Iran Israel War के कारण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज संकट से वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मच गई है। कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर पार होने से रूस को रोज़ 1250 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई हो रही है।
Iran Israel War: मिडिल ईस्ट युद्ध से रूस की बढ़ी कमाई, रोज़ 1250 करोड़ रुपये का फायदा
मिडिल ईस्ट में जारी Iran Israel War ने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार को झकझोर कर रख दिया है। इस युद्ध के कारण तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है। खासकर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से दुनिया के कई देशों में ऊर्जा संकट गहरा गया है।लेकिन इस संकट के बीच एक ऐसा देश भी है जो इस स्थिति से आर्थिक रूप से फायदा उठा रहा है — रूस। ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार, तेल की कीमतों में तेजी के कारण रूस को प्रतिदिन लगभग 150 मिलियन डॉलर यानी करीब 1250 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हो रही है।
यह स्थिति न केवल वैश्विक ऊर्जा संतुलन को प्रभावित कर रही है, बल्कि अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए भी एक नई आर्थिक चुनौती बनती जा रही है।
Iran Israel War और वैश्विक ऊर्जा संकट
मिडिल ईस्ट में Iran Israel War के कारण तेल की आपूर्ति शृंखला (Supply Chain) पर गंभीर असर पड़ा है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर नियंत्रण की कोशिशों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है।स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति गुजरती है। ऐसे में यदि यहां बाधा उत्पन्न होती है तो उसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
युद्ध के बाद:
- तेल की आपूर्ति घट गई
- वैश्विक बाजार में घबराहट बढ़ गई
- तेल की कीमतें तेजी से बढ़ने लगीं
इन परिस्थितियों में रूस जैसे बड़े तेल निर्यातक देशों को अप्रत्याशित आर्थिक लाभ मिलने लगा।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का महत्व
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।हर दिन यहां से लगभग 1.7 से 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता है। इसलिए इस मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है।विशेषज्ञों का कहना है कि अगर Iran Israel War के कारण यह मार्ग लंबे समय तक प्रभावित रहा, तो तेल की कीमतें और भी बढ़ सकती हैं।
रूस की तेल कमाई में भारी उछाल
ऊर्जा विश्लेषण संस्था Center for Research on Energy and Clean Air (CREA) के आंकड़ों के अनुसार, रूस की जीवाश्म ईंधन से होने वाली आय में बड़ा उछाल आया है।वर्तमान में रूस को हर दिन लगभग 510 मिलियन यूरो (550 मिलियन डॉलर से अधिक) की आय हो रही है।यह फरवरी के औसत से लगभग 14 प्रतिशत अधिक है।केवल तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण ही रूस को हर दिन लगभग 45 मिलियन यूरो अतिरिक्त कमाई हो रही है।अगर शुरुआती दो सप्ताह की बात करें तो रूस को लगभग6 अरब यूरो से अधिक का अतिरिक्त लाभ मिल चुका है।यही कारण है कि वैश्विक विश्लेषक कह रहे हैं कि Iran Israel War ने रूस की अर्थव्यवस्था को अप्रत्याशित सहारा दिया है।
भारत और चीन ने क्यों बढ़ाई रूसी तेल की खरीद
मिडिल ईस्ट में आपूर्ति बाधित होने के बाद दुनिया के कई देशों को वैकल्पिक तेल स्रोत खोजने पड़े। इस स्थिति में भारत और चीन ने रूसी तेल की खरीद बढ़ा दी।
इसके पीछे कई कारण हैं:
- रूसी तेल अपेक्षाकृत सस्ता मिलता है
- स्थिर आपूर्ति उपलब्ध रहती है
- ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखना जरूरी है
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की कई रिफाइनरियों ने हाल के दिनों में रूसी कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि की है।
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें
Iran Israel War के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें तेजी से बढ़ीं।
वर्तमान में तेल की कीमत:100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक पहुंच गई है।
इसका असर कई क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है:
- पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं
- परिवहन लागत बढ़ सकती है
- महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति जारी रहती है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है।
रूस के बजट पर युद्ध का असर
रूस के प्रमुख निर्यात तेल Urals Crude की कीमत भी बढ़कर लगभग 62 डॉलर प्रति बैरल हो गई है।यह रूस के संघीय बजट में तय किए गए 59 डॉलर प्रति बैरल के लक्ष्य से अधिक है।इसका मतलब है कि रूस की सरकारी आय भी बढ़ रही है।
अनुमान के अनुसार:
- रूस को 1.3 से 1.9 अरब डॉलर अतिरिक्त टैक्स राजस्व मिला है
- सरकारी बजट को मजबूती मिली है
इस वजह से रूस की अर्थव्यवस्था को इस युद्ध से अप्रत्यक्ष फायदा मिल रहा है।
दुनिया की अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव
Iran Israel War केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है। इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार संभावित प्रभाव:
1. महंगाई बढ़ सकती है
ऊर्जा कीमतें बढ़ने से वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं।
2. सप्लाई चेन प्रभावित होगी
तेल और गैस की कमी से कई उद्योग प्रभावित हो सकते हैं।
3. वैश्विक आर्थिक मंदी का खतरा
अगर युद्ध लंबा चला तो आर्थिक अस्थिरता बढ़ सकती है।
आगे क्या हो सकता है
विश्लेषकों का मानना है कि यदि Iran Israel War जल्दी समाप्त नहीं हुआ तो इसके परिणाम और गंभीर हो सकते हैं।
संभावित स्थितियां:
- तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं
- ऊर्जा संकट गहरा सकता है
- वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है
हालांकि रूस के लिए फिलहाल यह स्थिति आर्थिक अवसर बनती दिखाई दे रही है।
दुनिया के कई देश ऊर्जा सुरक्षा के लिए वैकल्पिक स्रोतों की तलाश कर रहे हैं।
निष्कर्ष
मिडिल ईस्ट में जारी Iran Israel War ने दुनिया की ऊर्जा व्यवस्था को अस्थिर कर दिया है। जहां कई देशों के लिए यह संकट बन गया है, वहीं रूस के लिए यह आर्थिक अवसर साबित हो रहा है।तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक मांग बढ़ने से रूस को हर दिन अरबों रुपये का अतिरिक्त लाभ हो रहा है।आने वाले समय में यह युद्ध न केवल वैश्विक राजनीति बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था की दिशा भी तय कर सकता है।
