झलकारी जयंती पर 22 नवंबर को इंदौर में निकलेगी भव्य शौर्य यात्रा
कोली-कोरी समाज की बैठक में राष्ट्रीय संगोष्ठी और अलंकरण समारोह आयोजित करने का निर्णय, सभी वर्गों की सहभागिता पर जोर
Indore । स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना झलकारी बाई की जयंती के अवसर पर इस वर्ष इंदौर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आयोजन की तैयारियों और समाज की व्यापक सहभागिता सुनिश्चित करने को लेकर कोली-कोरी समाज के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों एवं प्रबुद्धजनों की बैठक इंदौर प्रेस क्लब स्थित होटल महफिल में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता बीमा संघ के राष्ट्रीय महासचिव रमेश हलधर ने की।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 22 नवंबर को झलकारी बाई जयंती के अवसर पर भव्य शौर्य यात्रा, सामाजिक संदर्भ में राष्ट्रीय संगोष्ठी और पारंपरिक वीरांगना झलकारी अलंकरण समारोह आयोजित किया जाएगा। आयोजन को व्यापक स्वरूप देने के साथ समाज के विभिन्न वर्गों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
आयोजन की तैयारियों पर हुई चर्चा
अखिल भारतीय वीरांगना झलकारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश महावर कोली ने बैठक में आयोजन की प्रस्तावना रखते हुए आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा और तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने नगर निगम की नामांकन समिति में पारित प्रस्ताव के संबंध में महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक मालिनी लक्ष्मण सिंह गौड़, क्षेत्रीय पार्षद योगेश गेंदर और नामांकन समिति प्रभारी राकेश जैन के प्रति आभार व्यक्त करने का प्रस्ताव रखा। बैठक में मौजूद समाजबंधुओं ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए इसे सर्वसम्मति से पारित किया।
‘कार्यक्रम की सफलता समाज की सामूहिक जिम्मेदारी’
बैठक को संबोधित करते हुए रमेश हलधर ने कहा कि किसी भी आयोजन की रूपरेखा तैयार करना संगठन और पदाधिकारियों का दायित्व है, लेकिन उसे सफल और प्रभावी बनाना पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने समाजबंधुओं से अपील की कि झलकारी जयंती को केवल एक आयोजन के रूप में न देखते हुए वीरांगना झलकारी बाई के त्याग, शौर्य और राष्ट्रभक्ति को याद करने तथा उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के अवसर के रूप में मनाया जाए।
हलधर ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में झलकारी बाई के योगदान को महत्वपूर्ण माना जाता है। उनके साहस और पराक्रम ने उन्हें इतिहास में विशिष्ट स्थान दिलाया। उन्होंने कहा कि झलकारी बाई को उनके योगदान के अनुरूप इतिहास में स्थान दिलाने और उनकी स्मृति को जन-जन तक पहुंचाने के लिए किए जा रहे प्रयास महत्वपूर्ण हैं।

प्रबुद्धजनों ने दिए सुझाव
बैठक में वरिष्ठ समाजसेवी एवं शाक्यवार कोरी समाज के पूर्व अध्यक्ष देवी शंकर कोटिया, घनश्याम मेरिया, दीपक मलोरिया रानू, जानकीलाल पटेरिया, देवीप्रसाद वर्मा, गजेन्द्र महावर, जगदीश वर्मा और ज्ञानेन्द्र बंगेरिया सहित अन्य समाजबंधुओं ने भी विचार रखे।
वक्ताओं ने कहा कि आयोजन में समाज के अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही युवाओं और महिलाओं को भी कार्यक्रम से जोड़ने पर जोर दिया गया।
बैठक का संचालन गणेश वर्मा ने किया। अंत में मनोज धीमान ने सभी उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया।
महूनाका से शुरू होगी शौर्य यात्रा
22 नवंबर को आयोजित मुख्य कार्यक्रम की शुरुआत भव्य शौर्य यात्रा से होगी। आयोजकों के अनुसार यात्रा महूनाका चौराहे से प्रारंभ होगी। यात्रा में घोड़े और बग्गियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इसके साथ ही झांसी की रानी लक्ष्मीबाई और वीरांगना झलकारी बाई की प्रतीकात्मक झांकियां भी शामिल की जाएंगी।
आयोजकों का कहना है कि शौर्य यात्रा के माध्यम से वीरांगना झलकारी बाई के साहस, शौर्य और राष्ट्रभक्ति की स्मृति को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। यात्रा में समाज के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा, महिलाएं और अन्य समाजबंधु शामिल होंगे।
पांच महिलाओं को ‘वीरांगना झलकारी अलंकरण’, तीन पुरुषों को ‘कोली रत्न’
शौर्य यात्रा के बाद आयोजित होने वाले अलंकरण समारोह में समाज के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली पांच समाजसेवी महिलाओं को ‘वीरांगना झलकारी अलंकरण’ से सम्मानित किया जाएगा। वहीं समाज और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले तीन पुरुषों को ‘कोली रत्न’ की उपाधि से सम्मानित किया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान सामाजिक संदर्भ में राष्ट्रीय संगोष्ठी भी आयोजित होगी। इसमें सामाजिक चुनौतियों, सामाजिक एकता, संगठनात्मक भूमिका और वीरांगना झलकारी बाई के ऐतिहासिक योगदान सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की जाएगी।
आयोजकों के अनुसार, झलकारी जयंती के आयोजन को व्यापक सामाजिक सहभागिता के साथ आयोजित करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वीरांगना झलकारी बाई के शौर्य, त्याग और राष्ट्रभक्ति से जुड़े संदेश को समाज की नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके।
