इंदौर में गुरु भक्ति का अनुपम उदाहरण: चांदमल-लेखराज पोरवाल अगरबत्ती परिवार ने चातुर्मास 2026 के लिए समर्पित किए दो कक्ष
संवाददाता: प्रमोद कुमार जैन
मालवा की सांस्कृतिक एवं धार्मिक राजधानी इंदौर में गुरु-भक्ति, संघ-सेवा और धर्म प्रभावना का एक प्रेरणादायी उदाहरण सामने आया है। जैन समाज के प्रतिष्ठित एवं देशभर में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले चांदमल-लेखराज पोरवाल अगरबत्ती परिवार ने चातुर्मास-2026 के अवसर पर अपनी गहरी आस्था और गुरु-समर्पण का परिचय देते हुए साध्वीजी भगवंत के निवास के लिए अपने भवन के नीचे स्थित दो कक्ष पूरे चार माह के लिए समर्पित कर दिए।
यह केवल स्थान उपलब्ध कराने का कार्य नहीं, बल्कि गुरु-सेवा, त्याग, श्रद्धा और धार्मिक समर्पण का ऐसा उदाहरण है, जिसकी समाज के विभिन्न वर्गों में सराहना की जा रही है। जैन समाज के वरिष्ठजनों का मानना है कि ऐसे कार्य समाज में धर्म के प्रति आस्था को मजबूत करते हैं और नई पीढ़ी को सेवा, संस्कार तथा समर्पण की प्रेरणा देते हैं।
गुरु-पूजन के लिए आचार्य भगवंत का किया भावपूर्ण स्वागत
चातुर्मास के शुभ अवसर पर पोरवाल परिवार ने युगप्रभावक, पुण्यसम्राट, राष्ट्रसंत पूज्य आचार्यदेव श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी महाराजा के पट्टधर एवं गच्छाधिपति पूज्य आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी म.सा. को अपने निवास पर गुरु-पूजन के लिए सादर आमंत्रित किया।
परिवार ने अत्यंत श्रद्धा, विनम्रता और धार्मिक भावना के साथ गुरु का स्वागत किया। गुरु-पूजन के दौरान आध्यात्मिक वातावरण में श्रद्धालुओं ने धर्म लाभ प्राप्त किया और आचार्य भगवंत का आशीर्वाद लिया।
कार्यक्रम के दौरान गुरु के प्रति समर्पण, सेवा और श्रद्धा की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
चातुर्मास के लिए दो कक्ष किए समर्पित
गुरु-भक्ति का सबसे प्रेरणादायी पहलू तब सामने आया जब चांदमल-लेखराज पोरवाल अगरबत्ती परिवार ने पूज्य साध्वीजी भगवंत के चातुर्मास प्रवास हेतु अपने भवन के नीचे स्थित दो कक्ष चार माह के लिए समर्पित करने की घोषणा की।
यह निर्णय समाज में सेवा और धर्म के प्रति परिवार की निष्ठा को दर्शाता है। चातुर्मास के दौरान साध्वीजी भगवंत इन कक्षों में निवास करेंगे और श्रद्धालुओं को धर्मोपदेश, स्वाध्याय तथा आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।
जैन समाज के अनुसार यह सेवा केवल आवास उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि गुरु और संघ के प्रति गहन श्रद्धा एवं समर्पण का प्रतीक है।
जैन धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व
जैन परंपरा में चातुर्मास अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक काल माना जाता है। वर्षा ऋतु के दौरान साधु-साध्वी एक ही स्थान पर निवास कर धर्म प्रचार, प्रवचन, स्वाध्याय और तप-आराधना करते हैं।
इस अवधि में श्रद्धालुओं को संतों के सान्निध्य में रहकर धर्म सुनने, आत्मचिंतन करने और अपने आध्यात्मिक जीवन को समृद्ध बनाने का अवसर मिलता है।
इसी कारण समाज में चातुर्मास के लिए स्थान, भोजन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को धर्म सेवा का श्रेष्ठ कार्य माना जाता है।
गुरु-भक्ति का दिया प्रेरणादायी संदेश
पोरवाल परिवार के इस समर्पण ने यह संदेश दिया कि गुरु के प्रति श्रद्धा केवल शब्दों से नहीं, बल्कि सेवा, त्याग और समर्पण से प्रकट होती है।
जैन समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने कहा कि जब परिवार अपने निजी संसाधनों को धर्म और समाज के लिए समर्पित करता है, तब वह केवल धार्मिक परंपरा का निर्वहन नहीं करता बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक आदर्श स्थापित करता है।
