UPI शुल्क लागू हुआ तो दुकानों से हटाएंगे QR कोड, इंदौर के व्यापारी चलाएंगे पाँच दिन का जनसंपर्क अभियान
इंदौर। UPI के कुछ व्यापारी भुगतानों पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR के विरोध में इंदौर के व्यापारिक संगठनों ने अपना रुख सख्त किया है। अहिल्या चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की बैठक में निर्णय लिया गया कि शुल्क लागू होने की स्थिति में व्यापारी प्रतिष्ठानों से UPI QR कोड हटाकर नकद भुगतान स्वीकार करेंगे। इस निर्णय की जानकारी बाजारों तक पहुँचाने के लिए चेम्बर्स के पदाधिकारी पाँच दिन का जनसंपर्क अभियान चलाएंगे। यह फैसला शुल्क लागू होने की स्थिति से जुड़ा है; अभी सभी दुकानों से QR कोड हटाए जाने की पुष्टि नहीं है।
व्यापारिक संगठनों की बैठक में बनी सहमति
प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को अभिनव कला समाज के हॉल परिसर में आयोजित बैठक में विभिन्न व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। चेम्बर्स अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल और महामंत्री गोपाल दास अग्रवाल की अगुवाई में व्यापारियों ने अतिरिक्त भुगतान शुल्क का विरोध किया।
अहिल्या चेम्बर्स से जुड़े 125 व्यापारिक संगठनों के सामूहिक निर्णय की जानकारी सामने आई है। प्रतिनिधियों ने कहा कि शुल्क किसी भी तारीख से लागू किया जाए, उसी दिन से QR कोड हटाने के निर्णय पर अमल करने की तैयारी रहेगी।
बढ़ती व्यापारिक लागत को लेकर चिंता
चेम्बर्स अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल ने कहा कि व्यापारी UPI भुगतान पर शुल्क लगाने का समर्थन नहीं करेंगे। बैठक में दुकानों पर नकद भुगतान स्वीकार करने संबंधी पोस्टर लगाने की बात भी सामने आई।
व्यापारियों का तर्क है कि भुगतान प्राप्त करने पर अतिरिक्त लागत जुड़ने से कारोबार प्रभावित होगा। उनका विरोध विशेष रूप से व्यापारी पर पड़ने वाले शुल्क के बोझ को लेकर है। संगठन इस मुद्दे पर दुकानदारों को एकजुट करने और सामूहिक रूप से अपना पक्ष रखने की तैयारी कर रहा है।
पाँच दिन बाजारों में करेंगे संपर्क
चेम्बर्स के पदाधिकारी अगले पाँच दिनों तक शहर के विभिन्न व्यापारिक क्षेत्रों में संपर्क करेंगे। अभियान के दौरान व्यापारियों को बैठक के निर्णय तथा प्रस्तावित शुल्क के प्रभावों की जानकारी दी जाएगी।
इस पहल का उद्देश्य बाजार स्तर पर निर्णय के समर्थन में सहमति बनाना है। अभियान से यह भी स्पष्ट होगा कि अलग-अलग व्यापारिक क्षेत्रों के दुकानदार भुगतान व्यवस्था बदलने के प्रस्ताव पर क्या रुख रखते हैं। सामूहिक निर्णय का वास्तविक क्रियान्वयन शुल्क लागू होने की स्थिति और व्यापारियों की भागीदारी पर निर्भर करेगा।
पहले भी मनाया गया था ‘नो UPI डे’
इंदौर के व्यापारी इससे पहले 23 सितंबर को ‘नो UPI डे’ के माध्यम से विरोध दर्ज करा चुके हैं। अब QR कोड हटाने की सशर्त घोषणा को आंदोलन के अगले चरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है। पिछली पहल के बाद संगठन बाजारों में सीधे संपर्क के जरिए अपनी मांग को आगे बढ़ाना चाहता है।
हर UPI भुगतान पर शुल्क की बात सही नहीं
इस विवाद के बीच शुल्क के दायरे को समझना जरूरी है। वित्त मंत्रालय की 15 सितंबर की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, व्यक्ति से व्यक्ति को किए जाने वाले UPI भुगतान पूरी तरह निःशुल्क रहेंगे। व्यापारियों को दो हजार रुपये तक के भुगतान तथा छोटे व्यापारियों के लिए शून्य-MDR व्यवस्था में आने वाले लेन-देन भी निःशुल्क बताए गए हैं।
सरकार के अनुसार, MDR केवल निर्धारित श्रेणी के दो हजार रुपये से अधिक व्यापारी भुगतानों पर लागू होगा। लगभग 96 प्रतिशत व्यापारी लेन-देन प्रभावित नहीं होंगे। इसलिए सभी ग्राहकों और प्रत्येक UPI भुगतान पर समान शुल्क लगने का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
लागू होने की तारीख पर अंतिम सूचना जरूरी
रॉयटर्स की आठ अक्टूबर की रिपोर्ट में शुल्क लागू करने की तारीख आगे बढ़ाने पर विचार होने की जानकारी दी गई है। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक उस समय अंतिम निर्णय नहीं हुआ था। ऐसे में लागू होने की तारीख को लेकर NPCI और संबंधित आधिकारिक संस्थाओं की नई सूचना महत्वपूर्ण होगी। इंदौर के व्यापारियों की घोषणा भी शुल्क वास्तव में लागू होने की स्थिति से जुड़ी हुई है।
