गच्छाधिपति श्रीमद् विजय नित्य सेन सुरिश्वरजी महाराज के चातुर्मास प्रवेश पर उमड़ा आस्था का सैलाब, इंदौर में निकला पांच किलोमीटर लंबा भव्य चल समारोह
इंदौर। महिदपुर रोड स्थित इंदौर की पावन धरती रविवार को उस समय भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर हो गई, जब पुण्य सम्राट के आज्ञानुवर्तिनीय गच्छाधिपति श्रीमद् विजय नित्य सेन सुरिश्वरजी महाराज साहब के सान्निध्य में साधु-साध्वी भगवंतों का भव्य चातुर्मास प्रवेश संपन्न हुआ। इस अवसर पर इंदौर सहित देश के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु, गुरु भक्त और जैन समाज के सदस्य उपस्थित रहे। पूरे नगर में आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला और श्रद्धालुओं ने जगह-जगह अक्षत, गहूली एवं पुष्पवर्षा कर गुरुदेव का अभिनंदन किया।
गुरुदेव के चातुर्मास प्रवेश को लेकर इंदौर श्रीसंघ द्वारा पिछले एक माह से व्यापक तैयारियां की जा रही थीं। उन्हीं तैयारियों का परिणाम था कि प्रवेश यात्रा ऐतिहासिक और अभूतपूर्व बन गई। श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। महिलाओं, पुरुषों, युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने पूरे समर्पण भाव से इस धार्मिक आयोजन में भाग लेकर इसे यादगार बना दिया।
पांच किलोमीटर लंबा भव्य चल समारोह बना आकर्षण का केंद्र
चातुर्मास प्रवेश स्थल से आराधना स्थल तक लगभग पांच किलोमीटर लंबा विशाल चल समारोह निकाला गया। यात्रा जिस मार्ग से गुजरी, वहां श्रद्धालुओं ने पलक-पांवड़े बिछाकर गुरुदेव का स्वागत किया।
मार्ग में अनेक स्थानों पर समाजजनों ने अक्षत, गहूली, पुष्पवर्षा और मंगल आरती के साथ साधु-साध्वी भगवंतों का अभिनंदन किया। पूरा वातावरण “जय-जयकार पुण्य सम्राट”, “गुरुदेव की जय” और धार्मिक उद्घोषों से गूंज उठा।
चल समारोह में शामिल श्रद्धालुओं के चेहरों पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम दिखाई दे रहा था। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा इंदौर नगर धर्म और अध्यात्म की शरण में समर्पित हो गया हो।
महिला मंडल, युवा और बच्चों ने बढ़ाया आयोजन का गौरव
प्रवेश यात्रा में समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। महिला मंडल निर्धारित ड्रेस कोड में शामिल होकर गुरु भक्ति के गीत गा रहा था, जबकि युवा वर्ग उत्साह के साथ धार्मिक जयघोष कर रहा था।
“गुरुजी हमारे आए हैं, नई रोशनी लाए हैं” तथा “जय-जयकार पुण्य सम्राट की जय” जैसे नारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
बैंड-बाजों और ढोल की थाप पर श्रद्धालु भक्ति भाव से नृत्य करते हुए आगे बढ़ रहे थे। युवाओं की ऊर्जा और महिलाओं की भक्ति ने आयोजन को और अधिक भव्य बना दिया।
एक माह की तैयारी ने बनाया आयोजन को ऐतिहासिक
इंदौर श्रीसंघ द्वारा चातुर्मास प्रवेश को लेकर लगभग एक माह पूर्व से ही व्यापक तैयारियां प्रारंभ कर दी गई थीं। विभिन्न समितियों का गठन किया गया था, जिन्होंने आवास, भोजन, स्वागत, यातायात, सुरक्षा और आयोजन की सभी व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित किया।
प्रवेश यात्रा के मार्ग को सजाया गया तथा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गईं। आयोजन की उत्कृष्ट व्यवस्थाओं की सभी उपस्थित लोगों ने सराहना की।
देशभर से पहुंचे हजारों श्रद्धालु, विदेश से भी आए गुरु भक्त
इस ऐतिहासिक अवसर पर केवल मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र सहित देश के अनेक राज्यों से हजारों श्रद्धालु इंदौर पहुंचे।
विशेष आकर्षण तब रहा जब जापान से पुण्य सम्राट की अनन्य भक्त तुलसी बहन एवं उनके साथी भी गुरुदेव के दर्शन एवं वंदन के लिए विशेष रूप से पहुंचे। उन्होंने विधिवत वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
विदेश से श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने यह सिद्ध किया कि गुरुदेव के प्रति आस्था और श्रद्धा केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्वभर में उनके अनुयायी मौजूद हैं।
अनेक सामाजिक एवं राजनीतिक हस्तियां रहीं उपस्थित
चातुर्मास प्रवेश समारोह में धार्मिक जगत के साथ-साथ सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र की अनेक प्रमुख हस्तियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
इस अवसर पर मध्य प्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री चेतन कश्यप, पूर्व मंत्री पारस जैन, प्रांतीय श्रीसंघ अध्यक्ष सुरेश तांतेड़, राष्ट्रीय परिषद अध्यक्ष प्रकाश छाजेड़, महामंत्री सुधीर लोढ़ा, प्रांतीय अध्यक्ष मोहित तांतेड़, महामंत्री संजय कोठारी, राष्ट्रीय महिला परिषद अध्यक्ष प्रेमाबेन मुथा, महामंत्री संगीता पोरवाल, प्रांतीय अध्यक्ष सारिका कोलन, तरुण परिषद अध्यक्ष आदित्य धोका, भरतपुर तीर्थ अध्यक्ष बाबूलाल संघवी, रमेश धरू, कांतिलाल, राजेंद्र दगवाड़ा, रमेश धारीवाल, अशोक श्रीमाल सहित अनेक राष्ट्रीय एवं प्रांतीय पदाधिकारी उपस्थित रहे।
