इंदौर के सुपर कॉरिडोर पर 100 एकड़ में बनेगा ‘नगर वन’, एक दिन में रोपे गए 21 हजार पौधे
गांधी नगर मेट्रो स्टेशन के पास विकसित होगा सघन हरित क्षेत्र, तालाब और फव्वारों के साथ तैयार होगा प्राकृतिक वातावरण; फलदार वृक्ष प्रवासी पक्षियों को करेंगे आकर्षित
इंदौर। स्वच्छता के क्षेत्र में देशभर में पहचान बना चुके इंदौर में अब पर्यावरण संरक्षण और शहर में हरियाली बढ़ाने की दिशा में एक बड़ी पहल की जा रही है। इंदौर नगर निगम सुपर कॉरिडोर पर गांधी नगर मेट्रो स्टेशन के पास करीब 100 एकड़ भूमि पर विशाल ‘नगर वन’ विकसित करने की तैयारी में है। इस परियोजना के तहत बुधवार को बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियान आयोजित किया गया, जिसमें एक ही दिन में करीब 21 हजार पौधे लगाए गए।
पौधारोपण कार्यक्रम साधु-संतों के सानिध्य में मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और अन्य लोगों ने पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। प्रस्तावित नगर वन को केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि भविष्य में इसे एक सघन और व्यवस्थित शहरी वन के रूप में विकसित करने की योजना है।
100 एकड़ में आकार लेगा नगर वन
सुपर कॉरिडोर तेजी से विकसित हो रहे इंदौर के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल है। यहां गांधी नगर मेट्रो स्टेशन के पास लगभग 100 एकड़ जमीन पर नगर वन तैयार किया जाएगा। इसके लिए नगर निगम ने वन विभाग से भूमि ली है।
नगर वन में बड़े पैमाने पर विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे। योजना का उद्देश्य ऐसा सघन हरित क्षेत्र विकसित करना है, जो आने वाले वर्षों में प्राकृतिक जंगल का स्वरूप ले सके। इससे सुपर कॉरिडोर और आसपास के तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
एक दिन में लगाए गए 21 हजार पौधे
नगर वन परियोजना की शुरुआत बड़े पौधारोपण अभियान के साथ की गई। कार्यक्रम के दौरान करीब 21 हजार पौधे रोपे गए। बड़ी संख्या में पौधे लगाने के साथ ही इनके संरक्षण और देखभाल को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पौधों के विकसित होने के बाद यह क्षेत्र शहर के बड़े ग्रीन जोन में तब्दील हो सकता है। इससे न केवल पर्यावरण को लाभ मिलेगा, बल्कि स्थानीय जैव विविधता को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
कैलाश विजयवर्गीय ने बताया पेड़ों का महत्व
पौधारोपण कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी शामिल हुए। उन्होंने पर्यावरण और मानव जीवन में पेड़ों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि एक पौधा लगाना शिव मंदिर के समान है। उन्होंने कहा कि पेड़ वातावरण में मौजूद हानिकारक गैसों को सोखते हैं और मनुष्य को प्राणवायु के रूप में ऑक्सीजन प्रदान करते हैं।
उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने की अपील भी की। उनका कहना था कि पेड़ मनुष्य को जीवन देते हैं, इसलिए समाज की जिम्मेदारी है कि पेड़ों की संख्या बढ़ाई जाए और प्रकृति को संरक्षित किया जाए।
तालाब और फव्वारे भी होंगे विकसित
प्रस्तावित नगर वन को केवल पेड़ों से भरा क्षेत्र बनाने के बजाय एक आकर्षक प्राकृतिक स्थल के रूप में विकसित करने की योजना है। यहां तालाब, फव्वारे और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित किए जाने की बात कही गई है।
सघन वन के साथ जल संरचनाओं के विकसित होने से क्षेत्र का प्राकृतिक वातावरण बेहतर हो सकता है। योजना पूरी होने के बाद यहां शहरवासियों को हरियाली और प्रकृति के बीच समय बिताने का अवसर भी मिल सकता है।
प्रवासी पक्षियों के लिए तैयार होगा अनुकूल वातावरण
नगर वन की एक खास विशेषता पक्षियों के लिए अनुकूल प्राकृतिक वातावरण तैयार करना भी होगी। यहां ऐसे फलदार और अन्य उपयोगी वृक्ष लगाने की योजना है, जो स्थानीय पक्षियों के साथ प्रवासी पक्षियों को भी आकर्षित कर सकें।
हर साल अलग-अलग क्षेत्रों से लंबी दूरी तय कर भारत आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए भोजन, पानी और सुरक्षित प्राकृतिक आवास महत्वपूर्ण होते हैं। नगर वन में पौधों और जल संरचनाओं का संतुलित विकास होने पर भविष्य में यह क्षेत्र पक्षियों के लिए नया ठिकाना बन सकता है।
सुपर कॉरिडोर की बढ़ेगी हरियाली
इंदौर का सुपर कॉरिडोर पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विकसित हुआ है। यहां आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों के साथ मेट्रो सहित कई बड़ी परियोजनाएं आकार ले रही हैं। ऐसे में बड़े पैमाने पर हरित क्षेत्र विकसित करना पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
100 एकड़ में बनने वाला नगर वन क्षेत्र में बढ़ते निर्माण के बीच पर्यावरणीय संतुलन बनाने में मददगार साबित हो सकता है। पेड़ों की संख्या बढ़ने से धूल और वायु प्रदूषण को कम करने, स्थानीय तापमान को संतुलित रखने और हरित आवरण बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।
पौधे लगाने के साथ संरक्षण भी बड़ी जिम्मेदारी
बड़े पौधारोपण अभियानों की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि लगाए गए पौधों की आगे कितनी अच्छी तरह देखभाल की जाती है। नगर वन परियोजना में पौधों की नियमित सिंचाई, सुरक्षा और रखरखाव महत्वपूर्ण होगा। शुरुआती वर्षों में पौधों को पर्याप्त पानी और संरक्षण मिलने पर ही वे बड़े वृक्षों में विकसित हो सकेंगे।
नगर वन के पूरी तरह विकसित होने में समय लगेगा, लेकिन योजनाबद्ध तरीके से इसका संरक्षण किया गया तो आने वाले वर्षों में सुपर कॉरिडोर का यह हिस्सा इंदौर के प्रमुख हरित क्षेत्रों में शामिल हो सकता है।
शहर के लिए नया ‘ग्रीन लंग’ बनने की उम्मीद
इंदौर में बढ़ते शहरीकरण के बीच नगर वन परियोजना को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 100 एकड़ भूमि पर हजारों पेड़ विकसित होने के बाद यह क्षेत्र शहर के लिए एक बड़े ‘ग्रीन लंग’ की भूमिका निभा सकता है।
एक ही दिन में 21 हजार पौधों के रोपण से इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत हो चुकी है। अब सबसे अहम जिम्मेदारी इन पौधों को सुरक्षित रखकर बड़े वृक्षों में बदलने की होगी। यदि योजना के अनुरूप सघन वन, जल संरचनाएं और पक्षियों के अनुकूल वातावरण विकसित होता है, तो सुपर कॉरिडोर का नगर वन आने वाले वर्षों में इंदौर की पर्यावरणीय पहचान में एक नया अध्याय जोड़ सकता है।
