Indore मेट्रो परियोजना का अहम चरण शुरू, अंडरग्राउंड ट्रैक के लिए तैयारी तेज
Indore शहर में मेट्रो परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण चरण जल्द ही शुरू होने जा रहा है। एलिवेटेड ट्रैक के निर्माण के बाद अब शहर के प्रमुख क्षेत्रों में अंडरग्राउंड कॉरिडोर के लिए जमीन तैयार करने का काम तेजी से चल रहा है। इस नई प्रक्रिया में एयरपोर्ट और नगर निगम क्षेत्र में टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) उतारने की तैयारी शामिल है। अधिकारियों का अनुमान है कि अप्रैल या मई 2026 में सुरंग खुदाई का कार्य औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगा।
टीबीएम के लिए शाफ्ट तैयार
मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमपीएमआरसीएल) के सूत्रों के अनुसार, अंडरग्राउंड मेट्रो निर्माण के लिए दो प्रमुख स्थानों पर लगातार 24 घंटे काम किया जा रहा है। इन स्थानों में एयरपोर्ट क्षेत्र और नगर निगम के पास स्थित शासकीय स्कूल परिसर शामिल हैं। इन स्थानों पर खुदाई कर टीबीएम को जमीन के भीतर उतारने के लिए शाफ्ट तैयार किए जा रहे हैं, जिससे मशीनें सुरंग निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर सकें।
अधिकारियों ने बताया कि इंदौर मेट्रो में दो टनल बोरिंग मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा। एक मशीन एयरपोर्ट से बड़ा गणपति की दिशा में सुरंग बनाने का काम करेगी, जबकि दूसरी मशीन नगर निगम क्षेत्र से बड़ा गणपति की ओर सुरंग खुदाई करेगी। इन मशीनों की मदद से जमीन के लगभग 40 मीटर नीचे सुरंग तैयार की जाएगी, जो तकनीकी दृष्टि से काफी चुनौतीपूर्ण काम है।
अंडरग्राउंड ट्रैक की लंबाई और महत्व
एमपीएमआरसीएल के अनुसार, इंदौर मेट्रो के इस अंडरग्राउंड कॉरिडोर का कुल लंबाई लगभग 10 किलोमीटर होगी। यह परियोजना शहर के यातायात को सुविधाजनक बनाने के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को भी गति देगी। अंडरग्राउंड ट्रैक का निर्माण विशेष रूप से उन क्षेत्रों में किया जा रहा है जहाँ जगह की कमी है और जहां एलिवेटेड ट्रैक बनाना संभव नहीं है।
एमपीएमआरसीएल ने टाटा समूह और उसकी सहयोगी कंपनी को हाईकोर्ट से एयरपोर्ट तक अंडरग्राउंड मेट्रो निर्माण का लगभग 2290 करोड़ रुपए का ठेका दिया है। इसके अलावा, बंगाली चौराहा से हाईकोर्ट तक मेट्रो को अंडरग्राउंड बनाने का निर्णय लिया गया है। इस दिशा में नई टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है और जमीन का विस्तृत सर्वे किया जा रहा है।
फिलहाल, एयरपोर्ट से बंगाली चौराहे तक एलिवेटेड ट्रैक का निर्माण जारी है। इसके आगे का हिस्सा भूमिगत होगा, और इस नए अंडरग्राउंड सेक्शन की तकनीकी जटिलताओं को देखते हुए इसे सावधानी और आधुनिक तकनीक के साथ बनाया जा रहा है।
सुरंग निर्माण में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल
Indore मेट्रो परियोजना में इस्तेमाल की जा रही टनल बोरिंग मशीनें (टीबीएम) अत्याधुनिक तकनीक से लैस हैं। ये मशीनें न केवल जमीन के भीतर सुरक्षित रूप से सुरंग बना सकती हैं, बल्कि निर्माण के दौरान आसपास की जमीन और संरचनाओं को भी नुकसान से बचाती हैं। प्रत्येक मशीन एक विशेष दिशा में खुदाई करती है और पूरे ट्रैक के लिए आवश्यक सुरंग तैयार करती है।
