RakshaBandhan से पहले महंगाई की मार, चीनी-प्याज-दाल के बढ़ते दाम से बढ़ी चिंता
RakshaBandhan और आगामी त्योहारी सीजन से पहले आम लोगों के घरेलू बजट पर महंगाई का दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। रोजमर्रा की रसोई में इस्तेमाल होने वाली कई जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में हाल के दिनों में तेजी देखी गई है। चीनी, प्याज, दाल और खाद्य तेल के बढ़ते दामों ने परिवारों के मासिक खर्च को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। त्योहारों के दौरान इन वस्तुओं की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए आने वाले दिनों में कीमतों को लेकर लोगों की चिंता और बढ़ सकती है।
खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे एक ही कारण नहीं है। कहीं सप्लाई में कमी जिम्मेदार है तो कहीं मौसम और फसलों की आवक में देरी का असर देखने को मिल रहा है। इसके अलावा त्योहारों से पहले बाजार में मांग बढ़ने के कारण भी कीमतों पर दबाव बढ़ जाता है। सरकार की ओर से कीमतों को नियंत्रित करने और बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।
चीनी के दाम में तेज उछाल
चीनी की कीमतों में हाल के दिनों में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली है। बाजार में जमाखोरी की आशंका को भी इसकी एक प्रमुख वजह माना जा रहा है। कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए सरकार ने चीनी के स्टॉक को लेकर नियम सख्त किए हैं, ताकि व्यापारी और कारोबारी जरूरत से ज्यादा चीनी जमा न कर सकें।
बताया जा रहा है कि पिछले एक सप्ताह में चीनी की कीमत में करीब 7 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, एक महीने की अवधि में कीमत लगभग 17 रुपये प्रति किलो बढ़कर करीब 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। अगर त्योहारों के दौरान मांग में और इजाफा होता है, तो खुदरा बाजार में इसका असर और स्पष्ट दिखाई दे सकता है।
बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी है। इसके अलावा घरेलू उत्पादन और आपूर्ति को बेहतर बनाए रखने के लिए चीनी मिलों को इस साल 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। इन कदमों का उद्देश्य आने वाले महीनों में बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध कराना और कीमतों पर दबाव कम करना है।
प्याज की कीमतों में भी बढ़ोतरी
चीनी के साथ-साथ प्याज के दाम भी लोगों की चिंता बढ़ा रहे हैं। प्याज की कीमतों में पिछले कुछ सप्ताह से लगातार तेजी देखी गई है। इसकी प्रमुख वजह खरीफ प्याज की नई फसल की बाजार में आवक में देरी को माना जा रहा है। जब नई फसल समय पर बाजार में नहीं पहुंचती, तो उपलब्ध स्टॉक पर दबाव बढ़ जाता है और इसका असर खुदरा कीमतों पर पड़ता है।
21 अगस्त को प्याज का औसत खुदरा भाव करीब 40.79 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया था। एक सप्ताह पहले इसकी कीमत लगभग 36.56 रुपये प्रति किलो थी। वहीं, एक महीने पहले प्याज करीब 34.87 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रहा था। यानी कुछ ही हफ्तों में प्याज की कीमत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
प्याज की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार अपने बफर स्टॉक का इस्तेमाल कर बाजार में अतिरिक्त प्याज उपलब्ध कराने की कोशिश कर रही है। यदि नई खरीफ फसल की आवक में सुधार होता है, तो आने वाले समय में कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद की जा सकती है।
दालों के दाम भी बढ़े
भारतीय रसोई में दाल रोजाना के भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में दालों की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी भी घरेलू बजट पर असर डालती है। पिछले एक महीने में अरहर, मूंग, उड़द और चना जैसी प्रमुख दालों की कीमतों में लगभग 1 से 2 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
दालों की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे मानसून और दलहन की बुवाई की स्थिति को महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन पर मौसम का सीधा असर पड़ता है। यदि मानसून कमजोर रहता है या बारिश का वितरण सामान्य नहीं रहता, तो दलहन उत्पादन प्रभावित हो सकता है। ऐसी स्थिति में आने वाले महीनों में दालों की कीमतों पर और दबाव देखने को मिल सकता है।
त्योहारों से पहले क्यों बढ़ती है महंगाई?
RakshaBandhan जैसे त्योहारों के साथ ही देश में त्योहारी सीजन की शुरुआत हो जाती है। इस दौरान मिठाइयों, पकवानों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। चीनी, खाद्य तेल और दाल जैसी वस्तुओं की खपत भी बढ़ती है। अगर इसी समय किसी फसल की आपूर्ति मौसम या अन्य कारणों से प्रभावित हो जाए, तो मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन पैदा हो जाता है। इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ता है।
हालांकि, मौजूदा समय में सभी वस्तुओं की कीमत बढ़ने की वजह एक जैसी नहीं है। चीनी के मामले में जमाखोरी और सप्लाई से जुड़ी चिंताएं हैं, जबकि प्याज के लिए नई फसल की आवक में देरी अहम कारण है। वहीं, दालों की कीमतों पर मानसून और बुवाई की स्थिति का प्रभाव पड़ रहा है।
सरकार की नजर कीमतों पर
बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने और बाजार में उपलब्धता बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। चीनी के आयात की अनुमति, चीनी मिलों को जल्द पेराई शुरू करने के निर्देश और प्याज के बफर स्टॉक को बाजार में उतारने जैसे कदम इसी दिशा में उठाए गए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आने वाले त्योहारी दिनों में इन उपायों का कितना असर दिखाई देता है। यदि बाजार में पर्याप्त सप्लाई बनी रहती है और मौसम फसलों के लिए अनुकूल रहता है, तो खाद्य वस्तुओं की कीमतों में स्थिरता आ सकती है। लेकिन मांग में तेज बढ़ोतरी और सप्लाई में कमी बनी रही तो घरेलू बजट पर महंगाई का दबाव आगे भी जारी रह सकता है।
फिलहाल रक्षाबंधन से पहले चीनी, प्याज, दाल और खाद्य तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम परिवारों की चिंता जरूर बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में बाजार की स्थिति, फसलों की आवक और सरकार के कदम यह तय करेंगे कि त्योहारी सीजन में रसोई के खर्च को कितनी राहत मिल पाती है।
