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ग्वालियर में इंद्रध्वज महामंडल विधान का आध्यात्मिक उल्लास: इंद्र-इंद्राणियों ने जिनालयों पर चढ़ाई ध्वजाएं, भक्ति और श्रद्धा से गूंजा परिसर

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Published On: 23 July 2026
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ग्वालियर में इंद्रध्वज महामंडल विधान का आध्यात्मिक उल्लास: इंद्र-इंद्राणियों ने जिनालयों पर चढ़ाई ध्वजाएं, भक्ति और श्रद्धा से गूंजा परिसर

श्री वासुपूज्य जैन महिला मंडल एवं दिगंबर जैन मंदिर कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में तीसरे दिन हुआ इंद्रध्वज विधान, भगवान जिनेंद्र का अभिषेक और विशेष पूजन आकर्षण का केंद्र रहा

ग्वालियर | संवाददाता

ग्वालियर में आयोजित इंद्रध्वज महामंडल विधान एवं वीर शासन जयंती महोत्सव के तीसरे दिन गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिला। किलागेट, सोड़ा का कुआं स्थित दिगंबर जैन मंदिर परिसर में श्री वासुपूज्य जैन महिला मंडल एवं दिगंबर जैन मंदिर कमेटी, ग्वालियर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। विधान के दौरान इंद्र-इंद्राणियों ने भगवान जिनेंद्र की विशेष पूजा-अर्चना की, जिनालयों पर ध्वजाएं चढ़ाईं तथा भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की।

पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर रहा। मंगल ध्वनि, मंत्रोच्चार, भक्ति गीतों और जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने अष्टद्रव्य पूजन, अभिषेक और भक्ति कार्यक्रमों में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

तीसरे दिन इंद्रध्वज विधान में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

इंद्रध्वज महामंडल विधान के तीसरे दिन सुबह से ही श्रद्धालुओं का मंदिर परिसर में आगमन शुरू हो गया। कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण और विधिवत पूजन से हुई। इसके बाद इंद्र-इंद्राणियों ने भगवान जिनेंद्र की आराधना करते हुए जिनालयों पर ध्वजाएं अर्पित कीं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इंद्रध्वज विधान में ध्वजा अर्पित करना धर्म, श्रद्धा और विजय का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए सामूहिक रूप से पूजन में भाग लिया।

इंद्र-इंद्राणियों ने की भगवान जिनेंद्र की विशेष पूजा

विधान के दौरान विभिन्न पात्रों के रूप में सुसज्जित इंद्र और इंद्राणियों ने भगवान जिनेंद्र की विधिवत पूजा की। पारंपरिक जैन रीति-रिवाजों के अनुसार नवदेवता पूजन, पंच मेरु जिनालयों की पूजा तथा अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया।

पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने अष्टद्रव्यों से भगवान की आराधना की और धर्म लाभ प्राप्त किया। आयोजन स्थल पर उपस्थित श्रद्धालु पूरे समय भक्ति और आध्यात्मिक भाव में लीन दिखाई दिए।

अनेक पवित्र जिनालयों की सामूहिक आराधना

जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि विधान के दौरान श्रद्धालुओं ने धार्मिक परंपराओं के अनुरूप विभिन्न पवित्र जिनालयों एवं तीर्थ स्थलों का प्रतीकात्मक पूजन किया।

इसमें प्रमुख रूप से—

  • पंच मेरु जिनालय
  • नंदीश्वर द्वीप
  • मानुषोत्तर पर्वत
  • गजदंत पर्वत
  • कुलाचल पर्वत
  • भद्रशाल वन
  • नंदन वन
  • पांडुक वन
  • सौमनस वन

तथा चारों दिशाओं में स्थित अकृत्रिम जिनालयों एवं जिनबिंबों की श्रद्धापूर्वक पूजा की गई।

पूजन के दौरान अष्टद्रव्यों से भगवान की आराधना करते हुए श्रद्धालुओं ने जयमाला अर्पित की और सिद्ध भगवान को अर्घ्य समर्पित किया।

ध्वजारोहण बना श्रद्धा का केंद्र

इंद्रध्वज विधान का सबसे आकर्षक और महत्वपूर्ण आयोजन जिनालयों पर ध्वजाएं चढ़ाने का रहा।

इंद्र, इंद्राणियों, महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने सामूहिक रूप से मंडप में स्थापित जिन मंदिरों पर धार्मिक ध्वजाएं अर्पित कीं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिनालय पर ध्वजा चढ़ाना धर्म की विजय, आस्था की अभिव्यक्ति और आत्मकल्याण की भावना का प्रतीक माना जाता है।

ध्वजारोहण के दौरान पूरा परिसर “जय जिनेंद्र” और धार्मिक जयघोषों से गूंज उठा।

भगवान जिनेंद्र का हुआ भव्य अभिषेक

कार्यक्रम के दौरान भगवान महावीर स्वामी एवं भगवान आदिनाथ का विशेष अभिषेक भी किया गया।

जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि विधानाचार्य पंडित अंकुर शास्त्री के मंत्रोच्चार के बीच सौधर्म इंद्र सहित अन्य इंद्रों ने पीले वस्त्र धारण कर हाथों में कलश लेकर भगवान का जलाभिषेक किया।

अभिषेक के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों और जयकारों के बीच भगवान के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

भगवान को सिंहासन पर विराजित किया गया

अभिषेक के पश्चात भगवान जिनेंद्र को विधिपूर्वक सिंहासन पर विराजित किया गया।

पूरे धार्मिक अनुष्ठान के दौरान वातावरण अत्यंत भक्तिमय बना रहा। मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालु मंत्रोच्चार, स्तुति और आराधना में तल्लीन दिखाई दिए।

इस अवसर पर अनेक श्रद्धालुओं ने भगवान के समक्ष परिवार, समाज और विश्व के कल्याण की कामना भी की।

सैकड़ों श्रद्धालुओं की रही सहभागिता

आयोजन में ग्वालियर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

महिलाएं, पुरुष, युवा और बच्चे सभी ने धार्मिक अनुष्ठानों में सक्रिय सहभागिता निभाई।

पूरे दिन मंदिर परिसर में दर्शन, पूजन, आरती और भक्ति कार्यक्रमों का क्रम चलता रहा।

श्रद्धालुओं ने आयोजन की उत्कृष्ट व्यवस्थाओं की भी सराहना की।

विधानाचार्य अंकुर शास्त्री ने दिया आध्यात्मिक संदेश

धर्मसभा को संबोधित करते हुए विधानाचार्य पंडित अंकुर शास्त्री ने भक्ति के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि—

भक्ति आत्मा को मोक्ष के मार्ग की ओर अग्रसर करने का सबसे श्रेष्ठ साधन है।

उन्होंने बताया कि इंद्रध्वज विधान केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, वैराग्य और आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम है।

उन्होंने कहा कि जब श्रद्धालु पूर्ण श्रद्धा और निर्मल भाव से भगवान की पूजा करते हैं तो उनके भीतर सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक चेतना का विकास होता है।

भक्ति से जागृत होती है वीतरागता

पंडित अंकुर शास्त्री ने कहा कि जैन दर्शन में भक्ति का उद्देश्य केवल पूजा करना नहीं बल्कि आत्मा को वीतरागता की ओर ले जाना है।

उन्होंने कहा कि निष्काम भाव से की गई आराधना मन को शुद्ध करती है और व्यक्ति के भीतर संयम, करुणा तथा आत्मकल्याण की भावना विकसित करती है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे धार्मिक आयोजनों में केवल औपचारिक भागीदारी तक सीमित न रहें बल्कि उनके आध्यात्मिक संदेशों को अपने जीवन में भी अपनाएं।

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अनेक गणमान्य लोग रहे उपस्थित

इस धार्मिक आयोजन में जैन समाज के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी एवं समाजजन उपस्थित रहे।

मुख्य रूप से—

  • मंदिर अध्यक्ष सतीश चंद्र जैन (ठेकेदार)
  • मंत्री नेमीचंद्र जैन
  • सुरेंद्र जैन
  • राजेंद्र जैन
  • अभिषेक जैन
  • देव जैन

सहित बड़ी संख्या में समाज के वरिष्ठजन एवं श्रद्धालु मौजूद रहे।

वीर शासन जयंती महोत्सव के तहत जारी हैं धार्मिक आयोजन

आयोजकों ने बताया कि इंद्रध्वज महामंडल विधान एवं वीर शासन जयंती महोत्सव के अंतर्गत आगामी दिनों में भी विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

इन कार्यक्रमों में पूजन, अभिषेक, प्रवचन, भक्ति संध्या, धार्मिक प्रतियोगिताएं तथा समाज की सहभागिता वाले अनेक आयोजन शामिल हैं।

समिति ने सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्म लाभ लेने की अपील की है।

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आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर रहा मंदिर परिसर

पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धा, अनुशासन और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।

धार्मिक ध्वजाओं से सुसज्जित मंडप, भगवान जिनेंद्र की भव्य प्रतिमाएं, मंत्रोच्चार, संगीत और सामूहिक आराधना ने आयोजन को अत्यंत दिव्य बना दिया।

श्रद्धालुओं ने इसे आत्मिक शांति और धार्मिक प्रेरणा प्रदान करने वाला आयोजन बताया।

निष्कर्ष

ग्वालियर में आयोजित इंद्रध्वज महामंडल विधान एवं वीर शासन जयंती महोत्सव का तीसरा दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इंद्र-इंद्राणियों द्वारा भगवान जिनेंद्र की पूजा, जिनालयों पर ध्वजारोहण, भगवान का अभिषेक और धर्मसभा में दिए गए आध्यात्मिक संदेशों ने श्रद्धालुओं को धर्म, संयम और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता ने जैन समाज की धार्मिक एकजुटता और आस्था को भी सशक्त रूप से प्रदर्शित किया।

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