टीबीएम के इस्तेमाल से सुरंग निर्माण की प्रक्रिया में सुरक्षा, समय की बचत और लागत नियंत्रण में मदद मिलेगी। इसके अलावा, मशीनें जमीन के नीचे अत्यंत सटीक तरीके से मार्ग तय करती हैं, जिससे भवनों और अन्य संरचनाओं पर प्रभाव न्यूनतम रहता है।
परियोजना का शहर पर असर
इस अंडरग्राउंड मेट्रो कॉरिडोर के बनने से इंदौर के यातायात को बहुत फायदा होगा। शहर के भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में ट्रैफिक कम होगा, यात्रा समय घटेगा और मेट्रो नेटवर्क के अन्य हिस्सों के साथ बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी। इसके अलावा, यह परियोजना शहर के आर्थिक और वाणिज्यिक केंद्रों को जोड़ने में भी मदद करेगी, जिससे व्यवसाय और रोजमर्रा की गतिविधियों में वृद्धि होगी।
अधिकारी यह भी मानते हैं कि अंडरग्राउंड मेट्रो शहर के लिए लंबी अवधि में सुरक्षित और स्थायी यातायात समाधान प्रदान करेगी। यह परियोजना न केवल यात्री सुविधा बढ़ाएगी, बल्कि पर्यावरण पर भी सकारात्मक असर डालेगी, क्योंकि इससे सड़क पर निजी वाहनों की संख्या कम होगी और प्रदूषण घटेगा।
आगामी चरण और तैयारियों की स्थिति
अप्रैल या मई में टीबीएम के आने के साथ ही सुरंग निर्माण का कार्य औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगा। इसके लिए एमपीएमआरसीएल ने पहले ही जमीन तैयार कर ली है और शाफ्ट निर्माण पर काम जारी है। इस प्रक्रिया के दौरान इंजीनियरिंग टीम लगातार निगरानी करेगी ताकि सुरंग निर्माण में किसी प्रकार की तकनीकी या सुरक्षा समस्या न आए।
टीबीएम के आने के बाद एक मशीन एयरपोर्ट से बड़ा गणपति की दिशा में और दूसरी नगर निगम क्षेत्र से बड़ा गणपति की ओर सुरंग खोदेगी। दोनों मशीनें लगभग 40 मीटर की गहराई में काम करेंगी। निर्माण की गति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 24 घंटे काम किया जा रहा है।
मेट्रो परियोजना की अहमियत
इंदौर मेट्रो परियोजना का अंडरग्राउंड ट्रैक शहर की यात्री सुविधा, आर्थिक गतिविधियों और यातायात प्रबंधन में महत्वपूर्ण बदलाव लाएगा। एलिवेटेड और भूमिगत दोनों ट्रैक मिलकर शहर के अधिकांश हिस्सों को कवर करेंगे। आने वाले समय में यह परियोजना इंदौर को स्मार्ट और आधुनिक शहर बनाने की दिशा में एक बड़ी छलांग साबित होगी।
एमपीएमआरसीएल का कहना है कि अंडरग्राउंड ट्रैक बनने के बाद मेट्रो का संचालन और यात्रियों के लिए सुविधाएं पहले से बेहतर होंगी। शहरवासियों को मेट्रो नेटवर्क के जरिए सुरक्षित, तेज और समयबद्ध यात्रा का लाभ मिलेगा।
निष्कर्ष
इंदौर मेट्रो परियोजना का अंडरग्राउंड चरण तकनीकी और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। टीबीएम के आने और सुरंग निर्माण की शुरुआत के साथ ही परियोजना को नई गति मिलेगी। शहर की यातायात व्यवस्था, पर्यावरण और आर्थिक गतिविधियों में सुधार के लिए यह कदम अहम साबित होगा। अगले कुछ महीनों में अंडरग्राउंड मेट्रो की तैयारियों का असर शहर के नागरिकों और यात्रियों पर स्पष्ट दिखाई देगा।

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