US-Iran Peace Deal पर इजरायल की तीखी प्रतिक्रिया, नेतन्याहू सरकार ने समझौते को बताया ‘अस्वीकार्य’
अमेरिका-ईरान समझौते के बाद खाड़ी में बढ़ी कूटनीतिक हलचल
US-Iran Peace Deal: समझौते को जहां दुनिया के कई देशों ने एक सकारात्मक कूटनीतिक कदम के रूप में स्वागत किया है, वहीं मध्य पूर्व के जटिल राजनीतिक समीकरणों के बीच इजरायल ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
इस समझौते के बाद पश्चिम एशिया में शांति और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम से इजरायल की सुरक्षा नीति और रणनीतिक हितों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
इजरायल की शीर्ष राजनीतिक और सुरक्षा नेतृत्व ने इस समझौते पर असंतोष जताते हुए इसे क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन के लिए चुनौती बताया है।
इजरायल की सख्त प्रतिक्रिया, समझौते को बताया ‘अस्वीकार्य’
इजरायल की प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की दक्षिणपंथी गठबंधन सरकार के कई मंत्रियों ने सार्वजनिक रूप से इस समझौते का विरोध किया है। उनका कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ यह समझौता इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया है।
इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री Itamar Ben-Gvir ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह समझौता इजरायल पर लागू नहीं होता और उनका देश किसी भी बाहरी दबाव में निर्णय नहीं लेगा।
उन्होंने कहा कि इजरायल एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है और उसकी सुरक्षा प्राथमिकताओं को कोई भी बाहरी समझौता प्रभावित नहीं कर सकता। उनके बयान ने क्षेत्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
‘इजरायल किसी बनाना रिपब्लिक नहीं है’ — बेन-ग्विर
इजरायली मंत्री इजरायल काट्ज और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी इस समझौते पर सवाल उठाए हैं। बेन-ग्विर ने कड़े शब्दों में कहा कि इजरायल किसी “बनाना रिपब्लिक” की तरह नहीं चल सकता और वह किसी ऐसे समझौते का हिस्सा नहीं बन सकता जो उसकी सुरक्षा को कमजोर करे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायल की प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा है और किसी भी परिस्थिति में वह हिजबुल्लाह जैसे संगठनों के खतरे को नजरअंदाज नहीं करेगा।
सुरक्षा नीति में कोई बदलाव नहीं करेगा इजरायल
इजरायल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इजरायल अपनी सैन्य उपस्थिति लेबनान, सीरिया और गाजा क्षेत्र से नहीं हटाएगा।
उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में मौजूद सुरक्षा ढांचा इजरायल की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे कमजोर नहीं किया जा सकता।
काट्ज ने यह भी चेतावनी दी कि यदि ईरान या उसके सहयोगी समूहों की ओर से किसी भी प्रकार की जवाबी कार्रवाई की जाती है, तो इजरायल “पूरी ताकत” के साथ प्रतिक्रिया देगा।
ईरान और क्षेत्रीय सुरक्षा पर इजरायल की चिंता
इजरायली नेतृत्व का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ यह समझौता क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को प्रभावित कर सकता है। विशेष रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर इजरायल लंबे समय से चिंतित रहा है।
इजरायली वित्त मंत्री Bezalel Smotrich ने इस समझौते को इजरायल और पश्चिमी दुनिया के लिए “खतरनाक संकेत” बताया है। उनका कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना इजरायल की प्राथमिक सुरक्षा जिम्मेदारी है।
हिजबुल्लाह और सीमा सुरक्षा पर सख्त रुख
इजरायल सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह लेबनान और अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों से अपनी सैन्य उपस्थिति कम नहीं करेगी। इजरायल का कहना है कि हिजबुल्लाह जैसे संगठनों से लगातार खतरा बना हुआ है, इसलिए सुरक्षा बलों की तैनाती आवश्यक है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, सीमा क्षेत्रों में नियंत्रण बनाए रखना इजरायल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है और इसे किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते के आधार पर छोड़ा नहीं जा सकता।
क्षेत्रीय तनाव के बीच बढ़ी कूटनीतिक चुनौती
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका-ईरान समझौते के बाद इजरायल की यह प्रतिक्रिया क्षेत्रीय कूटनीति के लिए एक नई चुनौती पैदा कर सकती है। जहां एक ओर शांति की उम्मीदें बढ़ी हैं, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा और रणनीतिक हितों को लेकर मतभेद गहराते जा रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति पश्चिम एशिया में एक नए राजनीतिक संतुलन की ओर इशारा कर सकती है, जहां सभी प्रमुख ताकतें अपने-अपने हितों को लेकर सतर्क हैं।
आगे क्या होगा?
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका इस समझौते पर इजरायल की आपत्तियों को किस तरह संबोधित करेगा। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और कूटनीतिक बातचीत होने की संभावना है।
फिलहाल, इजरायल का सख्त रुख इस बात का संकेत है कि अमेरिका-ईरान शांति समझौता क्षेत्रीय राजनीति में पूरी तरह सहज नहीं माना जा रहा है और इसके प्रभाव आने वाले समय में और स्पष्ट होंगे।