इसके अलावा विभिन्न सामाजिक संगठनों और परिषदों के हजारों कार्यकर्ता भी इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बने।
धर्मसभा में आत्मकल्याण और साधना का दिया संदेश
चल समारोह के पश्चात आयोजित धर्मसभा में अतिथियों और संतों ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया।
वक्ताओं ने कहा कि चातुर्मास केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नति का सर्वोत्तम अवसर है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि आगामी चार महीनों में अधिकाधिक समय जप, तप, साधना, स्वाध्याय और धर्म आराधना में लगाएं।
स्वागत उद्बोधन महेंद्र बागवाला ने प्रस्तुत किया।
मुनि विद्ववरत्न विजयजी महाराज ने दी धर्म साधना की प्रेरणा
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि विद्ववरत्न विजयजी महाराज साहब ने कहा कि चातुर्मास के चार महीने प्रत्येक श्रद्धालु के लिए आत्मकल्याण का अमूल्य अवसर हैं।
उन्होंने कहा कि इस अवधि में नियमित जप, तप, स्वाध्याय, संयम, आराधना और धार्मिक आयोजनों में सहभागिता से आत्मा की उन्नति संभव है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे सांसारिक व्यस्तताओं से समय निकालकर धर्म आराधना को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।
इसी अवसर पर उन्होंने धौलपुर से भरतपुर तीर्थ तक छरीपालीत संघ की घोषणा भी की तथा बताया कि चातुर्मास के दौरान विभिन्न तप, आराधना एवं धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
गच्छाधिपति ने दिया पुण्य सम्राट के आशीर्वाद का संदेश
गच्छाधिपति श्रीमद् विजय नित्य सेन सुरिश्वरजी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि समाज में जो भी धार्मिक और सामाजिक कार्य हो रहे हैं, वे सभी पुण्य सम्राट के आशीर्वाद से ही संभव हो रहे हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म, संयम और सेवा के मार्ग पर चलने का आह्वान किया तथा कहा कि चातुर्मास आत्मिक उन्नति का श्रेष्ठ अवसर है, जिसका प्रत्येक व्यक्ति को पूरा लाभ लेना चाहिए।
लाभार्थी परिवारों और अतिथियों का हुआ सम्मान

समारोह के दौरान श्रीसंघ के पदाधिकारियों द्वारा आयोजन में सहयोग देने वाले लाभार्थी परिवारों एवं विशिष्ट अतिथियों का शाल, श्रीफल एवं माल्यार्पण कर सम्मान किया गया।
समाजजनों ने उनके योगदान की सराहना करते हुए अनुमोदना व्यक्त की।
राष्ट्रीय एवं प्रांतीय परिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन
मुख्य कार्यक्रम के पश्चात प्रवचन हॉल में राष्ट्रीय एवं प्रांतीय परिषद परिवार की बैठक आयोजित की गई।
बैठक की अध्यक्षता प्रकाश छाजेड़ ने की। इसमें मध्य प्रदेश में आयोजित हो रहे विभिन्न चातुर्मास कार्यक्रमों की रूपरेखा, सामूहिक संयम वंदन यात्रा, पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण अभियान तथा समाजहित के अनेक विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में समाज के संगठनात्मक विस्तार तथा युवाओं को धर्म से जोड़ने के लिए भी कई महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए गए।
धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता का बना अनुपम उदाहरण

इंदौर में आयोजित यह चातुर्मास प्रवेश केवल धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि सामाजिक एकता, अनुशासन और सामूहिक आस्था का भी अद्भुत उदाहरण बना।
हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति, सुव्यवस्थित आयोजन, भव्य चल समारोह और संतों के प्रेरणादायी संदेशों ने इस आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया।
श्रद्धालुओं का मानना है कि आगामी चार महीनों तक चातुर्मास के दौरान आयोजित होने वाले धार्मिक प्रवचन, तप, आराधना, स्वाध्याय और सेवा गतिविधियां समाज में आध्यात्मिक जागरण को नई दिशा देंगी।
कार्यक्रम का संचालन और जानकारी
कार्यक्रम का संचालन चातुर्मास समिति अध्यक्ष नीरज सुराना ने किया।
आयोजन की विस्तृत जानकारी महिदपुर रोड जैन समाज के मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी द्वारा प्रदान की गई। उन्होंने बताया कि चातुर्मास अवधि में प्रतिदिन धार्मिक प्रवचन, साधना, स्वाध्याय, तप, सामूहिक आराधना तथा विभिन्न सामाजिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें देशभर से श्रद्धालुओं की सहभागिता रहेगी।
