Indore में घायल तेंदुए के इलाज से चिड़ियाघर का इनकार, वन विभाग और प्राणी संग्रहालय आमने-सामने
मध्यप्रदेश के Indore में घायल वन्यजीवों के इलाज को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में वन विभाग द्वारा रेस्क्यू किए गए एक घायल तेंदुए को इलाज के लिए जब Indore के कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय (चिड़ियाघर) ले जाया गया, तो वहां मौजूद कर्मचारियों ने तेंदुए को रखने और उसका उपचार करने से साफ इनकार कर दिया। इस घटना के बाद वन विभाग और चिड़ियाघर प्रबंधन के बीच टकराव की स्थिति बन गई, जिसने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया है।
इलाज के बिना लौटाया गया घायल तेंदुआ
जानकारी के अनुसार, Indore रालामंडल अभयारण्य क्षेत्र में एक घायल तेंदुआ देखा गया था, जिसके बाद वन विभाग की रेस्क्यू टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे सुरक्षित पकड़ लिया। प्राथमिक जांच में तेंदुआ गंभीर रूप से घायल पाया गया, जिसके चलते टीम उसे तत्काल इलाज के लिए इंदौर के कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय लेकर पहुंची। हालांकि, चिड़ियाघर पहुंचने के बाद टीम को निराशा हाथ लगी। वहां मौजूद स्टाफ ने तेंदुए को रखने और इलाज करने से मना कर दिया। कर्मचारियों का कहना था कि वाइल्ड एनिमल स्पेशलिस्ट डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए वे इलाज करने में असमर्थ हैं। मजबूरी में वन विभाग की टीम को घायल तेंदुए को बिना इलाज के वापस रालामंडल अभयारण्य ले जाना पड़ा।

चिड़ियाघर प्रबंधन का पक्ष
इस पूरे मामले पर Indore चिड़ियाघर प्रबंधन की ओर से सफाई दी गई है। प्राणी संग्रहालय के अधिकारी राकेश यादव ने बताया कि वन्यजीवों के इलाज के लिए नियुक्त विशेषज्ञ डॉक्टर पारिवारिक कारणों से अवकाश पर हैं। उन्होंने कहा, हमारे वाइल्ड एनिमल स्पेशलिस्ट डॉक्टर के परिवार में निधन हुआ है, जिसकी वजह से वह छुट्टी पर हैं। विशेषज्ञ डॉक्टर के बिना तेंदुए जैसे संवेदनशील वन्यजीव का इलाज करना जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए यह निर्णय लिया गया। चिड़ियाघर प्रबंधन का कहना है कि वे किसी भी वन्यजीव की जान से खिलवाड़ नहीं करना चाहते और विशेषज्ञ की अनुपस्थिति में उपचार संभव नहीं था।
वन विभाग ने जताई कड़ी नाराजगी
इस घटना के बाद वन विभाग के अधिकारियों ने चिड़ियाघर प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रालामंडल के एसडीओ दिनेश कटारा ने खुलकर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह पहली बार नहीं है जब चिड़ियाघर ने घायल वन्यजीव के इलाज से इनकार किया हो। दिनेश कटारा ने कहा, चिड़ियाघर को घायल और बीमार वन्यजीवों के इलाज और अस्थायी रखरखाव के लिए अधिकृत किया गया है। लेकिन जब भी हम किसी घायल वन्यजीव को वहां लेकर जाते हैं, तो स्टाफ कोई न कोई बहाना बना देता है। इस बार भी वही रवैया देखने को मिला। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की लापरवाही से वन्यजीवों की जान खतरे में पड़ जाती है और यह संरक्षण के मूल उद्देश्य के खिलाफ है।
फिलहाल रालामंडल में निगरानी में तेंदुआ
वर्तमान में घायल तेंदुए को रालामंडल अभयारण्य में रखा गया है, जहां वन विभाग के कर्मचारी उसकी लगातार निगरानी कर रहे हैं। प्राथमिक उपचार और देखरेख के बाद उसे आगे के इलाज के लिए महू स्थित वेटरनरी अस्पताल ले जाने की तैयारी की जा रही है। वन विभाग का कहना है कि तेंदुए की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जल्द से जल्द बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
क्यों जरूरी है Indore में अलग रेस्क्यू सेंटर?
इस घटना ने एक बार फिर Indore में स्वतंत्र वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर की जरूरत को रेखांकित कर दिया है। Indore वनमंडल में पिछले कुछ वर्षों में तेंदुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। इसके साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ी हैं। डीएफओ प्रदीप मिश्रा के अनुसार, तेंदुओं के लिए सबसे बड़ा खतरा शिकारियों के अलावा ग्रामीण इलाकों में लगाए गए अवैध बिजली के तार और खुले कुएं हैं। खेतों को जंगली सूअरों से बचाने के लिए लगाए गए करंट वाले तार कई बार तेंदुओं की जान के लिए घातक साबित होते हैं उन्होंने कहा, अब तक वन विभाग घायल वन्यजीवों के इलाज और देखभाल के लिए पूरी तरह चिड़ियाघर पर निर्भर था। लेकिन बार-बार आने वाली समस्याओं के कारण विभाग ने अपना खुद का रेस्क्यू सेंटर स्थापित करने का फैसला लिया है।
5 साल में 67 तेंदुओं का रेस्क्यू
आंकड़े बताते हैं कि Indore वन विभाग की टीम ने पिछले पांच वर्षों में कुल 67 तेंदुओं का सफल रेस्क्यू किया है। इनमें से कई तेंदुए गंभीर रूप से घायल अवस्था में पाए गए थे। वन विभाग की टीम को न सिर्फ Indore शहर, बल्कि महू, चोरल, मानपुर और संभाग के अन्य जिलों में भी रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए जाना पड़ता है। लगातार बढ़ते रेस्क्यू ऑपरेशन के कारण विभाग को विशेषज्ञ डॉक्टरों, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और पर्याप्त जगह की भारी कमी महसूस हो रही है।
नया रेस्क्यू सेंटर देगा समाधान
प्रस्तावित रेस्क्यू सेंटर में घायल वन्यजीवों के इलाज, अस्थायी रखरखाव और पुनर्वास की पूरी व्यवस्था होगी। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति की जाएगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत इलाज संभव हो सके। वन विभाग का मानना है कि इस सेंटर के शुरू होने से न केवल तेंदुओं बल्कि अन्य वन्यजीवों के संरक्षण में भी मदद मिलेगी और चिड़ियाघर पर निर्भरता कम होगी।