समाज ने की मुक्तकंठ से सराहना
इस पुण्य कार्य की अखिल भारतीय श्री राजेन्द्र जैन नवयुवक परिषद सहित समस्त जैन समाज ने भूरी-भूरी प्रशंसा की।
समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि—
- यह गुरु-भक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण है।
- संघ-सेवा की सच्ची भावना इसी प्रकार के कार्यों से प्रकट होती है।
- धर्म प्रभावना के लिए ऐसे समर्पित परिवार समाज की अमूल्य धरोहर हैं।
- सेवा और त्याग का यह भाव समाज में धार्मिक चेतना को मजबूत करता है।
समाजजनों ने परिवार की भावपूर्ण अनुमोदना करते हुए उनके सुख, समृद्धि, धार्मिक उन्नति और मंगलमय जीवन की कामना की।
ब्रजेश बोहरा ने दी चातुर्मास की जानकारी
अखिल भारतीय श्री राजेन्द्र जैन नवयुवक परिषद के मीडिया प्रभारी ब्रजेश बोहरा ने बताया कि—
पूज्य आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी म.सा. आदि ठाणा का चातुर्मास-2026 इंदौर स्थित श्री गुरुराज जयन्तसेन आराधना मण्डपम्, केसरी वाटिका, एयरपोर्ट रोड पर आयोजित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि यह स्थान चांदमल-लेखराज पोरवाल अगरबत्ती परिवार के निवास के निकट स्थित है, जिससे साध्वीजी भगवंत के निवास और श्रद्धालुओं के आवागमन में भी सुविधा रहेगी।
श्रद्धालुओं को मिलेगा धर्म आराधना का लाभ
चातुर्मास अवधि में प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें—
- गुरु दर्शन
- प्रवचन
- सामूहिक आराधना
- स्वाध्याय
- जैन आगम अध्ययन
- तप एवं साधना
- धार्मिक संस्कार कार्यक्रम
आदि शामिल रहेंगे।
इससे इंदौर सहित आसपास के क्षेत्रों के हजारों श्रद्धालुओं को नियमित रूप से धर्म लाभ प्राप्त होगा।
गुरु-सेवा को जैन परंपरा में सर्वोच्च स्थान
जैन धर्म में गुरु को आत्मकल्याण का मार्ग दिखाने वाला सर्वोच्च मार्गदर्शक माना गया है।
गुरु-सेवा का अर्थ केवल सम्मान करना नहीं बल्कि उनके धर्मकार्य में सहयोग देना, संघ की सेवा करना और धर्म प्रभावना में अपना योगदान देना भी है।
चांदमल-लेखराज पोरवाल परिवार का यह समर्पण इसी आदर्श का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया है।
समर्पण से मजबूत होती हैं धार्मिक परंपराएं
धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि समाज की धार्मिक परंपराएं केवल मंदिरों या आयोजनों से नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के सेवा भाव और समर्पण से जीवित रहती हैं।
जब परिवार स्वेच्छा से अपने संसाधनों को धर्म के लिए उपलब्ध कराते हैं, तब समाज में सहयोग, एकता और आध्यात्मिक चेतना का विस्तार होता है।
ऐसे कार्य युवाओं को भी प्रेरित करते हैं कि वे अपनी संस्कृति, परंपरा और धार्मिक मूल्यों से जुड़े रहें।
धर्म, सेवा और संस्कार का बना प्रेरक संदेश
इंदौर में चांदमल-लेखराज पोरवाल अगरबत्ती परिवार द्वारा चातुर्मास-2026 के लिए दो कक्ष समर्पित करना केवल एक धार्मिक व्यवस्था नहीं, बल्कि गुरु-भक्ति, संघ-सेवा, त्याग और समर्पण की जीवंत मिसाल है।
यह पहल जैन समाज में सेवा की उस परंपरा को आगे बढ़ाती है, जिसमें व्यक्तिगत सुविधा से ऊपर उठकर धर्म और समाज को प्राथमिकता दी जाती है। समाज के वरिष्ठजनों का मानना है कि ऐसे प्रेरणादायी कार्य आने वाली पीढ़ियों को धार्मिक संस्कारों से जोड़ने के साथ-साथ समाज में सहयोग, समर्पण और आध्यात्मिक चेतना को भी नई दिशा देते हैं। चातुर्मास के दौरान श्रद्धालुओं को गुरु दर्शन, प्रवचन और धर्म आराधना का सतत लाभ मिलेगा, जिससे इंदौर का धार्मिक वातावरण और अधिक आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायी बनेगा।
