Census 2027: इंदौर में शुरू हुई मकानों की गिनती, 5934 ब्लॉकों में होगा डिजिटल सर्वे
इंदौर में Census 2027 की तैयारियों के तहत मकानों की गिनती का पहला चरण शुरू हो गया है। इस बार पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि देश के विकास और योजनाओं के लिए सटीक और भरोसेमंद डेटा तैयार किया जा सके। 1 मई 2026 से जिले में मकानों की गणना का कार्य औपचारिक रूप से शुरू कर दिया गया है।
इस अभियान में इंदौर को कुल 5934 ब्लॉकों में विभाजित किया गया है, जहां प्रशिक्षित प्रगणक (एन्यूमरेटर) घर-घर जाकर डेटा एकत्र करेंगे। प्रशासन का लक्ष्य है कि जिले का कोई भी मकान या परिवार इस सर्वे से छूट न जाए।
पहले चरण में इलाके का नक्शा तैयार होगा
जनगणना प्रक्रिया की शुरुआत क्षेत्र भ्रमण से की गई है। प्रगणक पहले अपने-अपने ब्लॉक का भौतिक निरीक्षण कर रहे हैं। इस दौरान वे इलाके का नजरी नक्शा (स्केच मैप) तैयार करेंगे और सभी मकानों की पहचान सुनिश्चित करेंगे।
यह प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे यह तय होगा कि सर्वे में कोई भी घर छूट न जाए। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नक्शा तैयार होने के बाद ही वास्तविक गणना शुरू की जाएगी।
पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल और ऑनलाइन
इस बार जनगणना को पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया गया है। सभी प्रगणक मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से डेटा दर्ज करेंगे। जैसे ही कोई जानकारी सेव की जाएगी, वह सीधे केंद्रीय सर्वर तक पहुंच जाएगी।
इस प्रणाली से डेटा में पारदर्शिता बढ़ेगी और किसी भी तरह की त्रुटि या हेरफेर की संभावना कम हो जाएगी। साथ ही डेटा को रियल टाइम में मॉनिटर किया जा सकेगा।
मकानों की गणना 30 मई तक चलेगी
इंदौर में मकानों की गणना का कार्य 1 मई से शुरू होकर 30 मई 2026 तक चलेगा। इस दौरान हर ब्लॉक में घरों की पूरी जानकारी एकत्र की जाएगी।
प्रशासन ने इस काम के लिए विस्तृत योजना बनाई है, ताकि निर्धारित समय सीमा में सभी क्षेत्रों का सर्वे पूरा किया जा सके। हर प्रगणक को सीमित क्षेत्र सौंपा गया है, जिससे कार्य में तेजी और सटीकता बनी रहे।
नागरिकों से पूछे जाएंगे 34 सवाल
इस जनगणना प्रक्रिया में नागरिकों से कुल 34 प्रश्न पूछे जाएंगे। इनमें घर की स्थिति, परिवार के सदस्यों की संख्या, शिक्षा, रोजगार, आय, आवास की सुविधा, पेयजल, शौचालय, बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी महत्वपूर्ण जानकारी शामिल होगी।
इन सवालों का उद्देश्य लोगों के जीवन स्तर और सुविधाओं का सही आकलन करना है, ताकि भविष्य में योजनाएं उसी आधार पर बनाई जा सकें।
छह हजार से अधिक प्रगणक और 1200 सुपरवाइजर तैनात
इस बड़े अभियान को सफल बनाने के लिए इंदौर जिले में लगभग 6000 प्रगणक और 1200 से अधिक सुपरवाइजरों की तैनाती की गई है। सभी को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है ताकि वे डेटा सही तरीके से एकत्र कर सकें।
प्रशासन का कहना है कि यह देश की सबसे बड़ी डिजिटल जनगणना प्रक्रियाओं में से एक है, जिसमें बड़ी संख्या में मानव संसाधन और तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
10 लाख से अधिक मकानों की पहले ही नंबरिंग
जनगणना की तैयारी के तहत जिले में पहले ही 10 लाख से अधिक मकानों की नंबरिंग की जा चुकी है। इन्हीं नंबरों के आधार पर ब्लॉकों का निर्धारण किया गया है।
इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि हर घर की पहचान स्पष्ट हो और डेटा संग्रह में किसी प्रकार की गलती न हो।
नागरिकों को मिला स्वयं गणना का विकल्प
सरकार ने नागरिकों को स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने का भी विकल्प दिया था। यह सुविधा 15 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक उपलब्ध थी।
इस अवधि में 16,577 लोगों ने स्वयं अपनी जानकारी दर्ज की, जिनमें से 13,778 प्रविष्टियां पूरी तरह सत्यापित की जा चुकी हैं। जिन लोगों ने स्वयं गणना की है, उन्हें अब प्रगणक को अपनी आईडी दिखानी होगी।
विकास योजनाओं के लिए अहम डेटा
यह जनगणना केवल आंकड़े इकट्ठा करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इससे भविष्य की विकास योजनाओं की नींव तैयार होगी। इस डेटा के आधार पर सरकार यह तय करेगी कि किस क्षेत्र में स्कूल, अस्पताल, सड़क, पानी और बिजली जैसी सुविधाओं की अधिक आवश्यकता है।
इसके अलावा यह शहरी और ग्रामीण विकास की असली तस्वीर भी सामने लाएगा।
आपदा और संसाधन प्रबंधन में भी मदद
इस सर्वे से प्राप्त डेटा का उपयोग आपदा प्रबंधन और संसाधन वितरण में भी किया जाएगा। इससे यह पता चलेगा कि कौन से क्षेत्र संवेदनशील हैं और वहां किस प्रकार की सुविधाओं की जरूरत है।
डिजिटल कनेक्टिविटी और आवासीय स्थिति का भी आकलन किया जाएगा, जिससे नीति निर्माण अधिक प्रभावी बन सके।
नागरिकों के लिए जरूरी निर्देश
प्रशासन ने नागरिकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सर्वे के दौरान किसी भी दस्तावेज की फोटोकॉपी देने की आवश्यकता नहीं होगी। केवल जानकारी देना पर्याप्त होगा।
प्रगणक द्वारा किसी भी प्रकार का ओटीपी या बैंक जानकारी नहीं मांगी जाएगी। नागरिकों को केवल सही जानकारी साझा करनी है और सहयोग करना है।
फरवरी 2026 में होगी जनसंख्या गणना
मकानों की गणना के बाद अगले चरण में 1 फरवरी से 28 फरवरी 2026 के बीच जनसंख्या गणना की जाएगी। यह अंतिम चरण होगा जिसमें प्रत्येक व्यक्ति की जानकारी दर्ज की जाएगी।
यह पूरी प्रक्रिया देश की सामाजिक और आर्थिक संरचना को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और भविष्य की योजनाओं को दिशा देगी।
निष्कर्ष
इंदौर में शुरू हुई जनगणना 2027 की यह प्रक्रिया आधुनिक तकनीक और पारदर्शिता का बड़ा उदाहरण है। डिजिटल मैपिंग, ऑनलाइन डेटा एंट्री और बड़े पैमाने पर फील्ड वर्क इसे एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान बनाते हैं।
इससे न केवल प्रशासन को सटीक आंकड़े मिलेंगे, बल्कि आम जनता के जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में भी यह एक मजबूत कदम साबित होगा।
