मिडिल ईस्ट संकट: Iran , US और Isreal के बीच तनाव बढ़ा
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। US , Isreal और Iran के बीच जंग अब एक महीने से अधिक समय से चल रही है। दोनों पक्ष लगातार हवाई हमले और मिसाइल स्ट्राइक कर रहे हैं। इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने खाड़ी देशों को चेतावनी दी है कि वे अमेरिका और इज़राइल के समर्थन में न आएं।
राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने कहा कि यदि खाड़ी देश अपनी सुरक्षा और विकास चाहते हैं, तो उन्हें ईरान पर हमला करने की अनुमति अमेरिका या इज़राइल को नहीं देनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान हमेशा पहले हमला नहीं करता, लेकिन उसके इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्थिक केंद्र या सेना पर हमला होने पर वह कड़ा जवाब देगा।
दुबई और कुवैत में Iran के हमले
ईरान ने हाल ही में दुबई में अमेरिकी सेना के दो ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि इन ठिकानों पर लगभग 500 अमेरिकी सैनिक तैनात थे। इसके अलावा, कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले की खबर आई, जिसमें रडार सिस्टम को नुकसान पहुंचा। हालांकि, इन हमलों में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है।
ईरान ने दुबई के एक होटल और अमेरिकी ड्रोन यूनिट के ठिकानों को भी निशाना बनाने का दावा किया। ईरानी प्रवक्ता ने कहा कि हमले के बाद दुबई में एम्बुलेंस मृत और घायल अमेरिकी सैनिकों को ले जाती रही।
US का जवाब और सीईएनटीकॉम की प्रतिक्रिया
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के दावों को पूरी तरह झूठा बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि ईरान अपनी कमजोर होती सैन्य स्थिति को छिपाने के लिए झूठ फैला रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका ने ईरान की नौसेना और रक्षा औद्योगिक ढांचे को काफी हद तक नुकसान पहुंचाया है और होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान को नियंत्रण की अनुमति नहीं दी जाएगी।
रुबियो ने जोर देकर कहा कि अमेरिका आने वाले हफ्तों में अपने उद्देश्यों को हासिल कर लेगा। उन्होंने कहा कि ईरान की मिसाइल और ड्रोन निर्माण क्षमता को खत्म किया जाएगा ताकि भविष्य में यह क्षेत्र के लिए खतरा न बन सके।
भारत की मानवीय सहायता और समर्थन
इस संकट के बीच भारत ईरान में मानवीय मदद भेज रहा है। भारत की ओर से मेडिकल सहायता की पहली खेप 18 मार्च को भेजी गई थी, जिसे ईरानी रेड क्रेसेंट सोसायटी के माध्यम से वितरित किया गया। ईरानी दूतावास ने भारत की इस मदद के लिए आभार व्यक्त किया।
साथ ही, जम्मू-कश्मीर से भी ईरान के लिए मदद सामने आई। स्थानीय लोगों ने चंदा अभियान चलाकर राहत सामग्री जुटाई। विशेषकर बडगाम और बारामुला जिलों में लोगों ने बढ़-चढ़कर योगदान दिया। कई वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं, जिनमें लोगों को राहत सामग्री तैयार करते हुए दिखाया गया।
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खाड़ी देशों के लिए ईरान की चेतावनी
ईरान के राष्ट्रपति ने खाड़ी देशों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई देश अमेरिका और इज़राइल के समर्थन में आता है, तो ईरान अपने रणनीतिक और आर्थिक केंद्रों की सुरक्षा के लिए कड़ा जवाब देगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान हमेशा शांतिप्रिय रहा है और पहले हमला नहीं करता। लेकिन अगर उसकी जमीन या महत्वपूर्ण संरचनाओं पर हमला होता है, तो इसका जवाब तुरंत और सटीक तरीके से दिया जाएगा।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर
ईरान और अमेरिका-इज़राइल के बीच तनाव मिडिल ईस्ट में सुरक्षा स्थिति को गहराई से प्रभावित कर रहा है। दुबई और कुवैत में ड्रोन हमले, मिसाइल स्ट्राइक और हवाई हमलों ने क्षेत्रीय प्रशासन को अलर्ट पर रखा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह जंग जारी रही, तो ईंधन और ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री मार्ग और अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य पर गंभीर असर पड़ेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो तेल परिवहन का मुख्य मार्ग है, पर नियंत्रण के लिए दोनों पक्ष आमने-सामने हैं।
ईरान-यूएस संघर्ष: आगे की संभावनाएँ
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में अमेरिका-ईरान के बीच संघर्ष और तेज हो सकता है। ईरान अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं का इस्तेमाल करेगा, जबकि अमेरिका अपनी एयर और नेवी ताकत से जवाब देगा।
हालांकि, अमेरिका का दावा है कि उसने ईरान की नौसेना और रक्षा उद्योग को पहले ही काफी हद तक क्षतिग्रस्त कर दिया है। इस वजह से ईरान की सैन्य क्षमताएं फिलहाल सीमित हैं।
निष्कर्ष
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष में अभी कोई स्थायी समाधान नहीं नजर आ रहा है। ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। खाड़ी देशों को भी सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। भारत ने मानवीय सहायता भेजकर संकट के बीच समर्थन दिखाया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, सैन्य तैयारियाँ और क्षेत्रीय सहयोग ही इस तनाव को कम करने का रास्ता हो सकता है। फिलहाल, आम लोगों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें इस संघर्ष पर टिकी हुई हैं।
