इंदौर में बस सुविधा के लिए छात्रों का प्रदर्शन, देवगुराड़िया से कंपेल तक सिटी बस चलाने की मांग
कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे छात्र-छात्राएं, बोले— ‘हम अपना अधिकार मांग रहे हैं, भीख नहीं’; बस नहीं मिलने से छूट रही कक्षाएं, किराया भी बना परेशानी
इंदौर। देवगुराड़िया से कंपेल स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तक नियमित बस सेवा शुरू करने की मांग को लेकर छात्र-छात्राओं ने इंदौर कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरना देकर प्रदर्शन किया। शुक्रवार को बड़ी संख्या में पहुंचे विद्यार्थियों ने हाथों में तख्तियां लेकर अपनी मांग प्रशासन के सामने रखी। छात्रों का कहना है कि नियमित और स्कूल के समय के अनुरूप बस नहीं मिलने के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारे भी लगाए। छात्रों का कहना था कि वे प्रशासन से कोई विशेष सुविधा नहीं, बल्कि शिक्षा तक आसानी से पहुंचने के लिए सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था मांग रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान ‘हम अपना अधिकार मांग रहे हैं, भीख नहीं’ जैसे नारे भी सुनाई दिए।
देवगुराड़िया से कंपेल तक बस चलाने की मांग
छात्र-छात्राओं की मुख्य मांग देवगुराड़िया से कंपेल तक नियमित सिटी बस चलाने की है। देवगुराड़िया से कंपेल की दूरी करीब 17 किलोमीटर बताई जा रही है। इस रास्ते में सनावदिया, जामनिया और पिवड़ाय सहित कई गांव आते हैं।
इन गांवों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी पढ़ाई करने के लिए कंपेल स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पहुंचते हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें रोजाना स्कूल आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
बस नहीं मिलने से छूट रही शुरुआती कक्षाएं
विद्यार्थियों के अनुसार स्कूल का समय सुबह 10 बजे से शाम करीब साढ़े चार बजे तक है, लेकिन इस रूट पर चलने वाली निजी बसों का समय स्कूल की समय-सारणी के अनुरूप नहीं है।
सुबह समय पर बस नहीं मिलने के कारण कई विद्यार्थियों को स्कूल पहुंचने में देरी हो जाती है। छात्रों का दावा है कि इसके चलते उनकी शुरुआती दो कक्षाएं तक छूट जाती हैं। नियमित रूप से ऐसा होने से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
स्कूल की छुट्टी के बाद भी समस्या खत्म नहीं होती। विद्यार्थियों का कहना है कि शाम को समय पर घर लौटने के लिए भी उपयुक्त बस नहीं मिलती। इस कारण कई बार उन्हें लंबे समय तक बस का इंतजार करना पड़ता है।
निजी बसों में भीड़ से छात्र परेशान
विद्यार्थियों ने निजी बसों में होने वाली भीड़ को भी बड़ी समस्या बताया। उनका कहना है कि इस मार्ग पर उपलब्ध निजी बसों में यात्रियों की संख्या अधिक रहती है। ऐसे में कई बार छात्र-छात्राओं को पूरी यात्रा खड़े होकर करनी पड़ती है।
लगभग 17 किलोमीटर की दूरी तय करने वाले विद्यार्थियों के लिए रोजाना ऐसी स्थिति परेशानी का कारण बन रही है। विद्यार्थियों का कहना है कि यदि देवगुराड़िया से कंपेल तक नियमित सिटी बस शुरू हो जाए तो रास्ते में पड़ने वाले कई गांवों के विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा।
चार दिनों से स्कूल नहीं पहुंच पाने का दावा
प्रदर्शन कर रहे कुछ छात्र-छात्राओं ने बताया कि बस सुविधा की समस्या के कारण वे पिछले चार दिनों से स्कूल नहीं जा पाए हैं। विद्यार्थियों के मुताबिक यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने अपनी समस्या प्रशासन के सामने रखी हो।
उनका दावा है कि वे इससे पहले भी बस सेवा शुरू कराने के लिए प्रयास कर चुके हैं और यह उनकी तीसरी कोशिश है। पिछली बार समस्या का समाधान कुछ दिनों में किए जाने का आश्वासन मिलने की बात भी छात्रों ने कही, लेकिन उनके अनुसार कई दिन बीतने के बावजूद बस सेवा शुरू नहीं हुई।
इसी कारण विद्यार्थियों ने इस बार कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर धरना देने का फैसला किया।
छात्रों ने पूछा— दूसरे स्कूलों के लिए बस तो हमारे लिए क्यों नहीं?
