Indore में बदहाल सड़कों का संकट: गड्ढों से बढ़ी हादसों की आशंका, करोड़ों खर्च के बावजूद हालात जस के तस
Indore मध्य प्रदेश के प्रमुख शहर इंदौर में विकास के नाम पर लगातार नई सड़कें, फ्लाईओवर और अन्य अधोसंरचना परियोजनाएं बनाई जा रही हैं, लेकिन शहर की कई प्रमुख और अंदरूनी सड़कों की स्थिति इसके उलट नजर आ रही है। रिंग रोड और बायपास जैसे कुछ मार्गों को छोड़ दिया जाए तो कई इलाकों में सड़कें गड्ढों और उखड़ी सतह के कारण वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं। बारिश के मौसम में इन गड्ढों में पानी भर जाने से खतरा और बढ़ जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि खराब सड़कों के कारण रोजाना आवागमन प्रभावित हो रहा है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। अचानक सामने आने वाले गड्ढों से बचने के प्रयास में वाहन अनियंत्रित होने और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। कई जगह सड़क की खराब स्थिति के कारण यातायात की गति भी प्रभावित होती है।
हर साल गड्ढे भरने पर करोड़ों रुपये खर्च
सड़कों की मरम्मत और गड्ढों के भराव के लिए सरकारी एजेंसियों द्वारा हर वर्ष बड़ी राशि खर्च किए जाने का दावा किया जाता है। अकेले नगर निगम द्वारा गड्ढों की मरम्मत और भराव पर करीब 50 करोड़ रुपये तक खर्च किए जाने की बात सामने आई है। इसके अलावा लोक निर्माण विभाग (PWD) और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) जैसी अन्य एजेंसियां भी अपने-अपने हिस्से की सड़कों के रखरखाव पर खर्च करती हैं।
इसके बावजूद समस्या स्थायी रूप से खत्म होती नजर नहीं आ रही है। बारिश के दौरान कई सड़कों पर नए गड्ढे बन जाते हैं और पुराने गड्ढे और गहरे हो जाते हैं। इससे सवाल उठता है कि बार-बार मरम्मत के बावजूद सड़कों की गुणवत्ता और टिकाऊपन सुनिश्चित क्यों नहीं हो पा रहा है।
निर्माण कार्य वाले क्षेत्रों में ज्यादा परेशानी
Indore में जहां फ्लाईओवर या बड़े निर्माण कार्य चल रहे हैं, वहां सर्विस रोड की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। नियमों के अनुसार किसी बड़े निर्माण कार्य के दौरान आम लोगों की आवाजाही के लिए पर्याप्त और सुरक्षित सर्विस रोड उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
मूसाखेड़ी, सत्यसाई चौराहा और देवास नाका जैसे क्षेत्रों में निर्माण कार्य के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित होने के साथ सर्विस रोड की खराब स्थिति भी लोगों के लिए परेशानी पैदा कर रही है। जगह-जगह गड्ढे, कीचड़ और असमतल सड़क के कारण वाहन चालकों को धीमी गति से गुजरना पड़ता है।
विशेषकर बारिश के दौरान स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है। सड़क पर पानी जमा होने से गड्ढों की गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता। ऐसे में दोपहिया वाहन चालक अचानक संतुलन खो सकते हैं।
बैठकों के बावजूद नहीं निकला स्थायी समाधान
शहर की सड़कों की स्थिति सुधारने के लिए प्रशासन और निर्माण एजेंसियों के बीच कई बार बैठकें हो चुकी हैं। लगभग 11 महीने पहले प्रमुख सचिव स्तर की बैठक में भी खराब सड़कों का मुद्दा उठाया गया था। जनप्रतिनिधियों ने निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली और सड़क रखरखाव को लेकर सवाल उठाए थे।
इसके बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई देने की शिकायतें सामने आ रही हैं। अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों के बीच जिम्मेदारी को लेकर समन्वय की कमी भी समस्या का एक कारण मानी जा रही है।
सड़क सुरक्षा समिति ने भी जताई थी चिंता
Indore में सड़कों की स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष और पूर्व न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने भी चिंता जताई थी। उनके इंदौर दौरे के दौरान रिंग रोड और बायपास सहित कई मार्गों की स्थिति पर सवाल उठाए गए थे।
उन्होंने संबंधित नगर निगम और निर्माण एजेंसियों को निर्धारित समय सीमा में सड़कों के गड्ढे भरने और सड़क सुरक्षा से जुड़े आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में गड्ढों की समस्या बनी हुई है।
बारिश ने बढ़ाई समस्या
मानसून के दौरान सड़कों की स्थिति तेजी से खराब होने की एक बड़ी वजह लगातार बारिश भी है। सड़क की सतह के नीचे पानी पहुंचने से उसकी मजबूती प्रभावित होती है और भारी वाहनों की आवाजाही के कारण सड़क टूटने लगती है। यदि समय पर जल निकासी और गुणवत्तापूर्ण मरम्मत नहीं की जाए तो छोटे गड्ढे कुछ ही समय में बड़े गड्ढों में बदल सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार केवल गड्ढे भरना स्थायी समाधान नहीं है। सड़क की खराब सतह का कारण तलाशना, जल निकासी व्यवस्था सुधारना, गुणवत्तापूर्ण सामग्री का इस्तेमाल करना और नियमित निरीक्षण जरूरी है।
लोगों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल
Indore को देश के स्वच्छ शहरों में अग्रणी पहचान मिली है, लेकिन सड़क सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं शहर की इस छवि के लिए चुनौती बन रही हैं। नागरिकों का कहना है कि विकास परियोजनाओं के साथ मौजूदा सड़कों के रखरखाव पर भी उतना ही ध्यान दिया जाना चाहिए।
सड़क के गड्ढे केवल यातायात की समस्या नहीं हैं, बल्कि ये सीधे लोगों की सुरक्षा से जुड़े हैं। खासकर रात के समय या बारिश के दौरान गड्ढों का पता लगाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि करोड़ों रुपये खर्च करने और लगातार बैठकों के बावजूद इंदौर की सड़कों की समस्या कब स्थायी रूप से दूर होगी। शहरवासियों को उम्मीद है कि संबंधित एजेंसियां केवल अस्थायी पैचवर्क के बजाय गुणवत्तापूर्ण और टिकाऊ सड़क मरम्मत पर ध्यान देंगी, ताकि बारिश के बाद हर साल वही समस्या दोबारा सामने न आए।
