पर हरियाली बढ़ाई जा सकती है। यह अभियान न केवल पर्यावरण सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत करता है।
