US से तनातनी के बीच Iran के विदेश मंत्री की भारत यात्रा: आर्थिक संबंधों में नया अध्याय, चाबहार पोर्ट होगा मुख्य एजेंडा
अमेरिका और Iran के बीच लगातार बढ़ती तनातनी के बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची अगले हफ्ते भारत दौरे पर आने वाले हैं। उनके दौरे का मुख्य एजेंडा चाबहार बंदरगाह होगा, जो रणनीतिक दृष्टि से भारत और Iran दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
Iran-US विवाद और भारत की भूमिका
पिछले कुछ महीनों में अमेरिका और Iran के बीच तनाव बढ़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह खामेनेई को चेतावनी दी कि अगर जरूरत पड़ी तो वे ऐसी जगह हमला करेंगे जहां दर्द सबसे ज्यादा होगा। इस कड़ी चेतावनी के बीच दुनिया की निगाहें Iran पर लगी हुई हैं। ऐसी स्थिति में भारत का मध्यस्थता और रणनीतिक सहयोग दोनों ही दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बन गया है। Iran के विदेश मंत्री अराघची की भारत यात्रा में चाबहार पोर्ट का मुद्दा सबसे अहम एजेंडा होगा, क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंधों में मिली छूट अप्रैल 2026 में समाप्त हो रही है। यह छूट भारत को इस बंदरगाह का प्रबंधन करने और अफगानिस्तान तथा मध्य एशियाई देशों तक अपने व्यापार मार्ग को सुनिश्चित करने में मदद करती है।

अराघची की भारत यात्रा और एजेंडा
सूत्रों के अनुसार, अराघची का दौरा 15-16 जनवरी को प्रस्तावित है। इस दौरान वे भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, और बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल से मुलाकात करेंगे। यात्रा का मुख्य फोकस चाबहार बंदरगाह के संचालन और इसके रणनीतिक महत्व पर रहेगा। चाबहार बंदरगाह भारत के लिए महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि इसे इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) 2024 से अगले 10 वर्षों के लिए प्रबंधित कर रहा है। यह पोर्ट न केवल भारत-ईरान रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है, बल्कि अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों तक हिंद महासागर की पहुंच सुनिश्चित करने में भी अहम भूमिका निभाता है।
चाबहार पोर्ट: रणनीतिक महत्व
चाबहार बंदरगाह की भौगोलिक स्थिति इसे बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। यह अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों के लिए हिंद महासागर तक पहुंच का मुख्य मार्ग है। इसके माध्यम से भारत और खाड़ी देश, मध्य एशियाई देशों के बाजारों तक अपनी पहुंच बढ़ा सकते हैं। साथ ही, यह पोर्ट रूस के उन हिस्सों से भी जुड़ा हुआ है जो मध्य एशिया से सटे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कनेक्टिविटी में सुधार होता है। यही कारण है कि भारत और ईरान इस पोर्ट के संचालन और भविष्य को लेकर विशेष सतर्क हैं।
अमेरिका से मिली छूट और उसकी समाप्ति
अक्टूबर 2025 में भारत ने चाबहार पोर्ट के लिए अमेरिका से छह महीने की प्रतिबंधों में छूट प्राप्त की थी। यह छूट अमेरिका द्वारा Iran पर लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद भारत को पोर्ट संचालन की अनुमति देती है। 13 मई, 2024 को भारत ने इस बंदरगाह के संचालन के लिए 10 साल का दीर्घकालिक अनुबंध किया था। यह पहली बार था जब भारत ने किसी विदेशी बंदरगाह का प्रबंधन संभाला। इस समझौते के तहत IPGL और ईरान के पोर्ट एंड मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन के बीच विस्तृत अनुबंध हुआ। अमेरिकी छूट अप्रैल 2026 में समाप्त होने वाली है, इसलिए अराघची का दौरा इस दृष्टि से बेहद समयोचित है। यह दोनों देशों के बीच पोर्ट संचालन और व्यापार संबंधों को स्थिर बनाने का अवसर है।
अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय महत्व
चाबहार बंदरगाह केवल भारत और Iran के लिए ही नहीं, बल्कि कई अन्य देशों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
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अफगानिस्तान: भारत-अफगान आर्थिक साझेदारी और मानवीय सहायता के लिए चाबहार पोर्ट का उपयोग करता है। उदाहरण के तौर पर, भारत ने अफगान विदेश मंत्री के पिछले दौरे के दौरान एम्बुलेंस उपहार में दी थीं।
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मध्य एशिया: उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान और ताजिकिस्तान अपने व्यापार को बढ़ाने और हिंद महासागर क्षेत्र तक पहुंचने के लिए चाबहार पोर्ट का उपयोग करना चाहते हैं।
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यूरेशिया: भारत यूरेशियन आर्थिक संघ के साथ प्रारंभिक फसल मुक्त व्यापार समझौते को लागू करने की कोशिश कर रहा है, जिससे रेयर अर्थ खनिज और अन्य सामानों की आपूर्ति बेहतर हो सके।
भारत-Iran संबंधों के 75 साल
अराघची की यात्रा के दौरान भारत और Iran के बीच राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने का जश्न भी मनाया जाएगा। इसके तहत ईरानी विदेश मंत्री को ऐतिहासिक द्विपक्षीय दस्तावेजों की प्रदर्शनी देखने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा, वह स्थानीय कारोबारी समुदाय और प्रमुख थिंक टैंक्स से बातचीत करेंगे। इस अवसर का इस्तेमाल दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए किया जाएगा। चाबहार बंदरगाह का भविष्य इस यात्रा के बाद और स्पष्ट हो सकता है।
चाबहार पोर्ट का भविष्य और भारत की रणनीति
चाबहार पोर्ट के माध्यम से भारत:
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अफगानिस्तान और मध्य एशिया के लिए सुरक्षित और विश्वसनीय व्यापार मार्ग सुनिश्चित कर सकता है।
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हिंद महासागर और खाड़ी देशों के साथ स्ट्रैटेजिक कनेक्टिविटी बढ़ा सकता है।
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यूरेशिया के बाजारों से रेयर अर्थ खनिज और अन्य सामग्रियों की आपूर्ति को आसान बना सकता है।
यह पोर्ट भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता और वैश्विक कनेक्टिविटी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहा है।