प्रदर्शन में शामिल छात्र-छात्राओं ने सवाल उठाया कि जब अन्य शैक्षणिक संस्थानों और सांदीपनि स्कूल के विद्यार्थियों के लिए परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है, तो कंपेल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए बस सेवा क्यों शुरू नहीं की जा सकती।
उनका कहना है कि शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए परिवहन की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए नियमित सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध नहीं होने पर स्कूल तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
रोज का किराया परिवारों पर बन रहा आर्थिक बोझ
बस का किराया भी विद्यार्थियों और उनके परिवारों के लिए बड़ी समस्या बनकर सामने आया है। छात्रों के मुताबिक इस क्षेत्र से पढ़ने आने वाले कई विद्यार्थी ऐसे परिवारों से हैं, जिनकी आजीविका मजदूरी, छोटे व्यवसाय या सीमित आय के अन्य साधनों पर निर्भर है।
ऐसे परिवारों के लिए बच्चों का रोजाना आने-जाने का किराया अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन रहा है। विद्यार्थियों ने सिटी बस के मासिक पास की राशि कम करने की भी मांग की है।
छात्रों के अनुसार वर्तमान में मासिक पास के लिए करीब 600 रुपये देने पड़ रहे हैं। उनकी मांग है कि विद्यार्थियों के लिए इसे घटाकर 200 रुपये प्रतिमाह किया जाए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे भी आसानी से स्कूल आ-जा सकें।
70 से 80 प्रतिशत विद्यार्थी प्रभावित होने का दावा
प्रदर्शन में शामिल छात्राओं ने दावा किया कि देवगुराड़िया से कंपेल तक उपयुक्त बस सेवा नहीं होने से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उनके अनुसार स्कूल के करीब 70 से 80 प्रतिशत छात्र-छात्राओं को किसी न किसी रूप में परिवहन संबंधी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
विद्यार्थियों का कहना है कि नियमित बस उपलब्ध होने से न केवल स्कूल समय पर पहुंचना संभव होगा, बल्कि छुट्टी के बाद घर लौटने में होने वाली परेशानी भी कम होगी।
सुबह से कलेक्टर कार्यालय के बाहर बैठे छात्र
छात्राओं ने बताया कि वे सुबह करीब नौ बजे से कलेक्टर कार्यालय के बाहर अपनी मांग को लेकर बैठे थे। हाथों में स्वयं तैयार की गई तख्तियां लेकर पहुंचे विद्यार्थियों ने प्रशासन से उनकी समस्या पर जल्द निर्णय लेने की मांग की।
छात्रों का कहना था कि लगातार आवेदन और मांग के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने के कारण उन्हें पढ़ाई छोड़कर प्रदर्शन के लिए कलेक्टर कार्यालय आना पड़ा।
प्रदर्शन को समर्थन देने के लिए सामाजिक मुद्दों को लेकर सक्रिय अरुण बड़ोले भी वहां पहुंचे और विद्यार्थियों की मांग का समर्थन किया।
प्रशासन से जल्द समाधान की उम्मीद
विद्यार्थियों ने प्रशासन से देवगुराड़िया से कंपेल तक जल्द नियमित सिटी बस शुरू करने, स्कूल के समय के अनुसार बसों का संचालन सुनिश्चित करने और विद्यार्थी मासिक पास की राशि कम करने की मांग की है।
छात्रों का कहना है कि बस सेवा शुरू होने से देवगुराड़िया के साथ सनावदिया, जामनिया, पिवड़ाय और आसपास के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी राहत मिलेगी।
अब विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की नजर प्रशासन के अगले कदम पर है। उनकी मांग है कि परिवहन की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि बस के अभाव में किसी छात्र की कक्षा न छूटे और आर्थिक परेशानी के कारण उसकी पढ़ाई प्रभावित न हो।
