Indore नगर निगम में ‘वंदे मातरम्’ विवाद ने लिया राजनीतिक रंग, कांग्रेस में बढ़ी अंदरूनी कलह
Indore नगर निगम के हालिया बजट सत्र में उठे ‘वंदे मातरम्’ विवाद ने अब सिर्फ राष्ट्रीय गीत के सम्मान तक सीमित रहने के बजाय राजनीतिक और संगठनात्मक विवाद का रूप ले लिया है। शुरुआत में यह मामला वंदे मातरम् गाने को लेकर हुई असहमति का था, लेकिन धीरे-धीरे यह कांग्रेस के भीतर गुटबाजी, आरोप-प्रत्यारोप और सत्ता-समीकरण की खींचतान में बदल गया है।
Indore नगर निगम में बजट चर्चा के दौरान कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम और पार्षद रुबीना इकबाल द्वारा ‘वंदे मातरम्’ गाने से इनकार किए जाने के बाद विवाद शुरू हुआ। इस पर भाजपा पार्षदों ने तीखी प्रतिक्रिया दी और सदन में हंगामा भी हुआ। लेकिन इसके बाद मामला केवल सदन की कार्यवाही तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बयानबाज़ी और व्यक्तिगत आरोपों तक पहुंच गया।
कांग्रेस में गुटबाजी के आरोप
इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस पार्षद राजू भदौरिया ने अपनी ही पार्टी की पार्षद फौजिया शेख अलीम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भदौरिया का कहना है कि इस पूरे मामले के पीछे राजनीतिक रणनीति और अंदरूनी सौदेबाजी की भूमिका है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्षद फौजिया शेख और महापौर पुष्यमित्र भार्गव के बीच किसी प्रकार की ‘डीलिंग’ हुई है, जिसके कारण यह विवाद खड़ा किया गया ताकि सदन की कार्यवाही और बजट चर्चा के महत्वपूर्ण मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके।
भदौरिया ने यह भी कहा कि यह पूरा घटनाक्रम एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, जिससे शहर के विकास और बजट पर होने वाली बहस को प्रभावित किया गया।
पुराने बयानों और व्यवहार पर सवाल
राजू भदौरिया ने यह भी दावा किया कि फौजिया शेख पहले कई बार नगर निगम में ‘वंदे मातरम्’ के दौरान खड़े होकर सम्मान के साथ भाग लेती रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पहले ऐसा किया गया था तो इस बार अचानक इनकार क्यों किया गया।
भदौरिया के अनुसार, सदन में जानबूझकर देर से पहुंचना और फिर वंदे मातरम् पर आपत्ति जताना एक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी को आपत्ति थी तो वह पहले ही स्पष्ट रूप से इनकार कर सकती थीं, लेकिन सदन में इस तरह की स्थिति बनाना उचित नहीं था।
बयानबाज़ी और तीखे शब्दों का इस्तेमाल
विवाद के दौरान सदन में तीखी बहस और शब्दों की गरमाहट भी देखने को मिली। आरोप है कि फौजिया शेख ने सदन में कहा कि किसी पर किसी भी तरह का दबाव नहीं डाला जा सकता, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया।
इसके बाद पार्षद भदौरिया ने आरोप लगाया कि इस तरह की बयानबाज़ी के पीछे महापौर और शेख अलीम की राजनीतिक रणनीति है, जिसका उद्देश्य बजट और शहर के विकास से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा को टालना था।
कांग्रेस नेतृत्व की प्रतिक्रिया
इस पूरे विवाद पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से भी सवाल पूछे गए, लेकिन उन्होंने सीधे टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि पार्टी इस मामले को देख रही है और उचित समय पर निर्णय लिया जाएगा।
वहीं, पीसीसी चीफ ने कहा कि राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान के सम्मान पर किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए और इस मुद्दे पर अनावश्यक विवाद नहीं खड़ा किया जाना चाहिए।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी में यदि किसी पार्षद के बयान को लेकर कोई मामला सामने आता है तो उस पर संगठनात्मक स्तर पर निर्णय लिया जाएगा।
नेता प्रतिपक्ष को लेकर अंदरूनी विवाद
सूत्रों के अनुसार, इंदौर कांग्रेस में लंबे समय से अंदरूनी खींचतान चल रही है। एक ओर शहर कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे का गुट है, जबकि दूसरी ओर फौजिया शेख और उनके समर्थकों का समूह सक्रिय माना जाता है।
जानकारी के अनुसार, दोनों गुटों के बीच नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी और संगठनात्मक पदों को लेकर भी असंतोष बना हुआ है। फौजिया शेख पहले भी इस पद पर रह चुकी हैं और उनके समर्थक चाहते हैं कि उन्हें फिर से संगठन में बड़ी भूमिका दी जाए।
पुराने विवाद भी आए सामने
यह पहला मौका नहीं है जब Indore कांग्रेस के भीतर इस तरह का विवाद सामने आया हो। वर्ष 2023 में भी नगर निगम की एक बैठक के दौरान नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे और कांग्रेस नेता शेख अलीम के बीच तीखी बहस हुई थी, जो बाद में हाथापाई तक पहुंच गई थी।
उस समय भी पार्षदों के अधिकार और उनके प्रतिनिधित्व को लेकर मतभेद खुलकर सामने आए थे।
सोशल और राजनीतिक संदेश का टकराव
विवाद के दौरान यह भी देखा गया कि अलग-अलग पार्षदों के ‘वंदे मातरम्’ गाने या न गाने को लेकर सोशल और राजनीतिक संदेशों की व्याख्या अलग-अलग तरीके से की जा रही है। कुछ पार्षदों ने पहले के वीडियो और घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि कई बार सभी समुदायों के प्रतिनिधि वंदे मातरम् में भाग लेते रहे हैं।
वहीं, दूसरी ओर कुछ पार्षदों ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक या वैचारिक असहमति से जोड़कर देखा।
निष्कर्ष
Indore नगर निगम का यह विवाद अब केवल एक सदन की बहस नहीं रह गया है, बल्कि यह कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी, नेतृत्व संघर्ष और राजनीतिक रणनीति का प्रतीक बन गया है।
जहां एक तरफ इसे राष्ट्रगीत के सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के भीतर यह मामला शक्ति संतुलन और आंतरिक राजनीति की खींचतान को भी उजागर कर रहा है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है और क्या यह मामला केवल बयानबाज़ी तक सीमित रहता है या संगठनात्मक कार्रवाई तक पहुंचता है।
