Iran-US Ceasefire: जंग के बाद फिर खुलने लगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, लेकिन अभी भी सामान्य नहीं हुई जहाजों की आवाजाही
अमेरिका-ईरान संघर्ष थमने के बाद होर्मुज पर टिकी दुनिया की नजर
Iran-US Ceasefire: अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष थमने के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार की निगाहें एक बार फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर आ टिकी हैं। दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने और एक-दूसरे के खिलाफ बल प्रयोग नहीं करने की सहमति बनने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति लाइनों में शामिल इस समुद्री मार्ग पर व्यापार धीरे-धीरे सामान्य होगा।
हालांकि हालात में सुधार के बावजूद जहाजों की आवाजाही अभी भी युद्ध से पहले के स्तर तक नहीं पहुंच सकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक क्षेत्र में पूरी तरह स्थिरता नहीं आती, तब तक वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर इसका असर बना रह सकता है।
फिलहाल हर दिन गुजर रहे हैं करीब 40 जहाज
समुद्री जहाजों की रियल-टाइम ट्रैकिंग करने वाली एजेंसी Kpler के आंकड़ों के अनुसार, हालिया संघर्ष के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाले समुद्री व्यापार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। अब स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है और वर्तमान में इस समुद्री मार्ग से प्रतिदिन औसतन लगभग 40 जहाज गुजर रहे हैं।
हालांकि यह संख्या युद्ध के दौरान की तुलना में काफी बेहतर मानी जा रही है, लेकिन अभी भी सामान्य स्तर से काफी कम है। वैश्विक शिपिंग कंपनियां और तेल निर्यातक क्षेत्र की सुरक्षा पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
युद्ध से पहले प्रतिदिन गुजरते थे लगभग 100 जहाज
संघर्ष शुरू होने से पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल था। उस समय यहां से प्रतिदिन औसतन करीब 100 जहाजों की आवाजाही होती थी।
युद्ध के दौरान सुरक्षा जोखिम बढ़ने और समुद्री तनाव के कारण जहाजों की संख्या में भारी गिरावट आई। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 1 मार्च से 17 जून के बीच प्रतिदिन औसतन केवल 13 जहाज ही इस मार्ग से गुजर पाए। इसके मुकाबले वर्तमान स्थिति में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन कारोबार अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ है।
होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर बना हुआ है विवाद
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज केवल एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति का भी बड़ा केंद्र है। इस जलमार्ग पर नियंत्रण को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं।
ईरान का दावा है कि इस क्षेत्र में उसकी संप्रभुता और सुरक्षा हित सर्वोपरि हैं, जबकि अमेरिका का कहना है कि यह एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है और किसी भी देश को यहां से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही रोकने का अधिकार नहीं है।
यही विवाद समय-समय पर वैश्विक व्यापार और तेल बाजार में अस्थिरता का कारण बनता रहा है।
समझौते के तहत हटेगी नौसैनिक नाकेबंदी
अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया समझौते के अनुसार अमेरिका को 19 जुलाई तक ईरानी बंदरगाहों के आसपास लागू नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह समाप्त करनी होगी।
ईरान ने भी भरोसा दिलाया है कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही को युद्ध-पूर्व स्तर तक बहाल करने का प्रयास करेगा। हालांकि समुद्री मार्ग पर अंतिम नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अभी दोनों देशों के बीच कोई स्थायी सहमति नहीं बन सकी है।
60 दिनों तक जहाजों से नहीं लिया जाएगा कोई शुल्क
दोनों देशों के बीच हुए समझौते में यह भी प्रावधान किया गया है कि अगले 60 दिनों तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से किसी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क या ट्रांजिट फीस नहीं वसूली जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक शिपिंग कंपनियों को राहत मिलेगी और तेल एवं गैस की आपूर्ति में तेजी आने की संभावना बढ़ेगी। साथ ही अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।
ट्रंप बोले- रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची शिपिंग
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में जहाज इस समुद्री मार्ग का इस्तेमाल कर रहे हैं और इसका सकारात्मक असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी दिखाई दे रहा है।
ट्रंप के अनुसार तेल की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है और आने वाले समय में इसमें और कमी देखने को मिल सकती है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौटने से वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा।
ईरान ने दी नई चेतावनी
इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के मौजूदा प्रबंधन में किसी भी प्रकार का बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान के अधिकार क्षेत्र को चुनौती देने या किसी नए नियंत्रण तंत्र को लागू करने की कोशिश की गई तो इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है। उनके अनुसार ऐसा कोई भी कदम शांति प्रक्रिया को प्रभावित करेगा और समुद्री मार्ग को पूरी तरह सामान्य होने में और अधिक समय लग सकता है।
वैश्विक तेल बाजार पर रहेगा असर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से निर्यात होने वाले कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है।
इसी वजह से इस क्षेत्र में होने वाला कोई भी सैन्य तनाव या राजनीतिक विवाद सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार को प्रभावित करता है। फिलहाल संघर्षविराम के बाद हालात में सुधार जरूर दिखाई दे रहा है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि स्थायी समाधान और क्षेत्रीय स्थिरता के बिना व्यापार पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लग सकता है।
निष्कर्ष
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष समाप्त होने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे बढ़ रही है। हालांकि मौजूदा समय में प्रतिदिन लगभग 40 जहाज गुजर रहे हैं, जो युद्ध के दौरान की तुलना में बेहतर स्थिति है, लेकिन यह अब भी युद्ध-पूर्व औसत 100 जहाजों से काफी कम है। दोनों देशों के बीच हुए समझौते से वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर जारी विवाद अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस समुद्री मार्ग की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।
