12 घंटे तक झांकियों से जगमगाया इंदौर, अनंत चतुर्दशी पर रातभर उमड़ी भीड़
इंदौर। अनंत चतुर्दशी के पारंपरिक चल समारोह में शुक्रवार की रात इंदौर की सड़कों पर झांकियों और अखाड़ों का कारवां निकला। करीब 12 घंटे चले समारोह में 22 से अधिक झांकियां और 65 अखाड़े शामिल हुए। हजारों दर्शक देर रात से सुबह तक धार्मिक दृश्यों, आकर्षक सजावट और अखाड़ों के करतब देखने के लिए मार्ग पर मौजूद रहे। गणेशोत्सव के समापन पर निकलने वाला यह चल समारोह इंदौर की पुरानी परंपराओं में शामिल है।
धार्मिक प्रसंगों के साथ दिखे नए विषय
इस बार मिलों और अन्य आयोजकों ने पौराणिक कथाओं के साथ बच्चों तथा सामाजिक विषयों पर भी झांकियां तैयार की थीं। राजकुमार मिल की एक झांकी में भगवान विष्णु और असुर मधु-कैटभ के बीच युद्ध का प्रसंग दर्शाया गया। मालवा मिल ने ‘मछली जल की रानी है’ विषय पर समुद्री संसार सजाया, जिसमें मछलियों और अन्य जलीय जीवों की आकृतियां दिखाई गईं। हुकुमचंद मिल की झांकी में भगवान गणेश और सिंदुरासुर का प्रसंग प्रस्तुत किया गया।
होप टेक्सटाइल मिल ने भगवान शिव की बारात को झांकी का विषय बनाया। कल्याण मिल और स्वदेशी मिल की प्रस्तुतियां भी समारोह में शामिल रहीं। झांकियों में रोशनी, चलित आकृतियों और सजावट के जरिए कथाओं को दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया गया। आयोजन से पहले ही इन्हें देखने को लेकर शहर में उत्सुकता थी; समारोह शुरू होने पर दर्शक मार्ग के किनारे जमा हो गए।
राजकुमार मिल की झांकी को पहला स्थान
उपलब्ध पुरस्कार विवरण के अनुसार, भगवान विष्णु और मधु-कैटभ के युद्ध पर आधारित राजकुमार मिल की झांकी को प्रथम स्थान मिला। मालवा मिल की ‘मछली जल की रानी है’ और हुकुमचंद मिल की गणेश-सिंदुरासुर प्रसंग वाली झांकी संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर रहीं। कल्याण मिल और स्वदेशी मिल की झांकियों को संयुक्त रूप से तीसरा स्थान दिया गया। होप टेक्सटाइल मिल की शिव बारात वाली झांकी को विशेष पुरस्कार मिला।
पुरस्कार पाने वाली झांकियों के विषय अलग-अलग थे। कहीं पौराणिक युद्ध को चलित दृश्यों में दिखाया गया, तो कहीं बच्चों के परिचित गीत के माध्यम से समुद्र की दुनिया सजाई गई। शिव बारात और भगवान गणेश के प्रसंग ने धार्मिक वातावरण को और गहरा किया। पुरस्कारों के साथ उन कलाकारों और आयोजन समितियों का काम भी चर्चा में रहा, जिन्होंने समारोह से पहले झांकियों की तैयारी की थी।
65 अखाड़ों ने दिखाए करतब
झांकियों के साथ निकले अखाड़े भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहे। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, इस बार 65 अखाड़ों ने चल समारोह में भाग लिया। उनके पारंपरिक करतब देखने के लिए लोग रास्ते में देर तक रुके रहे। झांकियों के बीच अखाड़ों की प्रस्तुतियों से समारोह में लगातार हलचल बनी रही और शहर का उत्साह पूरी रात कायम रहा।
समारोह के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की उपस्थिति और उनके भजन गाने का प्रसंग भी चर्चा में रहा। उन्होंने एक विधायक और एकलव्य के दिखाई नहीं देने के बारे में पूछा, हालांकि उपलब्ध विवरण में इस बातचीत का पूरा संदर्भ नहीं है। इसलिए इसे किसी राजनीतिक टिप्पणी के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए।
रातभर जागकर लोगों ने निभाई परंपरा
अनंत चतुर्दशी का यह आयोजन केवल झांकियों की प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रहा। मिलों की समितियों, कलाकारों, अखाड़ों और दर्शकों की भागीदारी ने इसे सामूहिक उत्सव का रूप दिया। बच्चे अपने पसंदीदा दृश्य देखते रहे, जबकि बड़े धार्मिक कथाओं और पारंपरिक अखाड़ों की प्रस्तुतियों के लिए रुके। करीब 12 घंटे बाद समारोह समाप्त हुआ, लेकिन इस दौरान सड़क किनारे बनी रही भीड़ ने दिखाया कि झांकियों की यह परंपरा आज भी इंदौर के लोगों के लिए खास स्थान रखती है।
