ISIS ने इस्लामाबाद मस्जिद धमाके की ज़िम्मेदारी ली, 69 की मौत
Pakistan की राजधानी इस्लामाबाद में शुक्रवार, 6 फरवरी, 2026 को जुमे की नमाज के दौरान एक भयंकर आत्मघाती बम धमाके की घटना घटी। यह हमला शहजाद टाउन के तरलाई कलां इलाके में स्थित इमाम बारगाह खदीजत-उल-कुबरा में हुआ। धमाके के तुरंत बाद वहां अफरा-तफरी मच गई और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। इस दर्दनाक घटना में 69 लोगों की मौत हुई और 170 से अधिक लोग घायल हुए। घायलों में कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।
धमाके का विवरण
घटना के समय मस्जिद में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे, क्योंकि यह जुमे की नमाज का समय था। रिपोर्ट्स के अनुसार, आत्मघाती हमलावर ने अचानक खुद को उड़ा दिया, जिससे मस्जिद की इमारत को भारी नुकसान पहुँचा। धमाके की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस समय कई भक्त नमाज में लीन थे और अचानक हुए विस्फोट से लोगों में डर और घबराहट फैल गई। घायल लोगों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया, और राहत तथा बचाव कार्य तुरंत शुरू कर दिया गया।
ISIS ने ली जिम्मेदारी
इस हमले के तुरंत बाद ही यह सवाल उठने लगे कि इसके पीछे कौन है। पाकिस्तान सरकार ने बिना किसी सबूत के भारत पर आरोप लगाया, लेकिन भारत ने इसे पूरी तरह बेबुनियाद करार दिया और खारिज कर दिया।
कुछ ही समय बाद, आतंकी संगठन ISIS (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया) ने इस आत्मघाती धमाके की जिम्मेदारी ली। ISIS ने अपने बयान में कहा कि यह हमला उनके संगठन द्वारा उनकी “आतंकवादी कार्रवाइयों की श्रृंखला” का हिस्सा है।
पाकिस्तानी सेना की कथित भूमिका
विशेषज्ञों और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि इस हमले के पीछे पाकिस्तानी सेना के कुछ तत्व भी हो सकते हैं। उनका मानना है कि इस प्रकार के आतंकी हमले कभी-कभी भू-राजनीतिक उद्देश्यों के तहत किए जाते हैं। हालांकि, इस बारे में कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है और ये केवल अटकलें ही मानी जा रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय निंदा और प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता और गहरी शोक की लहर दौड़ गई। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की और कहा कि ऐसे आतंकी हमले पूरे क्षेत्र की शांति के लिए खतरा हैं।
संयुक्त राष्ट्र और कई अन्य देशों ने भी इस हमले की निंदा की और आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाने की अपील की।
प्रभावित परिवार और राहत कार्य
इस हादसे में मारे गए लोगों के परिवारों में शोक का माहौल है। स्थानीय प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को आर्थिक मदद देने और घायलों के इलाज में सहयोग करने की घोषणा की है। राहत कार्य के लिए पुलिस, फायर ब्रिगेड और आपदा प्रबंधन टीम को तुरंत घटनास्थल पर भेजा गया।
स्थानीय लोगों ने भी घायलों की मदद के लिए दान और रक्तदान का अभियान शुरू किया।
Pakistan में सुरक्षा का सवाल
इस धमाके ने पाकिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजधानी इस्लामाबाद में इस प्रकार का हमला पहले कभी इतनी गंभीरता के साथ नहीं हुआ था। मस्जिदों और सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस हमले ने पाकिस्तान के आंतरिक सुरक्षा ढांचे की खामियों को उजागर किया है और यह जरूरी है कि देश आतंकवाद को रोकने के लिए ठोस रणनीति अपनाए।
भविष्य में खतरे और सतर्कता
इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि आतंकी संगठन अपने लक्ष्य को लेकर लगातार सक्रिय हैं। ऐसे हमले न केवल पाकिस्तान में शांति के लिए खतरा हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र में तनाव और असुरक्षा बढ़ा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के हमलों से निपटने के लिए सख्त सुरक्षा उपाय, निगरानी तंत्र, और जनसामान्य की सतर्कता अत्यंत आवश्यक है।
निष्कर्ष
इस्लामाबाद धमाका एक दुखद और भयावह घटना है जिसने कई निर्दोष लोगों की जान ली और घायलों की संख्या बढ़ा दी। आतंकी संगठन ISIS द्वारा इसकी जिम्मेदारी लेने से यह स्पष्ट हुआ कि वैश्विक आतंकवाद अभी भी सक्रिय है और इसके प्रभाव से न केवल पाकिस्तान बल्कि पूरी दुनिया प्रभावित हो सकती है।
सरकारों, सुरक्षा एजेंसियों और आम जनता के लिए यह संदेश है कि आतंकवाद के खिलाफ सतर्क रहना और मिलकर काम करना बेहद जरूरी है।
