रानीगांव प्राथमिक विद्यालय का औचक निरीक्षण, अधिकारियों ने जांचा शैक्षणिक स्तर और व्यवस्थाएं
छात्रों की पढ़ाई, पुस्तक वितरण और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की ली जानकारी
रानीगांव पिपलोदा (संवाददाता अर्जुन कुमावत)। क्षेत्र के शासकीय प्राथमिक विद्यालय रानीगांव में अधिकारियों द्वारा औचक निरीक्षण कर विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों और व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। बी.ए.सी. शांतिलाल देवड़ा, बी.ए.सी. बसंतीलाल सांसरी और सी.ए.सी. मोहन सिंह सोलंकी के नेतृत्व में पहुंचे निरीक्षण दल ने विद्यालय में संचालित गतिविधियों की बारीकी से समीक्षा की।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कक्षाओं में पहुंचकर छात्र-छात्राओं के शैक्षणिक स्तर की जांच की। साथ ही विद्यालय में पढ़ाई की स्थिति, शिक्षण व्यवस्था और शासन की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति को भी परखा गया।
छात्रों की शैक्षणिक क्षमता की हुई जांच
रानीगांव प्राथमिक विद्यालय के औचक निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता और शैक्षणिक स्तर का मूल्यांकन किया। निरीक्षण दल ने कक्षाओं में पहुंचकर बच्चों से विभिन्न विषयों से जुड़े प्रश्न पूछे और उनकी समझ, पठन क्षमता तथा विषय ज्ञान की जांच की।
इस दौरान कक्षा दूसरी और तीसरी की छात्रा दिव्यांशी ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। उसने हिंदी वाचन में स्पष्टता दिखाई और अंकों की पहचान के साथ-साथ सरल घटाव के प्रश्नों को भी आसानी से हल किया। छात्रा की सीखने की क्षमता और आत्मविश्वास देखकर अधिकारियों ने उसकी सराहना की।
निरीक्षण के दौरान दिव्यांशी ने चित्रों को देखकर अंग्रेजी में विभिन्न वस्तुओं के नाम भी बताए। इससे उसकी भाषा संबंधी समझ और सीखने की रुचि स्पष्ट दिखाई दी। अधिकारियों ने विद्यार्थियों की पठन क्षमता को संतोषजनक बताते हुए शिक्षकों के प्रयासों की सराहना की।
अधिकारियों ने शिक्षकों को निर्देश दिए कि वे बच्चों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी की क्षमता को पहचानकर उसे आगे बढ़ने के अवसर देना जरूरी है।
विद्यालय में बेहतर शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने, बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ाने और नियमित अभ्यास के माध्यम से उनकी क्षमताओं को विकसित करने पर भी जोर दिया गया। निरीक्षण दल ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से ही विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास संभव है।
पाठ्यपुस्तक वितरण और नामांकन प्रक्रिया की समीक्षा
निरीक्षण के दौरान विद्यालय में पाठ्यपुस्तकों का वितरण शत-प्रतिशत पूर्ण पाया गया। अधिकारियों ने विद्यालय स्टाफ को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि विद्यार्थियों से संबंधित सभी शैक्षणिक रिकॉर्ड को समय पर अपडेट किया जाए।
अधिकारियों ने ड्रॉप बॉक्स की सूची निकालकर छात्रों को सही स्कूल और कक्षा में समय पर इंपोर्ट करने के निर्देश दिए। साथ ही अपार आईडी से जुड़े लंबित संशोधनों को पूरा कर उन्हें जनरेट करने और नामांकन प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए भी कहा गया।
विद्यालय परिसर में किया पौधरोपण
पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से निरीक्षण दल ने विद्यालय परिसर में पौधरोपण भी किया। अधिकारियों ने पौधरोपण की फोटो वायुदूत ऐप पर अपलोड करने के निर्देश दिए और विद्यालय परिवार को पौधों की नियमित देखभाल करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए विद्यार्थियों को भी जागरूक करना जरूरी है, ताकि उनमें प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सके।
अधिकारियों और शिक्षकों की रही मौजूदगी
औचक निरीक्षण के अवसर पर बी.ए.सी. शांतिलाल देवड़ा, बी.ए.सी. बसंतीलाल सांसरी, सी.ए.सी. मोहन सिंह सोलंकी, प्रधानाध्यापक दयाल सिंह चंद्रावत, शिक्षक दीपक राठौड़ सहित विद्यालय के अन्य अधिकारी एवं शिक्षक उपस्थित रहे। निरीक्षण दल ने विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों, विद्यार्थियों की उपस्थिति, शिक्षण व्यवस्था और उपलब्ध संसाधनों की जानकारी ली।
अधिकारियों ने विद्यालय में संचालित गतिविधियों की समीक्षा करते हुए शिक्षकों से विद्यार्थियों के सीखने के स्तर को और बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयास करने की बात कही। उन्होंने कहा कि प्राथमिक शिक्षा बच्चों के भविष्य की मजबूत नींव होती है, इसलिए विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सभी शिक्षकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
निरीक्षण के दौरान विद्यालय की व्यवस्थाओं को संतोषजनक पाया गया। अधिकारियों ने शिक्षकों को निर्देश दिए कि वे बच्चों की व्यक्तिगत क्षमताओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करें। साथ ही पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों के सर्वांगीण विकास पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया।
अधिकारियों ने विद्यालय में अनुशासन, स्वच्छता और बेहतर शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने की सराहना की। उन्होंने कहा कि नियमित निरीक्षण का उद्देश्य कमियों को दूर कर शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाना है।
अंत में निरीक्षण दल ने विद्यालय परिवार को बेहतर कार्य के लिए प्रेरित करते हुए विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए लगातार समर्पण और मेहनत से कार्य करने का आह्वान किया।
